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रक्षा मंत्रालय में खाली आरक्षित पदों की होगी गिनती, बैकलॉग खत्म करने के लिए बनाई हाई लेवल कमेटी

रक्षा विभाग ने बैकलॉग आरक्षित रिक्तियों की पहचान, कारणों की जांच और विशेष भर्ती अभियानों की निगरानी के लिए बनाई उच्च स्तरीय समिति, हर छह महीने में होगी समीक्षा...

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📍नई दिल्ली | 10 Aug, 2026, 11:09 AM

Defence Ministry Vacancies: रक्षा मंत्रालय ने आरक्षित वर्गों के लिए निर्धारित लेकिन लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। रक्षा विभाग ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और दिव्यांगजन (पीडब्ल्यूबीडी) के लिए आरक्षित बैकलॉग रिक्तियों की पहचान, समीक्षा और निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश के अनुसार यह समिति रक्षा विभाग के विभिन्न निदेशालयों और मुख्यालयों में मौजूद बैकलॉग रिक्तियों का आकलन करेगी। साथ ही यह भी पता लगाएगी कि ये पद सालों तक खाली क्यों रहे और उन्हें भरने में कौन-कौन सी प्रशासनिक या प्रक्रियागत बाधाएं सामने आईं।

यह कदम कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के तहत उठाया गया है। रक्षा सचिव की मंजूरी से जारी इस आदेश का उद्देश्य आरक्षण नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।

Defence Ministry Vacancies: अतिरिक्त सचिव करेंगे समिति की अध्यक्षता

रक्षा विभाग द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव (स्थापना) करेंगे। समिति में उप सचिव (सीपी), उप सचिव (स्थापना), एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी और ईडब्ल्यूएस वर्गों के लिए नियुक्त संपर्क अधिकारी तथा रक्षा विभाग के विभिन्न निदेशालयों और मुख्यालयों के प्रतिनिधियों को सदस्य बनाया गया है।

समिति को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसका पहला काम विभिन्न कार्यालयों में मौजूद बैकलॉग आरक्षित रिक्तियों की पहचान करना होगा। इसके बाद समिति उन कारणों की जांच करेगी जिनकी वजह से ये पद निर्धारित समय में नहीं भरे जा सके।

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समिति उन कारकों का भी विश्लेषण करेगी जो बैकलॉग बढ़ने के लिए जिम्मेदार रहे हैं। इसके आधार पर सुधारात्मक उपायों की सिफारिश की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो। इसके अलावा विशेष भर्ती अभियानों के जरिए इन रिक्तियों को भरने की प्रगति की निगरानी भी समिति करेगी। (Defence Ministry Vacancies)

हर छह महीने में होगी समीक्षा बैठक

आदेश के अनुसार समिति कम से कम हर छह महीने में एक बार बैठक करेगी। इन बैठकों में विभिन्न निदेशालयों और मुख्यालयों से प्राप्त आंकड़ों की समीक्षा की जाएगी।

रक्षा मंत्रालय की यह कार्रवाई दरअसल वर्ष 2014 में शुरू हुई उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में आरक्षित वर्गों के प्रतिनिधित्व को मजबूत करना था।

डीओपीटी ने 19 दिसंबर 2014 को एक विस्तृत कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। यह ज्ञापन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित था।

उस समिति ने केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांग वर्ग के कम प्रतिनिधित्व तथा बैकलॉग रिक्तियों के कारणों का अध्ययन किया था।

रिपोर्ट में पाया गया था कि कई विभागों में आरक्षित पद वर्षों तक खाली रह जाते हैं। इससे आरक्षण नीति का उद्देश्य पूरी तरह पूरा नहीं हो पाता। (Defence Ministry Vacancies)

अक्टूबर 2014 की बैठक में बनी थी कार्ययोजना

22 अक्टूबर 2014 को डीओपीटी में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इसमें सामाजिक न्याय मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया था।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी मंत्रालय अपने स्तर पर विशेषज्ञ समितियां बनाएं। इन समितियों को बैकलॉग रिक्तियों का डेटा तैयार करने, कारणों का विश्लेषण करने और समाधान सुझाने की जिम्मेदारी दी गई।

उस समय मंत्रालयों को 1 अप्रैल 2012 से लंबित बैकलॉग रिक्तियों का समूहवार विवरण तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसमें ग्रुप-ए, ग्रुप-बी, ग्रुप-सी और अन्य श्रेणियों के पद शामिल थे।

साथ ही सीधे भर्ती और पदोन्नति से संबंधित रिक्तियों का अलग-अलग रिकॉर्ड तैयार करने को कहा गया था।

विशेष भर्ती अभियानों पर दिया गया था जोर

डीओपीटी की कार्ययोजना में विशेष भर्ती अभियान महत्वपूर्ण हिस्सा था। मंत्रालयों को निर्देश दिए गए थे कि वे बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाएं।

अगर अभियान के बाद भी पद खाली रह जाते हैं तो संबंधित विभागों को पूर्व-भर्ती प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और पात्र उम्मीदवारों की उपलब्धता बढ़ाने के उपाय करने थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भर्ती प्रक्रिया केवल विज्ञापन आधारित और पारदर्शी तरीके से ही संचालित होनी चाहिए। इसी कारण रोजगार एक्सचेंज या सीमित कैंपस भर्ती जैसे कुछ प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए गए थे। (Defence Ministry Vacancies)

बैकलॉग बढ़ने के पीछे कई वजह

2014 की समीक्षा में बैकलॉग के कई कारण सामने आए थे। इनमें शैक्षिक योग्यता में अंतर, जागरूकता की कमी, भर्ती प्रक्रिया में देरी, तकनीकी पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों की सीमित उपलब्धता और कुछ क्षेत्रों में प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव शामिल था।

विशेष रूप से एसटी वर्ग के उम्मीदवारों की उपलब्धता कुछ तकनीकी पदों पर चुनौती के रूप में सामने आई थी। इसके अलावा वैज्ञानिक और विशेषज्ञता वाले पदों पर भी रिक्तियां लंबे समय तक बनी रहती थीं।

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इन समस्याओं के समाधान के लिए कौशल विकास, पूर्व-भर्ती प्रशिक्षण, योग्यता मानकों की समीक्षा और लगातार निगरानी जैसे उपाय सुझाए गए थे। (Defence Ministry Vacancies)

प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों पर भी रहा फोकस

डीओपीटी ने मंत्रालयों को निर्देश दिया था कि आरक्षित वर्गों के छात्रों और युवाओं को सरकारी नौकरियों के अवसरों के बारे में अधिक जानकारी दी जाए।

इसके लिए रोजगार समाचार, क्षेत्रीय समाचार पत्रों और सरकारी वेबसाइटों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई थी। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने के लिए कहा गया था जहां आरक्षित वर्गों की आबादी अधिक है।

साथ ही ऐसे कर्मचारियों के लिए ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग की भी सिफारिश की गई थी जिन्हें आरक्षण के तहत नियुक्त किया गया है, ताकि वे अपनी क्षमता और दक्षता को और बेहतर बना सकें। (Defence Ministry Vacancies)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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