📍नई दिल्ली | 29 Jul, 2026, 9:33 PM
Disability Pension Income Tax Exemption: भारतीय सेनाओं में डिसेबिलिटी पेंशन पाने वाले पूर्व सैनिकों के लिए राहत की खबर है। रक्षा मंत्रालय के पूर्व सैनिक कल्याण विभाग (डीईएसडब्ल्यू) ने साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार की नई अधिसूचना जारी होने तक विकलांग अधिकारियों की पूरी डिसेबिलिटी पेंशन आयकर से मुक्त रहेगी। इसका मतलब है कि पेंशन के डिसेबिलिटी एलिमेंट और सर्विस एलिमेंट, दोनों पर फिलहाल कोई आयकर नहीं लगेगा।
Disability Pension Income Tax Exemption: क्या कहा है रक्षा मंत्रालय ने?
यह स्पष्टीकरण रक्षा मंत्रालय ने 17 जुलाई को जारी एक आधिकारिक पत्र में दिया है। रक्षा मंत्रालय ने अपने पत्र में बताया है कि डिसेबिलिटी पेंशन पर आयकर छूट का विषय वित्त मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। मंत्रालय ने कहा कि वित्त अधिनियम 2026 की नोट-12 में यह स्पष्ट किया गया है कि नए संशोधन तभी लागू होंगे, जब केंद्र सरकार इसके लिए अलग से अधिसूचना जारी करेगी।
जब तक यह अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक भारतीय सशस्त्र बलों के विकलांग अधिकारियों को मिलने वाली पूरी डिसेबिलिटी पेंशन, यानी डिसेबिलिटी एलिमेंट और सर्विस एलिमेंट, दोनों आयकर से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।
यह स्पष्टीकरण उन पूर्व सैनिकों और अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके बीच हाल के महीनों में इस विषय को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
क्या होती है डिसेबिलिटी पेंशन?
डिसेबिलिटी पेंशन उन सैन्य कर्मियों को दी जाती है, जिन्हें ड्यूटी के दौरान लगी चोट, बीमारी या सेवा से जुड़ी परिस्थितियों के कारण स्थायी या आंशिक विकलांगता हुई हो। इस पेंशन के दो हिस्से होते हैं। पहला सर्विस एलिमेंट, जो सैन्य सेवा के आधार पर मिलता है। दूसरा डिसेबिलिटी एलिमेंट, जो विकलांगता के प्रतिशत के आधार पर तय किया जाता है।
कई सालों से इन दोनों हिस्सों को आयकर से छूट मिलती रही है। हालांकि, कुछ मामलों में अलग-अलग स्तर पर नियमों की व्याख्या को लेकर विवाद भी सामने आए थे।
फाइनेंस एक्ट 2026 के बाद क्यों पैदा हुआ भ्रम?
1 अप्रैल 2026 से लागू नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 और फाइनेंस एक्ट 2026 में डिसेबिलिटी पेंशन से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट रूप से शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक आयकर छूट मुख्य रूप से उन सैन्य कर्मियों को मिलेगी, जिन्हें सेवा के दौरान लगी विकलांगता के कारण समय से पहले सेवा से बाहर किया गया हो। वहीं, ऐसे अधिकारियों को लेकर सवाल उठे, जिन्होंने विकलांग होने के बावजूद अपनी पूरी सेवा पूरी की और बाद में सामान्य रूप से रिटायर हुए।
इसी वजह से पूर्व सैनिकों और पेंशन पाने वाले अधिकारियों को यह आशंका थी कि कहीं उनके सर्विस एलिमेंट पर आयकर न लग जाए। अब रक्षा मंत्रालय के ताजा पत्र ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक केंद्र सरकार अलग से अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
बैंक और पेंशन एजेंसियों भी दें ध्यान
यह पत्र उन बैंकों और पेंशन डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो सैन्य पेंशन का भुगतान करती हैं। पिछले कुछ समय से कई जगह इस बात को लेकर भ्रम था कि डिसेबिलिटी पेंशन के किसी हिस्से पर टीडीएस काटा जाना चाहिए या नहीं।
रक्षा मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल पूरी डिसेबिलिटी पेंशन आयकर से मुक्त रहेगी। ऐसे में इस पर कर कटौती का सवाल नहीं उठता।
पहले भी उठ चुका है यह मुद्दा
डिसेबिलिटी पेंशन पर इनकम टैक्स छूट का मुद्दा पहले भी कई बार सामने आ चुका है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के दौरान सीबीडीटी द्वारा जारी विभिन्न निर्देशों और सर्कुलर के आधार पर विकलांग सैन्य कर्मियों की पूरी डिसेबिलिटी पेंशन को कर-मुक्त माना जाता रहा है। इसके बावजूद कुछ मामलों में कर अधिकारियों और पेंशन एजेंसियों के बीच अलग-अलग व्याख्या के कारण विवाद पैदा हुए।
किस पत्र के जवाब में जारी हुआ स्पष्टीकरण?
इसी विषय पर जून 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी संसद सदस्य महुआ मोइत्रा को भेजे अपने जवाब में कहा था कि नई अधिसूचना जारी होने तक पूरी डिसेबिलिटी पेंशन आयकर से मुक्त रहेगी।
रक्षा मंत्रालय का यह उत्तर 19 फरवरी 2026 को भेजे गए एक पत्र के जवाब में जारी किया गया है। यह पत्र एबीपीएसएसपी नॉर्थ बंगाल की ओर से भेजा गया था, जिसमें विकलांग अधिकारियों की डिसेबिलिटी पेंशन पर आयकर छूट को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया था।
मामले की समीक्षा के बाद रक्षा मंत्रालय ने लिखित रूप में यह स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन नई अधिसूचना लागू होने तक मौजूदा कर छूट जारी रहेगी। (Disability Pension Income Tax Exemption)
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