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एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो के लिए नया कॉम्बैट व्हीकल, ड्रैगुनोव की गोली और 10 किग्रा TNT ब्लास्ट भी झेलेगा

व्हीकल में कम से कम 10 जवानों के बैठने की जगह होनी चाहिए। इनमें एक चालक और नौ गरुड़ कमांडो अपने पूरे युद्धक उपकरणों के साथ यात्रा कर सकेंगे...

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📍नई दिल्ली | 30 Jul, 2026, 11:34 AM

Garud Commando MSAV: भारतीय वायुसेना के स्पेशल फोर्स गरुड़ कमांडो को जल्द ही एक नया मल्टी-स्पेशलिटी आर्मर्ड व्हीकल (एमएसएवी) मिल सकता है। रक्षा मंत्रालय ने मॉडर्न आर्मर्ड व्हीकल की खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (आरएफआई) जारी कर दी है। यह व्हीकल विशेष रूप से उन मिशन के लिए तैयार किया जाएगा, जहां दुर्गम पहाड़, बर्फीले इलाके, रेगिस्तान और सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से कार्रवाई करनी होती है।

यह व्हीकल गरुड़ कमांडो की सुरक्षा, तेज आवाजाही और हथियारों के साथ लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ाने के लिए खरीदा जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद पूरी सप्लाई 12 महीने के भीतर पूरी करनी होगी। खरीद प्रक्रिया डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (डीएपी)-2020 के तहत बाय इंडियन श्रेणी में होगी, जिसमें कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होना अनिवार्य रहेगा।

Garud Commando MSAV: पहाड़, रेगिस्तान और जंगल, हर इलाके में चलेगा व्हीकल

रक्षा मंत्रालय ने आरएफआई में बताया है कि यह व्हीकल पश्चिमी सीमा के रेगिस्तानी और मैदानी इलाकों, उत्तरी सीमा के 5,000 मीटर तक ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों तथा पूर्वोत्तर के जंगलों और कठिन इलाकों में चलने में सक्षम होना चाहिए।

व्हीकल को सड़क और बिना सड़क वाले रास्तों पर समान रूप से चलने योग्य बनाया जाएगा। इसका इस्तेमाल दिन और रात, दोनों समय तथा अलग-अलग मौसम की परिस्थितियों में किया जा सकेगा।

आरएफआई के अनुसार व्हीकल में आधुनिक नेविगेशन सिस्टम, आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड ऑर फो (आईएफएफ) सिस्टम और सर्विलांस इक्विपमेंट्स भी लगाए जाएंगे, जिससे ऑपरेशन के दौरान मित्र और दुश्मन की पहचान आसान हो सके।

एक साथ 10 कमांडो कर सकेंगे सफर

व्हीकल में कम से कम 10 जवानों के बैठने की जगह होनी चाहिए। इनमें एक चालक और नौ गरुड़ कमांडो अपने पूरे युद्धक उपकरणों के साथ यात्रा कर सकेंगे।

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कमांडो के लिए लगाई जाने वाली सीटें झटके सहने वाली होंगी और इस तरह लगाई जाएंगी कि ऑपरेशन के दौरान हथियारों का उपयोग आसान रहे। ड्राइवर और को-ड्राइवर के लिए अलग समायोजित होने वाली सीटें होंगी।

व्हीकल में हथियार रखने के लिए अलग रैक, गोला-बारूद रखने की जगह और अन्य सैन्य उपकरण रखने के लिए विशेष स्टोरेज कम्पार्टमेंट भी बनाए जाएंगे। (Garud Commando MSAV)

बुलेट और विस्फोट से सुरक्षा होगी

इस व्हीकल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुरक्षा है। आरएफआई में कहा गया है कि व्हीकल ऐसा होना चाहिए जो 7.62×54 मिलीमीटर एपीआई बुलेट का सामना कर सके। इन गोलियां का इस्तेमाल ड्रैगुनोव जैसी स्नाइपर राइफलों में किया जाता है।

व्हीकल को 10 किलोग्राम टीएनटी के बराबर विस्फोट से भी चालक दल और कमांडो की सुरक्षा करनी होगी। सुरक्षा केवल सामने से नहीं, बल्कि व्हीकल के किनारों और नीचे के हिस्से के लिए भी अनिवार्य रखी गई है।

व्हीकल के सभी शीशे बुलेटप्रूफ लैमिनेटेड आर्मर्ड ग्लास के होंगे। इनमें सामने और दोनों तरफ विशेष सुरक्षा मानकों के अनुरूप मोटे शीशे लगाए जाएंगे।

हथियार लगाने की भी होगी सुविधा

एमएसएवी केवल सैनिकों को ले जाने वाला व्हीकल नहीं होगा। इसे चलते-फिरते लड़ाकू प्लेटफॉर्म के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

व्हीकल की छत पर 360 डिग्री घूमने वाला टर्रेट होगा, जिस पर 7.62 मिलीमीटर मशीन गन, 12.7 मिलीमीटर मशीन गन, 40 मिलीमीटर मल्टी-शॉट ग्रेनेड लॉन्चर या रिमोट कंट्रोल वेपन स्टेशन लगाया जा सकेगा।

कमांडो के लिए व्हीकल के दोनों तरफ फायरिंग पोर्ट भी होंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर व्हीकल के अंदर से भी जवाबी कार्रवाई की जा सके। (Garud Commando MSAV)

आग लगने पर खुद एक्टिव होगा सिक्योरिटी सिस्टम

रक्षा मंत्रालय ने व्हीकल में ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम लगाने की भी शर्त रखी है।

यदि इंजन कम्पार्टमेंट या सैनिकों के बैठने वाले हिस्से में आग लगती है तो यह सिस्टम अपने आप एक्टिव होकर आग बुझाने का काम करेगी। इसके अलावा व्हीकल में दो अतिरिक्त पोर्टेबल फायर एक्सटिंग्विशर भी लगाए जाएंगे।

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आरएफआई के अनुसार व्हीकल में सिक्स सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन लगाया जाएगा, जिसकी क्षमता कम से कम 450 हॉर्सपावर होगी। व्हीकल की अधिकतम गति हाईवे पर 100 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक होगी, जबकि कठिन इलाकों में यह 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकेगा।

एक बार ईंधन भरने पर व्हीकल हाईवे पर कम से कम 600 किलोमीटर और कठिन रास्तों पर लगभग 300 किलोमीटर तक चलने में सक्षम होना चाहिए।

इसमें ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन, पावर स्टीयरिंग, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस), हिल होल्ड असिस्ट और ऑल-व्हील ड्राइव जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य रखी गई हैं।

बर्फ, रेगिस्तान और खराब रास्तों के लिए विशेष व्यवस्था

रक्षा मंत्रालय ने व्हीकल को हर तरह के इलाके के लिए तैयार करने की शर्त रखी है। व्हीकल में रन-फ्लैट टायर लगाए जाएंगे, ताकि गोली लगने या टायर खराब होने के बाद भी कम से कम 10 किलोमीटर तक व्हीकल चलता रहे।

इसके साथ सेंट्रल टायर इन्फ्लेशन सिस्टम होगा, जिससे चालक जरूरत के अनुसार चलते-चलते टायर का दबाव बदल सकेगा। रेगिस्तान के लिए अलग टायर और सामान्य सड़कों के लिए अलग टायर उपलब्ध कराए जाएंगे।

बर्फीले क्षेत्रों में इस्तेमाल के लिए चार एंटी-स्किड स्नो चेन और एक अतिरिक्त स्पेयर व्हील भी व्हीकल का हिस्सा होंगे। (Garud Commando MSAV)

एडवांस नेविगेशन सिस्टम जरूरी

व्हीकल में ऐसा नेविगेशन सिस्टम लगाया जाएगा, जो नैविक, जीपीएस और ग्लोनास तीनों सैटेलाइट सिस्टम्स के साथ काम कर सके। डिजिटल मैप, स्थान की जानकारी और मिशन से जुड़ी सूचनाएं व्हीकल के अंदर लगे डिस्प्ले पर दिखाई देंगी। इसके अलावा दो सैन्य रेडियो सेट लगाने की सुविधा भी होगी, जिससे ऑपरेशन के दौरान लगातार संपर्क बनाए रखा जा सके। (Garud Commando MSAV)

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कैमोफ्लाज और आईएफएफ सिस्टम भी रहेगा

एमएसएवी के लिए विशेष मल्टी-स्पेक्ट्रल थ्री-डी कैमो किट भी मांगी गई है। इसका उद्देश्य व्हीकल की पहचान को कम करना है।

यह कैमो कवर दिन और रात दोनों समय काम करेगा। इससे व्हीकल थर्मल इमेजर और इमेज इंटेंसिफायर जैसे निगरानी उपकरणों से आसानी से दिखाई नहीं देगा।

व्हीकल में थर्मल आईआर बीकन और ऑपरेटर थर्मल नाइट साइट भी होगी, जिससे फ्रेंड फोर्सेज की पहचान और रात में ऑपरेशन आसान हो सके। (Garud Commando MSAV)

व्हीकल में 120 लीटर तक पीने के पानी की व्यवस्था

रक्षा मंत्रालय ने व्हीकल में केवल सुरक्षा और हथियारों पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि जवानों की सुविधा से जुड़े कई प्रावधान भी शामिल किए हैं।

व्हीकल में 120 लीटर तक पीने के पानी की व्यवस्था होगी। इसके अलावा एचवीएसी सिस्टम लगाया जाएगा, जो बाहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस होने पर भी अंदर का तापमान लगभग 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास बनाए रख सके।

इसके साथ मेडिकल बैग, टूल किट, टोइंग हुक, फ्रंट और रियर कैमरा सिस्टम, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, अतिरिक्त बैटरी, सेल्फ रिकवरी विन्च और अन्य सैन्य उपकरण भी व्हीकल का हिस्सा होंगे। (Garud Commando MSAV)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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