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DRDO का बड़ा कदम! क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के लिए छोटे गैस टर्बाइन इंजन का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी

क्रूज मिसाइल, लोइटरिंग म्यूनिशन और हाई-स्पीड ड्रोन की बढ़ती जरूरतों के बीच जीटीआरई ने दो अतिरिक्त भारतीय कंपनियों के चयन की प्रक्रिया शुरू की, 24 से 36 महीने में इंजन डिलीवरी का लक्ष्य...

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📍नई दिल्ली/बेंगलुरु | 10 Aug, 2026, 12:49 PM

GTRE Expendable Engine: भारतीय सेनाओं में क्रूज मिसाइलों, हाई-स्पीड ड्रोन, लोटरिंग म्यूनिशन और अन्य एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म की मांग लगातार बढ़ रही है। जिसके बाद डीआरडीओ के तहत आने वाली गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (जीटीआरई) देश में छोटे गैस टर्बाइन इंजनों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए बड़ी तैयारी कर रही है।

जीटीआरई ने एक्स्पेंडेबल गैस टर्बाइन इंजन के निर्माण, असेंबली और सप्लाई के लिए दो अतिरिक्त भारतीय उद्योग भागीदारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो उच्च तकनीक वाले एयरोस्पेस और गैस टर्बाइन कंपोनेंट्स का निर्माण कर सकें।

GTRE Expendable Engine: गैस टर्बाइन तकनीक पर काम कर रहा है जीटीआरई

बेंगलुरु स्थित जीटीआरई लंबे समय से गैस टर्बाइन तकनीक पर काम कर रहा है। जीटीआरई ने एक छोटे आकार का ट्विन-स्पूल गैस टर्बाइन इंजन बनाया है, जिसे एक्स्पेंडेबल एप्लीकेशन्स के लिए डिजाइन किया गया है। एक्स्पेंडेबल का मतलब ऐसे प्लेटफॉर्म से है जो मिशन के दौरान एक बार इस्तेमाल किए जाते हैं और बाद में वापस नहीं लाए जाते।

अभी तक ऐसे इंजन के उत्पादन के लिए सीमित औद्योगिक क्षमता उपलब्ध है। इसी वजह से जीटीआरई ने इसके प्रोडक्शन और के लिए दो अतिरिक्त भारतीय उद्योग भागीदारों को शामिल करने का फैसला लिया है। जीटीआरई की तरफ से जरी आरएफपी के अनुसार वर्तमान निर्माता को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है ताकि नए उद्योगों को मौका मिल सके और उत्पादन क्षमता को कई जगह बांटा जा सके। (GTRE Expendable Engine)

क्या है एक्स्पेंडेबल इंजन

जीटीआरई का बनाया यह इंजन एक ट्विन-स्पूल गैस टर्बाइन इंजन है। ट्विन-स्पूल डिजाइन का अर्थ है कि इंजन में हाई प्रेशर और लो प्रेशर सेक्शन अलग-अलग स्पूल पर काम करते हैं। इससे इंजन की कार्यक्षमता और प्रदर्शन बेहतर होता है।

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यह इंजन विशेष रूप से एक्स्पेंडेबल एप्लिकेशन के लिए विकसित किया गया है। यानी ऐसे प्लेटफॉर्म जिनका उपयोग एक मिशन के दौरान किया जाता है और जिनकी रिकवरी जरूरी नहीं होती।

इस इंजन में 15 से अधिक प्रमुख सब-असेंबली और 400 से ज्यादा इंजीनियरिंग ड्रॉइंग शामिल हैं। इसके निर्माण में विशेष स्टील, एल्युमिनियम एलॉय, टाइटेनियम एलॉय तथा निकल और कोबाल्ट आधारित सुपर एलॉय का इस्तेमाल किया जाता है। कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का डायामीटर लगभग 400 मिलीमीटर तक है।

किन सैन्य प्लेटफॉर्म में होगा इस्तेमाल

जीटीआरई ने इस इंजन को विशेष रूप से एक्स्पेंडेबल प्लेटफॉर्म के लिए डेवलप किया है। इनमें लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें प्रमुख हैं।

पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन के इस्तेमाल में तेजी आई है। इसी कारण ऐसे छोटे लेकिन विश्वसनीय गैस टर्बाइन इंजनों की आवश्यकता बढ़ी है। भारतीय सेनाओं द्वारा विभिन्न प्रकार के स्वदेशी ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रमों पर काम किए जाने के कारण इस कैटेगरी के इंजनों की मांग लगातार बढ़ रही है। (GTRE Expendable Engine)

बनाने होंगे तीन इंजन

इस प्रक्रिया में शामिल सभी साझेदार को तीन इंजन बनाने होंगे। इस तरह दोनों कंपनियों द्वारा कुल छह इंजन तैयार किए जाएंगे। इन इंजनों का निर्माण, असेंबली, परीक्षण और डिलीवरी पूरी तरह कंपनियों द्वारा की जाएगी, जबकि डिजाइन और टेक्निकल डॉक्यूमेंट्स जीटीआरई उपलब्ध कराएगा। वहीं, भविष्य में सशस्त्र बल या भारत सरकार द्वारा नामित कोई अन्य एजेंसी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के तहत इन कंपनियों से सीधे प्रोडक्शन सीरीज के के इंजन भी खरीद सकेगी। (GTRE Expendable Engine)

क्लीन रूम में होगी इंजन असेंबली

इंजन असेंबली के लिए सामान्य प्रोडक्शन एरिया का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आरएफपी के अनुसार चयनित उद्योगों के पास आईएसओ-8 या उससे बेहतर क्लीन रूम होना चाहिए। इसी कंट्रोल एनवॉयरमेंट में इंजन की असेंबी की जाएगी। जीटीआरई ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंजन असेंबली को किसी अन्य कंपनी को आउटसोर्स नहीं किया जा सकता।

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साथ ही, कंपनी के पास एयरोस्पेस क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। उसे विशेष स्टील, टाइटेनियम और निकल या कोबाल्ट आधारित सुपर एलॉय के साथ काम करने का अनुभव होना चाहिए।

कंपनी ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कम से कम 10 करोड़ रुपये का एक एयरोस्पेस ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरा किया हो। वहीं कंपनी का औसत वार्षिक कारोबार 300 करोड़ रुपये या उससे अधिक होना भी जरूरी है। इसके अलावा पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने कम से कम 10 करोड़ रुपये का एकल एयरोस्पेस ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरा किया हो।

वहीं, डीएपी 2020 के अनुसार उद्योग का भारतीय होना अनिवार्य है। विदेशी सहयोग, विदेशी उत्पादन या महत्वपूर्ण कार्यों की आउटसोर्सिंग की अनुमति नहीं होगी।

जीटीआरई ने परियोजना के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है। प्रत्येक उद्योग को पहला इंजन फर्स्ट आर्टिकल इंस्पेक्शन के लिए ऑर्डर जारी होने के 24 महीने के भीतर देना होगा। इसके बाद बाकी दो इंजन 36 महीने के भीतर डिलीवर करने होंगे।

यदि आवश्यकता हुई तो चयनित उद्योग को इंजन री-बिल्ड का कार्य भी करना होगा। इसमें इंजन को खोलना, साफ करना, आवश्यक मरम्मत करना और दोबारा असेंबल करना शामिल होगा। (GTRE Expendable Engine)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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