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भारतीय सेना को मिले 106 ‘अग्निवेग’! 180 किमी दूर दुश्मन के ठिकाने होंगे तबाह, रूसी लेंसेट और इजराइली हारोप को देगा टक्कर!

इन ड्रोन का नाम पीसकीपर (अग्निवेग) रखा गया है। यह एक जेट इंजन से चलने वाला लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम है, जिसे आम भाषा में कामिकेज ड्रोन भी कहा जाता है...

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📍नई दिल्ली | 11 Jun, 2026, 8:41 PM

Agniveg Kamikaze Drone: आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब केवल टैंक, तोप और लड़ाकू विमान ही युद्ध का परिणाम तय नहीं करते, बल्कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रिसीजन स्ट्राइक सिस्टम भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दिल्ली स्थित डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी एसएमपीपी लिमिटेड ने भारतीय सेना को 100 ऑपरेशनल और 6 ट्रेनिंग सिस्टम समेत कुल 106 जेट बेस्ड कामिकेज ड्रोन सौंपे हैं।

Agniveg Kamikaze Drone: आखिर क्या है पीसकीपर (अग्निवेग)?

इन ड्रोन का नाम पीसकीपर (अग्निवेग) रखा गया है। यह एक जेट इंजन से चलने वाला लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम है, जिसे आम भाषा में कामिकेज ड्रोन भी कहा जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह दुश्मन के इलाके में अंदर जाकर टारगेट की खोज कर सकता है और फिर खुद को टारगेट से टकराकर उसे नष्ट कर सकता है।

सामान्य निगरानी ड्रोन कैमरे या सेंसर के जरिए जानकारी जुटाते हैं और वापस लौट आते हैं, लेकिन कामिकेज ड्रोन खुद एक हथियार होता है।

इसे टारगेट की पहचान करने, उसके ऊपर मंडराने और सही समय आने पर सीधे टकराकर उसे नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है। इसी वजह से इसे लोइटरिंग म्यूनिशन भी कहा जाता है।

दुनिया भर में इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष और हालिया सैन्य अभियानों ने साबित किया है कि ऐसे सिस्टम पारंपरिक हथियारों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और किफायती साबित हो सकते हैं। (Agniveg Kamikaze Drone)

केवल छह महीने में पूरी हुई डिलीवरी

एसएमपीपी लिमिटेड ने सेना के लिए यह पूरा ऑर्डर केवल छह महीनों में पूरा किया है। डिफेंस सेक्टर में इतने कम समय में किसी ऐसे वेपन सिस्टम की डिलीवरी को बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशीष कंसल ने कहा कि अग्निवेग की डिलीवरी केवल एसएमपीपी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके अनुसार आधुनिक युद्ध में सटीकता, स्वायत्तता और किफायतीपन सबसे महत्वपूर्ण तत्व बन चुके हैं और ऐसे सिस्टम युद्धक्षेत्र में फोर्स मल्टीप्लायर की भूमिका निभाते हैं।

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कंपनी के अनुसार 100 ड्रोन सीधे ऑपरेशनल यूनिट्स को दिए गए हैं, जबकि 6 सिस्टम सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।

डिलीवरी से पहले इन ड्रोन का विस्तृत जांच की गई। परीक्षणों के दौरान इन्हें ऐसे माहौल में उड़ाया गया जहां भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और स्पूफिंग मौजूद थी। इसके बावजूद सिस्टम ने अपने टारगेट को सटीकता से भेदा।

जेट इंजन इसे बनाता है खास

अधिकांश छोटे ड्रोन प्रोपेलर बेस्ड होते हैं। उनकी गति सीमित होती है और लंबी दूरी पर उनके प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ता है।

अग्निवेग की सबसे बड़ी ताकत इसका टर्बोजेट इंजन है। यही वजह है कि यह 450 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार हासिल कर सकता है।

इतनी तेज रफ्तार के चलते दुश्मन के लिए इसे पहचानना और रोकना अधिक कठिन हो जाता है। इसके अलावा यह कम समय में टारगेट तक पहुंच सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जेट आधारित लोइटरिंग म्यूनिशन भविष्य के युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं क्योंकि वे ड्रोन और क्रूज मिसाइल के बीच की क्षमता प्रदान करते हैं।

जहां तोपों की मारक क्षमता सीमित होती है और लंबी दूरी की मिसाइलें महंगी होती हैं, वहीं यह ड्रोन अपेक्षाकृत कम लागत में सटीक हमला कर सकता है। (Agniveg Kamikaze Drone)

180 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता

अग्निवेग की ऑपरेशनल रेंज लगभग 180 किलोमीटर है। इसका मतलब है कि भारतीय सेना सीमा से काफी दूरी पर मौजूद महत्वपूर्ण टारगेट्स पर हमला कर सकती है।

सैन्य दृष्टि से यह दूरी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे दुश्मन के कमांड सेंटर, रसद केंद्र, गोला-बारूद डिपो, रडार स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

अब तक इस प्रकार के टारगेट्स पर हमला करने के लिए या तो लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता था या फिर लड़ाकू विमानों की मदद लेनी पड़ती थी। अग्निवेग इन दोनों के बीच एक नया बेहतरीन विकल्प है।

कितना सटीक है यह सिस्टम?

आधुनिक युद्ध में केवल दूरी और गति ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि सटीकता भी उतनी ही जरूरी होती है। एसएमपीपी के अनुसार यूजर ट्रायल्स के दौरान अग्निवेग ने पांच मीटर से कम का सर्कुलर एरर प्रोबेबल हासिल किया। सरल शब्दों में कहें तो यह ड्रोन अपने निर्धारित लक्ष्य के बेहद करीब जाकर हमला करने में सक्षम है।

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यह क्षमता विशेष रूप से उन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण होती है जहां किसी सैन्य ठिकाने के केवल एक हिस्से को निशाना बनाना हो या आसपास सिविलियन स्ट्रक्चर मौजूद हो। (Agniveg Kamikaze Drone)

इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में भी प्रभावी

आज का युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम भी युद्ध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। दुश्मन अक्सर ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए जैमिंग और स्पूफिंग का सहारा लेते हैं।

जैमिंग में संचार और नेविगेशन सिग्नल बाधित किए जाते हैं, जबकि स्पूफिंग के जरिए हथियार को गलत दिशा में भेजने की कोशिश की जाती है। अग्निवेग को इसी चुनौती को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

कंपनी का दावा है कि यह सिस्टम भारी इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान वाले वातावरण में भी अपना मिशन पूरा कर सकता है। इसकी स्वायत्त क्षमता इसे लगातार बदलती परिस्थितियों में भी प्रभावी बनाती है। (Agniveg Kamikaze Drone)

किन लक्ष्यों को बना सकता है निशाना?

अग्निवेग को विशेष रूप से हाई वैल्यू टारगेट्स के लिए तैयार किया गया है। यह दुश्मन के कमांड और कंट्रोल सेंटर, रडार स्टेशन, लॉजिस्टिक्स हब, कम्युनिकेशन सेंटर, मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है।

ऐसे टारगेट अक्सर युद्ध के परिणाम को प्रभावित करते हैं। यदि दुश्मन का कमांड नेटवर्क या रडार सिस्टम निष्क्रिय हो जाए तो उसकी सैन्य क्षमता पर सीधा असर पड़ता है।

पिछले कुछ सालों में कामिकेज ड्रोन ने युद्ध की तस्वीर बदल दी है। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस और यूक्रेन दोनों ने बड़ी संख्या में लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल किया। इसी प्रकार अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच नागोर्नो-काराबाख संघर्ष में भी इन हथियारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इनकी लोकप्रियता के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले इनकी लागत पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में कम होती है। दूसरा, इन्हें ऑपरेट करने में कम संसाधनों की जरूरत होती है। तीसरा, पायलट या सैनिक को सीधे खतरे में नहीं जाना पड़ता।

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इसके अलावा ये लक्ष्य के ऊपर मंडराकर सही समय पर हमला करने की क्षमता रखते हैं, जो कई बार पारंपरिक हथियार नहीं कर पाते। (Agniveg Kamikaze Drone)

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा फोकस

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि हाल के सैन्य अभियानों ने ड्रोन और प्रिसीजन स्ट्राइक सिस्टम की आवश्यकता को और स्पष्ट किया है।

इसी कारण भारतीय सेना ने तेजी से ऐसे सिस्टम्स को शामिल करना शुरू किया है जो कम लागत में अधिक प्रभावी हमला करने की क्षमता प्रदान करती हैं।

एसएमपीपी लिमिटेड लंबे समय तक बैलिस्टिक प्रोटेक्शन सिस्टम्स के लिए जानी जाती रही है। कंपनी ने भारतीय सैनिकों के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, बख्तरबंद प्लेट और सुरक्षा समाधान तैयार किए हैं। इसके अलावा कंपनी ने गोला-बारूद और रक्षा सामग्री निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। वहीं, अब कंपनी ने ड्रोन, काउंटर ड्रोन सिस्टम और प्रिसीजन स्ट्राइक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया है।

दुनिया में कई देश पहले से लोइटरिंग म्यूनिशन विकसित कर चुके हैं। इजराइल का हारोप, अमेरिका का स्विचब्लेड और रूस का लैंसेट इस श्रेणी के प्रमुख सिस्टम माने जाते हैं। अग्निवेग की विशेषता इसका जेट इंजन, लंबी दूरी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के माहौल में काम करने की क्षमता है। भारतीय सेना को अब इस कैटेगरी में एक स्वदेशी विकल्प मिल गया है, जिससे विदेशी निर्भरता भी कम होगी। (Agniveg Kamikaze Drone)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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