📍नई दिल्ली | 21 Apr, 2026, 7:55 PM
ndian Army mine clearing system: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के मेन बैटल टैंकों टी-72 और टी-90 के लिए ट्रॉल असेंबली की खरीद करने जा रही है। इसके लिए मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत करीब 975 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं। ट्रॉल असेंबली सिस्टम टैंकों के सामने लगाया जाता है और युद्ध के दौरान माइंस वाले इलाकों को सुरक्षित बनाने में मदद करता है।
Indian Army mine clearing system: क्या है ट्रॉल असेंबली
ट्रॉल असेंबली एक खास तरह का माइन क्लियरिंग डिवाइस है। इसे टैंक के आगे लगाया जाता है ताकि रास्ते में बिछी एंटी-टैंक माइंस को हटाया जा सके।
इसमें दो मुख्य हिस्से होते हैं। पहला है ट्रॉल रोलर, जो भारी वजन के चलते जमीन पर दबाव डालकर माइंस को फटने पर मजबूर करता है। दूसरा है ट्रैक विड्थ माइन प्लाऊ, जो मिट्टी को हटाकर या धकेलकर माइंस को साइड में कर देता है। इन दोनों सिस्टम का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से एक साथ या अलग-अलग किया जा सकता है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम
जब टैंक आगे बढ़ता है, तो ट्रॉल असेंबली उसके सामने रास्ता साफ करती चलती है। इससे टैंक यूनिट्स के लिए सुरक्षित रास्ता बन जाता है, जिसे व्हीकल सेफ लेन कहा जाता है।
यह सिस्टम खासतौर पर आधुनिक एंटी-टैंक माइंस के खिलाफ काम करता है, जिनमें मैग्नेटिक फ्यूज लगे होते हैं। ऐसे माइंस टैंक के पास आते ही एक्टिव हो जाते हैं, लेकिन ट्रॉल सिस्टम उन्हें पहले ही निष्क्रिय कर देता है।
इस सिस्टम को डीआरडीओ की आर एंड डी इंजीनियर्स लैब, पुणे ने डिजाइन और डेवलप किया है। इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने इसे बाय इंडियन-आईडीडीएम कैटेगरी में खरीदा है, जिसका मतलब है कि इसका डिजाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही हुआ है।
इस प्रोजेक्ट के तहत भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड यानी बीईएमएल को लगभग 590 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। इसके अलावा इलेक्ट्रो न्यूमैटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को भी कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा दिया गया है।
भारतीय सेना के टी-72 और टी-90 टैंक सेना की मुख्य ताकत माने जाते हैं। इन टैंकों पर ट्रॉल असेंबली लगाने से उनकी ऑपरेशन क्षमता और बढ़ जाएगी। अब ये टैंक माइंस से भरे इलाकों में भी बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे। इससे आर्मर्ड यूनिट्स की मूवमेंट तेज होगी और जोखिम कम होगा।

