📍नई दिल्ली/जकार्ता | 21 Apr, 2026, 7:31 PM
INS Sunayna Jakarta IOS SAGAR Mission: भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस सुनयना इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गया है। यह जहाज आईओएस सागर पहल के तहत तैनात है और अपने ऑपरेशनल मिशन के दौरान यह तीसरे पोर्ट कॉल पर यहां पहुंचा है। इस मिशन का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ समुद्री सहयोग को मजबूत करना है।
INS Sunayna Jakarta IOS SAGAR Mission: मलक्का और सिंगापुर स्ट्रेट्स से होकर पहुंचा जहाज
आईएनएस सुनयना जकार्ता पहुंचने से पहले मलक्का और सिंगापुर स्ट्रेट्स जैसे संकरे समुद्री रास्तों से होकर गुजरा। ये रास्ते दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में गिने जाते हैं। इस दौरान जहाज ने सुरक्षित नेविगेशन और आपसी तालमेल यानी इंटरऑपरेबिलिटी का प्रदर्शन किया।
इस जहाज की एक खास बात यह भी है कि इसमें 16 मित्र देशों के 39 अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक शामिल हैं। मल्टीनेशनल क्रू के साथ यह मिशन भारत की साझेदारी आधारित समुद्री नीति को दिखाता है।
क्या है आईओएस सागर पहल
आईओएस सागर दरअसल भारत के महासागर विजन “महासागर” का हिस्सा है। इसका पूरा मतलब है म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन।
इस पहल के जरिए भारत हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ मिलकर सुरक्षा, सहयोग और विकास को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इस मिशन का हार्बर फेज मार्च 2026 में भारत में पूरा हो चुका है, जबकि अब इसका सी फेज अप्रैल से मई के बीच चल रहा है।
इंडोनेशियाई नौसेना के साथ होंगे संयुक्त कार्यक्रम
जकार्ता में इस पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस सुनयना की टीम इंडोनेशिया की नौसेना यानी टीएनआई एएल के साथ कई गतिविधियों में हिस्सा लेगी। इसमें प्रोफेशनल बातचीत, सामाजिक कार्यक्रम और खेलकूद से जुड़े आयोजन शामिल हैं।
जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने कोडाएराल थ्री यानी इंडोनेशियाई नौसेना के क्षेत्रीय कमांड के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इसके अलावा दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच योग सत्र, खेल मुकाबले और जहाज का दौरा जैसे कार्यक्रम भी तय किए गए हैं।
इस दौरान एक डेक रिसेप्शन भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के लोग शामिल होंगे।
पासेक्स अभ्यास भी होगा आयोजित
आईएनएस सुनयना के जकार्ता से रवाना होने के समय भारतीय और इंडोनेशियाई नौसेना के बीच पासेक्स यानी पैसेज एक्सरसाइज भी की जाएगी। यह एक तरह का संयुक्त समुद्री अभ्यास होता है, जिसमें दोनों देश अपने तालमेल और ऑपरेशन क्षमता को बेहतर बनाते हैं। इस तरह के अभ्यास से समुद्र में एक-दूसरे के साथ काम करने की समझ मजबूत होती है।
यह मिशन भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए भारत यह संदेश दे रहा है कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और खुले समुद्री रास्ते सभी देशों के लिए जरूरी हैं।
आईएनएस सुनयना की यह यात्रा अलग-अलग देशों के साथ भरोसा और सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


