📍लखनऊ | 30 May, 2026, 4:47 PM
Nausena Shaurya Vatika: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय नौसेना की वीरता, समुद्री ताकत और सैनिकों के बलिदान को समर्पित नौसेना शौर्य वाटिका अब आम लोगों के लिए खोल दी गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश की मौजूदगी में 30 मई को इस ओपन एयर डिस्प्ले म्यूजियम का उद्घाटन हुआ। करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में तैयार की गई यह वाटिका भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता, तकनीक और शौर्य को करीब से दिखाती है।
इस शौर्य वाटिका में भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस गोमती से जुड़े हथियार, रडार, मिसाइल लॉन्चर, टॉरपीडो सिस्टम और कई असली सैन्य उपकरण लगाए गए हैं। इसके अलावा लंबे समय तक समुद्री निगरानी करने वाले टीयू-142एम एयरक्राफ्ट का वॉकथ्रू म्यूजियम भी बनाया गया है। उद्घाटन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देश की सुरक्षा और सैनिकों के बलिदान का एहसास कराने वाला प्रेरणा केंद्र है।
Nausena Shaurya Vatika: नौसेना की ताकत को करीब से दिखाएगी शौर्य वाटिका
लखनऊ में बनाई गई नौसेना शौर्य वाटिका को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां आने वाले लोग भारतीय नौसेना की असली ताकत को समझ सकें। पार्क में आईएनएस गोमती पर इस्तेमाल होने वाले कई हथियार और सैन्य सिस्टम लगाए गए हैं। इनमें एके-726 नेवल गन, सरफेस टू एयर मिसाइल लॉन्चर, सरफेस टू सरफेस एंटी शिप मिसाइल सिस्टम, जहाज का रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, एंकर और जहाज के मस्तूल शामिल हैं।
इन उपकरणों को इस तरह प्रदर्शित किया गया है ताकि आम लोग समझ सकें कि युद्धपोत समुद्र में किस तरह काम करते हैं और नौसेना समुद्री सीमाओं की रक्षा कैसे करती है। पार्क में आधुनिक लाइटिंग और साउंड सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे रात में इसका दृश्य और आकर्षक दिखाई देता है। इसके साथ ही फूड कोर्ट और सोवेनियर शॉप जैसी सुविधाएं भी बनाई गई हैं।
रक्षा मंत्री बोले- आज समुद्री सुरक्षा सबसे बड़ी जरूरत
उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में समुद्री रास्तों की सुरक्षा बेहद जरूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से चलता है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा केवल सैन्य जरूरत नहीं बल्कि वैश्विक शांति और समृद्धि का भी आधार है।
उन्होंने भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल तैयारी की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना हर परिस्थिति में देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है। राजनाथ सिंह ने कहा कि नौसेना शौर्य वाटिका युवाओं में राष्ट्र निर्माण और सेना के प्रति सम्मान की भावना पैदा करेगी।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी और सुरक्षा की असली कीमत सैनिकों के त्याग और बलिदान से समझी जा सकती है। यह वाटिका उसी भावना को जीवित रखने का प्रयास है।
ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना की भूमिका का जिक्र
रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना ने अरब सागर में जिस तरह अपनी मजबूत मौजूदगी दिखाई, उससे पाकिस्तान नौसेना दबाव में आ गई थी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना की आक्रामक और मजबूत तैनाती का असर यह हुआ कि पाकिस्तान नौसेना अपने बंदरगाहों तक सीमित रही। उन्होंने भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों की संयुक्त भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों की बढ़ती ताकत सरकार की रणनीतिक योजना और लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है।
आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर सरकार का जोर
रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम में आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को वास्तव में मजबूत तब माना जाएगा जब सेना को हथियारों और सैन्य उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, आईडैक्स और अदिति जैसी योजनाओं के जरिए भारत अब आधुनिक हथियार खुद बना रहा है। भारतीय रक्षा उद्योग अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है बल्कि कई मित्र देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात भी किया जा रहा है।
राजनाथ सिंह ने बताया कि 2014 में भारत का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। वहीं रक्षा निर्यात भी एक हजार करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहा है और राज्य में रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने सैनिकों को बताया देश की सुरक्षा की ढाल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश के जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, तभी देश का हर नागरिक चैन की नींद सो पाता है।
उन्होंने कहा कि विकास योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं जब देश सुरक्षित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकसित भारत विजन सैनिकों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र बन रहा है और राज्य में रक्षा उद्योग को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
नौसेना का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट था आईएनएस गोमती
नौसेना शौर्य वाटिका का सबसे बड़ा आकर्षण आईएनएस गोमती से जुड़े सैन्य उपकरण हैं। आईएनएस गोमती भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट था। इसका नाम उत्तर प्रदेश की गोमती नदी पर रखा गया था।
इस युद्धपोत को 16 अप्रैल 1988 को मझगांव डॉक लिमिटेड में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह गोदावरी क्लास का तीसरा युद्धपोत था। 34 साल तक सेवा देने के बाद 29 मई 2022 को इसे डीकमीशन किया गया।
सेवा के दौरान आईएनएस गोमती ने कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में हिस्सा लिया। इनमें ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन पराक्रम और ऑपरेशन रेनबो शामिल रहे। इसके अलावा इस युद्धपोत ने कई द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में भी भाग लिया।
भारतीय समुद्री सुरक्षा में बेहतरीन योगदान के लिए आईएनएस गोमती को दो बार यूनिट साइटेशन अवॉर्ड भी दिया गया। पहली बार 2007-08 में और दूसरी बार 2019-20 में यह सम्मान मिला।
टीयू-142एम एयरक्राफ्ट भी आकर्षण का केंद्र
नौसेना शौर्य वाटिका में टीयू-142एम समुद्री निगरानी विमान का वॉकथ्रू म्यूजियम भी बनाया गया है। यह विमान लंबे समय तक समुद्र में निगरानी करने और दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
हालांकि अब यह विमान भारतीय नौसेना की सक्रिय सेवा में नहीं है, लेकिन इसे भारतीय समुद्री सुरक्षा इतिहास का अहम हिस्सा माना जाता है। वाटिका में लोग इसके अंदर जाकर देख सकेंगे कि यह विमान किस तरह काम करता था और समुद्री मिशनों को कैसे अंजाम देता था।
नौसेना शौर्य वाटिका को केवल सैन्य संग्रहालय के रूप में नहीं बल्कि युवाओं और छात्रों के लिए प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहां आने वाले लोग भारतीय नौसेना की कार्यप्रणाली, समुद्री युद्ध तकनीक और सैनिकों के जीवन को करीब से समझ सकेंगे।
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के संग्रहालय युवाओं में देशभक्ति की भावना मजबूत करते हैं और उन्हें सशस्त्र बलों के बारे में जागरूक बनाते हैं।




