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भारत की पहली मल्टीनेशनल मिलिट्री एक्सरसाइज ‘प्रगति’ में नहीं पहुंचा बांग्लादेश, सैन्य अभ्यास से दूरी बनाकर क्या दे रहा संदेश?

बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सत्ता संभालने के बाद अपने पहले विदेशी दौरे के लिए चीन को चुना है। जून के आखिर में उनकी बीजिंग यात्रा होने वाली है। इस दौरान वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात करेंगे...

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📍नई दिल्ली/उमरोई | 30 May, 2026, 3:38 PM

Exercise Pragati 2026: भारत की पहली मल्टीनेशनल मिलिट्री एक्सरसाइज ‘प्रगति 2026’ इस समय मेघालय के उमरोई फील्ड ट्रेनिंग नोड में चल रही है। इस युद्धाभ्यास में एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा बांग्लादेश की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है। बांग्लादेश को भी इस अभ्यास का न्योता भेजा गया था, लेकिन उसने इसमें भाग नहीं लिया।

वहीं बांग्लादेश के इस युद्धाभ्यास में नहीं शामिल होने को भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में बढ़ती दूरी के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह एक्सरसाइज उसी मेघालय इलाके में हो रही है, जहां पहले भारत और बांग्लादेश की संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज ‘सम्प्रिति’ आयोजित होती थी।

भारत समेत कुल 13 देशों के 400 से ज्यादा सैनिक इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम शामिल हैं। यह अभ्यास 20 मई से शुरू हुआ और 31 मई तक चलेगा। विदेशी सैन्य दलों का आना 18 मई से ही शुरू हो गया था।

Exercise Pragati 2026: क्या है एक्सरसाइज प्रगति

प्रगति’ का पूरा नाम “पार्टनरशिप ऑफ रीजनल आर्मीज फॉर ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन द इंडियन ओशन रीजन” है। यह भारत की पहली ऐसी मल्टीनेशनल सैन्य एक्सरसाइज है, जिसमें कई देशों की सेनाएं एक साथ ट्रेनिंग ले रही हैं।

इस अभ्यास का मुख्य फोकस काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन है। सैनिकों को पहाड़ी और जंगल वाले इलाकों में आतंकवाद विरोधी कार्रवाई की ट्रेनिंग दी जा रही है। पूर्वोत्तर भारत का इलाका इसी तरह के कठिन भूभाग के लिए जाना जाता है, इसलिए उमरोई को इसके लिए चुना गया।

भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक अभ्यास का मकसद अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, आधुनिक युद्ध तकनीकों को साझा करना और संयुक्त ऑपरेशन क्षमता मजबूत करना है। (Exercise Pragati 2026)

अलग-अलग देशों के सैनिक एक साथ कर रहे ट्रेनिंग

इस सैन्य अभ्यास की एक खास बात यह है कि इसमें केवल अलग-अलग देशों की यूनिट्स नहीं बल्कि “मिक्स्ड टीम्स” बनाई गई हैं। यानी विभिन्न देशों के सैनिकों को मिलाकर टीम तैयार की गई है ताकि वे एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझ सकें।

अब तक सैनिकों ने जंगल वारफेयर, रॉक क्राफ्ट, एंबुश और काउंटर एंबुश ड्रिल, स्लिथरिंग और बस इंटरवेंशन ऑपरेशन जैसी ट्रेनिंग की है। इसके अलावा स्नाइपर फायरिंग और एके-203 राइफल शूटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।

सैनिकों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए बास्केटबॉल और वॉलीबॉल जैसी स्पोर्ट्स एक्टिविटीज भी कराई गईं। उद्घाटन समारोह में सभी विदेशी दलों का पारंपरिक भारतीय तरीके से स्वागत किया गया।

भारतीय सेना के एडिशनल डायरेक्टर जनरल इन्फैंट्री मेजर जनरल सुनील श्योराण ने उद्घाटन कार्यक्रम में कहा कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेनाओं के बीच “कोहेशन”, “इंटरऑपरेबिलिटी” और “कलेक्टिव एंगेजमेंट” बेहद जरूरी हैं।

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आखिर क्यों नहीं आया बांग्लादेश

बांग्लादेश की गैरमौजूदगी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है क्योंकि भारत और बांग्लादेश के सैन्य रिश्ते पहले काफी मजबूत माने जाते थे। दोनों देशों के बीच ‘सम्प्रिति’ नाम की संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज कई बार हो चुकी है।

उमरोई ट्रेनिंग नोड का बांग्लादेश सीमा से काफी नजदीकी होना इस मुद्दे को और ज्यादा संवेदनशील बना देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ढाका का इस अभ्यास से दूर रहना केवल सैन्य फैसला नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी है।

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव की शुरुआत अगस्त 2024 के बाद मानी जाती है। उसी दौरान बड़े जनआंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और वे भारत आ गईं। तब से दोनों देशों के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी दिखाई नहीं दी। (Exercise Pragati 2026)

चीन दौरे में मोहम्मद यूनुस के बयान से बढ़ा विवाद

तनाव उस समय और बढ़ गया जब मार्च 2025 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस चीन दौरे पर गए। बीजिंग में एक बिजनेस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को “लैंडलॉक्ड” बताया और कहा कि बांग्लादेश इस पूरे क्षेत्र के लिए समुद्र तक पहुंच का “गार्डियन” है।

उन्होंने चीन से कहा कि वह इस स्थिति को आर्थिक अवसर के रूप में देख सकता है। इस बयान को भारत में काफी गंभीरता से लिया गया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब देते हुए कहा था कि भारत अपने पड़ोसी देशों को जोड़ने वाला मुख्य केंद्र है और क्षेत्रीय सहयोग किसी एक देश की पसंद के आधार पर नहीं चल सकता।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस बयान को “आपत्तिजनक” बताया था। (Exercise Pragati 2026)

बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान पहले चीन जाएंगे

वहीं, बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सत्ता संभालने के बाद अपने पहले विदेशी दौरे के लिए चीन को चुना है। जून के आखिर में उनकी बीजिंग यात्रा होने वाली है। इस दौरान वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात करेंगे। बातचीत में इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार और तीस्ता नदी परियोजना जैसे मुद्दे शामिल रहेंगे। बताया जा रहा है कि इस परियोजना के लिए चीन की एक्जिम बैंक फंडिंग भी दे सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत ने भी तारिक रहमान को यात्रा का न्योता दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले बधाई दी थी। इसके बावजूद बांग्लादेश ने चीन को पहली प्राथमिकता दी।

आमतौर पर बांग्लादेश समेत भारत के पड़ोसी देशों के नेता नई सरकार बनने के बाद सबसे पहले भारत आते रहे हैं। इसे भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति का हिस्सा माना जाता है। लेकिन इस बार यह परंपरा टूटती दिखाई दे रही है।

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ढाका का कहना है कि चीन उसका बड़ा विकास साझेदार है और यह दौरा संतुलित विदेश नीति का हिस्सा है। वहीं भारत में इसे चीन की तरफ बढ़ते झुकाव के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी और तीस्ता परियोजना में चीन की भूमिका को लेकर भी नई दिल्ली नजर बनाए हुए है।

भारत ने वापस ली ट्रांसशिपमेंट सुविधा

बांग्लादेश के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत ने 2020 में दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा भी वापस ले ली। इस सुविधा के तहत बांग्लादेश को भारतीय एयरपोर्ट और बंदरगाहों का इस्तेमाल तीसरे देशों में निर्यात के लिए करने की अनुमति मिली थी।

2022 में इस व्यवस्था को और बढ़ाया गया था, लेकिन विवाद के बाद नई दिल्ली ने इसे खत्म कर दिया। इसे भारत की तरफ से मजबूत कूटनीतिक प्रतिक्रिया माना गया। (Exercise Pragati 2026)

पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ती नजदीकी से चिंता

नई दिल्ली में चिंता का एक बड़ा कारण बांग्लादेश का चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ता संपर्क भी माना जा रहा है। हाल के महीनों में ढाका और इस्लामाबाद के बीच रिश्तों में गर्मजोशी दिखाई दी है।

इसके अलावा तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन की भूमिका पर भी भारत की नजर है। इस परियोजना में चीनी कंपनियों और विशेषज्ञों की भागीदारी की चर्चा हुई थी। भारतीय रणनीतिक हलकों में आशंका जताई गई कि इससे सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास चीनी मौजूदगी बढ़ सकती है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर को “चिकन नेक” भी कहा जाता है। यह बेहद संवेदनशील इलाका है जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है।

भारत ने पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी पर बढ़ाया फोकस

बांग्लादेश पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार तेज कर दी है। सरकार ने करीब 22,864 करोड़ रुपये की लागत वाली शिलांग-सिलचर फोर लेन हाईवे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया है।

यह हाईवे म्यांमार के जरिए बनने वाले कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट से जुड़ने वाला है। इसका मकसद पूर्वोत्तर राज्यों को ऐसा वैकल्पिक समुद्री और जमीनी रास्ता देना है, जिसमें बांग्लादेश पर निर्भरता कम हो। (Exercise Pragati 2026)

कूटनीतिक स्तर पर भी बदलाव

भारत ने अप्रैल 2026 में बांग्लादेश में नए हाई कमिश्नर की नियुक्ति भी की। इस बार करियर डिप्लोमैट की जगह वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को ढाका भेजने का फैसला किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के रिश्तों को राजनीतिक स्तर पर संभालने की कोशिश के तौर पर देखा गया।

क्रिकेट से लेकर सैन्य मंच तक दिख रही दूरी

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में दूरी केवल सैन्य मामलों तक सीमित नहीं रही। जनवरी 2026 में बांग्लादेश ने भारत में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप मुकाबलों में खेलने से इनकार कर दिया था। उसने सुरक्षा और राजनीतिक तनाव का हवाला देते हुए मैच श्रीलंका में कराने की मांग की थी। हालांकि आईसीसी ने यह मांग स्वीकार नहीं की।

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अब एक्सरसाइज प्रगति से दूरी को उसी बड़े पैटर्न का हिस्सा माना जा रहा है। (Exercise Pragati 2026)

सेना के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रदर्शन भी

प्रगति एक्सरसाइज के साथ-साथ एक बड़ा डिफेंस इंडस्ट्री एक्सपो भी आयोजित किया गया है। फिक्की ने ईस्टर्न कमांड और आर्मी डिजाइन ब्यूरो के साथ मिलकर 30 और 31 मई को यह कार्यक्रम आयोजित किया।

इस दौरान आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित भारतीय सैन्य उपकरण, ड्रोन, कम्युनिकेशन सिस्टम और अन्य डिफेंस टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया गया।

भारतीय सेना के अधिकारी और विदेशी सैन्य प्रतिनिधि इन स्वदेशी प्रणालियों को करीब से देख रहे हैं। एक्सपो का मकसद केवल तकनीक दिखाना नहीं बल्कि रक्षा सहयोग और इंडस्ट्री नेटवर्किंग को मजबूत करना भी बताया गया। (Exercise Pragati 2026)

अभ्यास के अंतिम चरण में पहुंची एक्सरसाइज

सूत्रों के मुताबिक प्रगति एक्सरसाइज अब अपने इंटेंसिव ऑपरेशनल फेज में पहुंच चुकी है। अंतिम दिनों में हाई इंटेंसिटी वैलिडेशन मिशन कराया जाएगा, जिसमें अलग-अलग देशों की मिश्रित टीमें मिलकर ऑपरेशन करेंगी।

इस दौरान सैनिकों की संयुक्त रणनीति, कम्युनिकेशन, फायरिंग और रेस्क्यू क्षमताओं का परीक्षण होगा। भारतीय सेना का मानना है कि इस तरह के अभ्यास आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों से निपटने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। (Exercise Pragati 2026)

Bangladesh has skipped India’s first multinational military exercise, Exercise Pragati 2026, currently underway in Meghalaya’s Umroi Field Training Node. The counter-terrorism exercise includes over 400 troops from 13 countries across South Asia, Southeast Asia, and the Indian Ocean region. Dhaka’s absence has drawn attention amid growing strategic tensions between India and Bangladesh since 2024. The exercise focuses on jungle warfare, joint tactical drills, sniper firing, and coordinated operations in semi-mountainous terrain. Analysts view Bangladesh’s decision as a diplomatic signal, especially as Dhaka deepens ties with China and Pakistan while India strengthens regional military cooperation and Northeast connectivity projects.

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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