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खड़कवासला से निकले 353 नए ‘वॉरियर’, NDA के 150वें कोर्स में 21 देशों के विदेशी कैडेट भी शामिल, सेना प्रमुख बोले- बदल चुका है युद्ध का तरीका

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि 42 साल पहले वह भी इसी परेड ग्राउंड पर खड़े थे और तब उनके मन में भी भविष्य को लेकर उत्साह और सवाल थे। उन्होंने कहा कि एनडीए सिर्फ एक ट्रेनिंग संस्थान नहीं है, बल्कि यह जीवनभर के लिए सोच, अनुशासन और नेतृत्व की नींव तैयार करता है...

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📍नई दिल्ली/पुणे | 30 May, 2026, 2:03 PM

NDA Passing Out Parade 2026: पुणे के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में शनिवार को पासिंग आउट परेड का आयोजन हुआ। एनडीए के 150वें कोर्स के 353 कैडेट्स ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर पासिंग आउट की। इनमें भारत के अलावा 21 मित्र देशों के कैडेट भी शामिल रहे। इस बार 18 महिला कैडेट्स ने भी परेड और ट्रेनिंग पूरी कर नई पहचान बनाई।

इस खास मौके पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पासिंग आउट परेड की समीक्षा की और कैडेट्स को संबोधित किया। खास बात यह थी कि करीब 42 साल पहले वह खुद इसी परेड ग्राउंड से कैडेट के तौर पर निकले थे। वहीं, अब वह भारतीय सेना के सर्वोच्च पद पर पहुंचकर उसी अकादमी में मुख्य अतिथि बने।

NDA Passing Out Parade 2026: सेना प्रमुख ने साझा किया अपना अनुभव

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि 42 साल पहले वह भी इसी परेड ग्राउंड पर खड़े थे और तब उनके मन में भी भविष्य को लेकर उत्साह और सवाल थे। उन्होंने कहा कि एनडीए सिर्फ एक ट्रेनिंग संस्थान नहीं है, बल्कि यह जीवनभर के लिए सोच, अनुशासन और नेतृत्व की नींव तैयार करता है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब खतरे हमेशा पारंपरिक युद्ध की तरह सामने नहीं आते। कई बार दुश्मन सीमा के पार नहीं बल्कि साइबर, ड्रोन, इंफॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी के जरिए भी चुनौती देता है। ऐसे माहौल में सैनिकों को केवल हथियार चलाना ही नहीं बल्कि तेजी से सोचने और सही फैसला लेने की क्षमता भी होनी चाहिए।

जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि हालिया ऑपरेशंस ने दिखाया कि भारत किस तरह तेज, सटीक और निर्णायक प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि आज के युवा अधिकारियों को इसी तरह की जिम्मेदारी निभानी होगी।

“सीखना कभी बंद मत करना”

सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में कैडेट्स को लगातार सीखते रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अपने 40 साल से ज्यादा लंबे सैन्य जीवन में उन्होंने देखा कि सबसे अच्छे अधिकारी वही बने जो जीवनभर विद्यार्थी बने रहे।

उन्होंने कहा कि हर नई पोस्टिंग, हर नई जिम्मेदारी और हर ऑपरेशन से कुछ नया सीखने की कोशिश करनी चाहिए। केवल रैंक या मेडल ही अच्छे अधिकारी की पहचान नहीं होते, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहना और सही नेतृत्व देना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

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उन्होंने तीन अहम गुणों पर जोर दिया – एटीट्यूड, एडैप्टेबिलिटी और एबिलिटी। उनके मुताबिक एटीट्यूड यानी सोच सबसे मजबूत आधार होता है। एडैप्टेबिलिटी यानी बदलती परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता और एबिलिटी यानी नेतृत्व व निर्णय लेने की ताकत। (NDA Passing Out Parade 2026)

महिला कैडेट्स को लेकर कही बड़ी बात

इस बार की पासिंग आउट परेड में 18 महिला कैडेट्स भी शामिल रहीं। सेना प्रमुख ने कहा कि महिला कैडेट्स ने हर ट्रेनिंग, हर ड्रिल और हर चुनौती में खुद को साबित किया। उन्होंने कहा कि परेड ग्राउंड पर उन्हें अलग पहचानना मुश्किल था क्योंकि उन्होंने सभी मानकों को बराबरी से पूरा किया।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि युद्धक्षेत्र में साहस, नेतृत्व और संकल्प का कोई जेंडर नहीं होता। सेना में जिम्मेदारी निभाने की क्षमता ही सबसे अहम होती है।

महिला कैडेट्स की मौजूदगी इस बार बेहद खास रही। क्योंकि एनडीए में महिलाओं की एंट्री के बाद यह तीसरा बैच है जिसने ट्रेनिंग पूरी की है। (NDA Passing Out Parade 2026)

21 देशों के विदेशी कैडेट भी हुए पास आउट

इस बार 21 मित्र देशों के कैडेट्स ने भी एनडीए से ट्रेनिंग पूरी की। इनमें 12 देशों के 24 फ्रेंडली फॉरेन कैडेट्स शामिल रहे। सेना प्रमुख ने अपने भाषण में इन विदेशी कैडेट्स का खास तौर पर स्वागत और सम्मान किया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों से आए ये युवा अधिकारी अपने साथ दोस्ती, भरोसा और सैन्य सहयोग की भावना लेकर जाएंगे। भारत लंबे समय से कई मित्र देशों के सैन्य अधिकारियों को ट्रेनिंग देता रहा है और एनडीए इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (NDA Passing Out Parade 2026)

परिवारों का भी किया जिक्र

पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट्स के परिवार भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कई माता-पिता अपने बच्चों को सैन्य वर्दी में देखकर भावुक नजर आए।

सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में परिवारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कैडेट्स की सफलता के पीछे उनके परिवारों का त्याग और भरोसा भी शामिल है। कठिन ट्रेनिंग और लंबे समय तक परिवार से दूर रहने के दौरान परिवारों का समर्थन बेहद अहम होता है।

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उन्होंने प्रशिक्षकों और स्टाफ की भी सराहना की जिन्होंने इन युवा कैडेट्स को सैन्य जीवन के लिए तैयार किया।

“सेवा परमो धर्म” का संदेश

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एनडीए के मूल मंत्र “सेवा परमो धर्म” का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सैन्य जीवन में कई बार आराम और कर्तव्य के बीच चुनाव करना पड़ता है, लेकिन एक सैनिक का सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र सेवा होता है।

उन्होंने कैडेट्स से कहा कि नेतृत्व कभी शब्दों से साबित नहीं होता, बल्कि सैनिकों का भरोसा ही किसी अधिकारी की असली पहचान बनता है। (NDA Passing Out Parade 2026)

किरण बेदी ने कैडेट्स को बताया “स्कॉलर वॉरियर”

इस समारोह में पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी भी मौजूद रहीं। उन्होंने कैडेट्स को संबोधित करते हुए उन्हें “स्कॉलर वॉरियर” बनने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में केवल शारीरिक ताकत काफी नहीं है। आधुनिक सैन्य अधिकारी को टेक्नोलॉजी, रणनीति, साइबर सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय मामलों और नेतृत्व की भी गहरी समझ होनी चाहिए।

किरण बेदी ने कहा कि अनुशासन, ज्ञान और ईमानदारी किसी भी सैन्य अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत होती है।

236 कैडेट्स को मिली डिग्री

समारोह के दौरान जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी ने 236 कैडेट्स को बैचलर डिग्री भी प्रदान की। इनमें कंप्यूटर साइंस, साइंस और आर्ट्स स्ट्रीम के कैडेट्स शामिल रहे।

आंकड़ों के मुताबिक 112 कैडेट्स ने कंप्यूटर साइंस, 65 ने साइंस और 59 ने आर्ट्स स्ट्रीम में डिग्री हासिल की।

एनडीए में सैन्य ट्रेनिंग के साथ-साथ अकादमिक पढ़ाई पर भी बराबर जोर दिया जाता है। कैडेट्स तीन साल तक कठोर शारीरिक ट्रेनिंग के साथ नियमित शैक्षणिक पढ़ाई भी करते हैं। (NDA Passing Out Parade 2026)

इन कैडेट्स ने हासिल किए बड़े सम्मान

इस समारोह में कई कैडेट्स को उनकी शानदार अकादमिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित भी किया गया। ‘जे’ स्क्वाड्रन के कैडेट रणविजय त्यागी ने कंप्यूटर साइंस स्ट्रीम में सबसे ज्यादा ग्रेड हासिल किए। उन्हें कमांडेंट सिल्वर मेडल और एडमिरल रोलिंग ट्रॉफी दी गई।

‘एम’ स्क्वाड्रन के कैडेट पीयूष रौतेला ने साइंस स्ट्रीम में टॉप किया। उन्हें कमांडेंट सिल्वर मेडल और सीओएएस रोलिंग ट्रॉफी मिली।

‘पी’ स्क्वाड्रन के कैडेट सुशांत वर्मा ने सोशल साइंस स्ट्रीम में पहला स्थान हासिल किया। उन्हें कमांडेंट सिल्वर मेडल और सीएएस ट्रॉफी प्रदान की गई।

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वहीं बीटेक स्ट्रीम में ‘जी’ स्क्वाड्रन के कैडेट मन्नेला नितिन ने छह सेमेस्टर में सबसे ज्यादा सीजीपीए हासिल किया। उन्हें कमांडेंट सिल्वर मेडल और सीआईएससी ट्रॉफी दी गई। (NDA Passing Out Parade 2026)

क्यों खास है एनडीए

1954 में स्थापित एनडीए एशिया की सबसे पुरानी ट्राई-सर्विस सैन्य अकादमियों में गिनी जाती है। यहां सेना, नौसेना और वायुसेना के कैडेट्स एक साथ ट्रेनिंग लेते हैं।

तीन साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद कैडेट्स अलग-अलग सैन्य अकादमियों में आगे की ट्रेनिंग के लिए जाते हैं। सेना के कैडेट्स इंडियन मिलिट्री अकादमी, नौसेना के कैडेट्स नेवल अकादमी और वायुसेना के कैडेट्स एयर फोर्स अकादमी में आगे की ट्रेनिंग लेते हैं।

एनडीए का 150वां कोर्स इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह अकादमी के लंबे सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां से निकले कई अधिकारी बाद में सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुख बने। (NDA Passing Out Parade 2026)

The National Defence Academy’s 150th course marked a major milestone as 353 cadets, including trainees from 21 friendly foreign nations, graduated from NDA Khadakwasla. The passing out ceremony also included 18 female cadets, reflecting the changing face of India’s armed forces. Chief of the Army Staff General Upendra Dwivedi reviewed the parade and delivered an emotional address, urging cadets to lead with courage, adaptability, and integrity. He highlighted the importance of jointness among the three services and referred to Operation Sindoor as an example of modern military preparedness. The ceremony was attended by senior military leaders and dignitaries.

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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