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4×4 ट्रक पर 155 मिमी तोप! भारत की MArG गन ने यूरोप में मचाई सनसनी, जानिए क्यों खास है यह स्वदेशी आर्टिलरी सिस्टम

यूरोसैटरी को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित रक्षा और सुरक्षा प्रदर्शनियों में गिना जाता है। यहां दुनिया भर की कंपनियां अपनी नवीनतम सैन्य तकनीक और हथियार प्रणालियां प्रदर्शित करती हैं...

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📍नई दिल्ली/पेरिस | 15 Jun, 2026, 11:10 PM

MArG 155mm Artillery Gun: फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा प्रदर्शनी यूरोसैटरी 2026 में भारत की डिफेंस कंपनी कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (केएसएसएल) ने अपनी नई पीढ़ी की एमएआरजी (माउंटेड आर्टिलरी गन) सीरीज को दुनिया के सामने रखा है। यह 155 मिमी कैलिबर की आधुनिक तोप है, जिसे 4×4 हाई मोबिलिटी वाहन पर लगाया गया है।

यह सिस्टम पारंपरिक भारी आर्टिलरी और तेज रफ्तार वाले मोबाइल प्लेटफॉर्म के बीच एक नया संतुलन बनाता है। खास बात यह है कि जिस तरह की मारक क्षमता आमतौर पर 6×6 या 8×8 बड़े मिलिट्री व्हीकल्स पर देखने को मिलती है, उसे केएसएसएल ने एक अपेक्षाकृत छोटे 4×4 प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का दावा किया है।

MArG 155mm Artillery Gun: यूरोसैटरी 2026 में भारत की मजबूत मौजूदगी

यूरोसैटरी को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित रक्षा और सुरक्षा प्रदर्शनियों में गिना जाता है। यहां दुनिया भर की कंपनियां अपनी नवीनतम सैन्य तकनीक और हथियार प्रणालियां प्रदर्शित करती हैं।

इस बार भारतीय रक्षा उद्योग की ओर से सबसे अधिक चर्चा एमएआरजी सीरीज की हो रही है। केएसएसएल ने एमएआरजी-39, एमएआरजी-45 और एमएआरजी-52 नाम से तीन अलग-अलग वेरिएंट पेश किए हैं। तीनों में एक ही प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया है लेकिन उनकी मारक दूरी और कैलिबर कॉन्फिगरेशन अलग-अलग हैं।

कंपनी का कहना है कि इससे किसी भी देश की सेना अपनी जरूरत, भौगोलिक परिस्थितियों और ऑपरेशनल प्रोफाइल के अनुसार उपयुक्त मॉडल चुन सकती है।

आखिर क्या है एमएआरजी सीरीज?

एमएआरजी का पूरा नाम माउंटेड आर्टिलरी गन है। यह ट्रक आधारित आधुनिक तोप प्रणाली है, जिसे तेजी से तैनात करने और तेजी से स्थान बदलने के लिए डिजाइन किया गया है।

आधुनिक युद्ध में भारी तोपों की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि दुश्मन उनके स्थान का पता लगाकर जवाबी हमला कर सकता है। इसलिए आज दुनिया की सेनाएं ऐसी आर्टिलरी चाहती हैं जो गोली चलाने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सके।

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एमएआरजी सीरीज को इसी सोच के साथ विकसित किया गया है। यह “शूट एंड स्कूट” क्षमता से लैस है। यानी लक्ष्य पर गोले दागने के बाद यह कुछ ही मिनटों में नई जगह पहुंच सकती है। (MArG 155mm Artillery Gun)

एमएआरजी-39 क्यों बना आकर्षण का केंद्र?

यूरोसैटरी 2026 में एमएआरजी-39 को प्रदर्शित किया गया है। यह 155 मिमी और 39 कैलिबर की तोप है, जिसे एक 4×4 हाई मोबिलिटी व्हीकल पर लगाया गया है।

इसका कुल वजन लगभग 22 टन है। कंपनी के अनुसार यह पहाड़, रेगिस्तान, सीमावर्ती क्षेत्र और कमजोर सड़क नेटवर्क वाले इलाकों में भी आसानी से ऑपरेट कर सकती है।

एमएआरजी-39 में 18 गोले साथ लेकर चलने की क्षमता है। यह दिन में लगभग डेढ़ मिनट और रात में दो मिनट के भीतर फायरिंग के लिए तैयार हो सकती है।

इसकी फायरिंग दर भी काफी प्रभावशाली बताई गई है। यह तीन मिनट में 10 राउंड दाग सकती है जबकि लगातार फायरिंग के दौरान एक घंटे में 42 राउंड तक फायर कर सकती है। (MArG 155mm Artillery Gun)

पहाड़ों और सीमावर्ती इलाकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

भारत जैसे देश के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में भारी तोपों को पहुंचाना हमेशा चुनौती रहा है। लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे इलाकों में सड़कें सीमित हैं और कई जगह बड़े सैन्य वाहनों की आवाजाही आसान नहीं होती।

एमएआरजी सीरीज का सबसे बड़ा फायदा इसकी मोबिलिटी है। कंपनी का दावा है कि यह 25 डिग्री तक की चढ़ाई पर भी आसानी से चल सकती है।

इसी कारण इसे ऐसे इलाकों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जहां भारी 8×8 प्लेटफॉर्म पहुंचने में कठिनाई महसूस करते हैं।

दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचने की क्षमता

आधुनिक युद्ध में आर्टिलरी की सबसे बड़ी परीक्षा दुश्मन के काउंटर बैटरी फायर से बचना होती है। जब कोई तोप फायर करती है तो उसकी स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

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एमएआरजी सीरीज को इस खतरे को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। फायरिंग के बाद यह बहुत कम समय में अपनी स्थिति बदल सकती है। इससे दुश्मन की जवाबी गोलाबारी से बचने की संभावना बढ़ जाती है।

केएसएसएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीलेश तुंगार ने कहा कि एमएआरजी सीरीज ऐसे क्षेत्रों तक पहुंच सकती है जहां भारी सिस्टम आसानी से नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा कि इसकी गतिशीलता इसे युद्धक्षेत्र में बड़ा लाभ देती है। (MArG 155mm Artillery Gun)

आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस

एमएआरजी सीरीज में आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है। यह डिजिटल नेटवर्क बेस्ड कॉम्बैट सिस्टम के साथ काम कर सकता है।

इसकी मदद से टारगेट की पहचान, फायर मिशन की योजना और सटीक गोलाबारी को बेहतर बनाया जा सकता है। यह आधुनिक नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर के अनुरूप विकसित किया गया है।

कंपनी के अनुसार यह प्रणाली प्रिसीजन गाइडेड म्यूनिशन के उपयोग के लिए भी उपयुक्त है। साथ ही यह नाटो मानक 155 मिमी गोला-बारूद फायर कर सकती है। (MArG 155mm Artillery Gun)

एक प्लेटफॉर्म, तीन विकल्प

एमएआरजी सीरीज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि तीनों वेरिएंट एक ही मूल प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं।

एमएआरजी-39 को तेज तैनाती और बेहतर मोबिलिटी के लिए डेवलप किया गया है। एमएआरजी-45 रेंज और मारक क्षमता के बीच संतुलन प्रदान करता है। वहीं एमएआरजी-52 को लंबी दूरी की गोलाबारी के लिए डिजाइन किया गया है।

इससे किसी सेना को अलग-अलग प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सिस्टम विकसित करने की जरूरत कम पड़ती है।

भारत फोर्ज के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि कंपनी ने अपनी छह दशक की इंजीनियरिंग और धातु विज्ञान विशेषज्ञता को इस प्लेटफॉर्म में शामिल किया है।

उनके अनुसार एमएआरजी सीरीज आधुनिक सेनाओं को ऐसी क्षमता प्रदान करती है जिसमें फायरपावर और गतिशीलता के बीच कोई समझौता नहीं करना पड़ता।

उन्होंने कहा कि यह केवल एक हथियार प्रणाली नहीं बल्कि ऐसी तकनीक है जिसे साझेदार देशों में स्थानीय उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण के साथ विकसित किया जा सकता है।

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दुनिया में क्यों बढ़ रही है मोबाइल आर्टिलरी की मांग?

पिछले कुछ सालों में दुनिया भर की सेनाएं भारी ट्रैक्ड तोपों की बजाय व्हील बेस्ड मोबाइल आर्टिलरी की ओर तेजी से बढ़ी हैं।

फ्रांस की सीजर गन, स्वीडन की आर्चर प्रणाली और कई अन्य आधुनिक तोपें इसी कॉन्सैप्ट पर बनी हैं। इनका उद्देश्य कम समय में तैनाती, कम रखरखाव और अधिक गतिशीलता उपलब्ध कराना है।

एमएआरजी सीरीज इसी वैश्विक प्रवृत्ति का भारतीय उत्तर मानी जा रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें 155 मिमी की भारी मारक क्षमता को 4×4 प्लेटफॉर्म पर समाहित किया गया है। (MArG 155mm Artillery Gun)

आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

एमएआरजी सीरीज को भारत की रक्षा निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इसमें स्थानीय उद्योग, स्वदेशी इंजीनियरिंग और घरेलू उत्पादन पर विशेष जोर दिया गया है।

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि ऐसे प्लेटफॉर्म न केवल सेना की जरूरतें पूरी करते हैं बल्कि भारत के रक्षा निर्यात को भी मजबूत बनाते हैं।

कंपनी का कहना है कि यह प्रणाली स्थानीय औद्योगिकीकरण, तकनीक हस्तांतरण और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से विकसित की गई है। (MArG 155mm Artillery Gun)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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