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सैनिक स्कूलों को लेकर संसदीय समिति ने कही ये बड़ी बात, बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर जताई नाराजगी!

देश में इस समय कुल 33 सैनिक स्कूल हैं, जो 1961 से केंद्र और राज्य सरकारों के मिल कर चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल और देहरादून स्थित राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज भी रक्षा मंत्रालय के तहत काम करते हैं...

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📍नई दिल्ली | 25 Mar, 2026, 12:38 PM

Sainik Schools: देश के सैनिक स्कूलों को लेकर संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने बड़ी सिफारिश की है। हाल ही में जारी संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक अब इन स्कूलों का फोकस केवल आर्म्ड फोर्सेज में भर्ती तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समिति का कहना है कि छात्रों को रक्षा से जुड़े अन्य क्षेत्रों जैसे डिफेंस रिसर्च, इनोवेशन, डिजाइन और मेडिसिन में भी करियर बनाने के लिए तैयार किया जाए।

यह सिफारिश समिति की हालिया रिपोर्ट में दी गई है, जिसमें कहा गया है कि समय के साथ युद्ध और सुरक्षा का स्वरूप बदल गया है। ऐसे में छात्रों को भी नई तकनीक और आधुनिक क्षेत्रों के लिए तैयार करना जरूरी है। (Sainik Schools)

Sainik Schools: अब केवल सेना तक सीमित नहीं रहेगा करियर

अभी तक सैनिक स्कूलों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और नौसेना अकादमी के लिए तैयार करना रहा है। यहां पढ़ने वाले अधिकतर छात्र सेना, नौसेना या वायुसेना में जाने का सपना देखते हैं।

लेकिन समिति ने कहा है कि अब छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार अन्य विकल्प भी दिए जाने चाहिए। इसमें डिफेंस टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, रिसर्च, मेडिकल और डिजाइन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे छात्रों के सामने करियर के ज्यादा रास्ते खुलेंगे। (Sainik Schools)

देश में कितने हैं सैनिक स्कूल

देश में इस समय कुल 33 सैनिक स्कूल हैं, जो 1961 से केंद्र और राज्य सरकारों के मिल कर चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल और देहरादून स्थित राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज भी रक्षा मंत्रालय के तहत काम करते हैं।

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आरआईएमसी की स्थापना 1922 में हुई थी और राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल 1925 से शुरू हुए। ये दोनों पूरी तरह केंद्र सरकार के अधीन हैं। वहीं सैनिक स्कूल केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से चलते हैं।

इन संस्थानों का उद्देश्य शुरू से ही सेना के लिए अधिकारियों को तैयार करना और देश के अलग-अलग हिस्सों से युवाओं को समान अवसर देना रहा है। (Sainik Schools)

नए विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश

रिपोर्ट में कहा गया है कि सैनिक स्कूल, राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल और राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज के छात्रों को रक्षा से जुड़े दूसरे क्षेत्रों जैसे रिसर्च, इनोवेशन, डिजाइन और मेडिकल फील्ड में भी जाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इससे छात्रों को ज्यादा अवसर मिलेंगे और वे अलग-अलग क्षेत्रों में देश की सेवा कर सकेंगे।

समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सैनिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में आधुनिक तकनीक से जुड़े विषय शामिल किए जाएं। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वारफेयर, स्पेस वारफेयर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डायरेक्टेड एनर्जी जैसे विषय शामिल हैं।

इन विषयों के जरिए छात्रों को नई तरह के युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों के बारे में जानकारी मिलेगी। साथ ही वे आधुनिक तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे। (Sainik Schools)

मल्टी-डायरेक्शनल शिक्षा पर जोर

रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय को इन स्कूलों के जरिए छात्रों में शुरुआती स्तर से ही जागरूकता बढ़ानी चाहिए। इसके लिए एक मल्टी-प्रॉन्ग्ड अप्रोच अपनाने की बात कही गई है, जिसमें छात्रों को अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में जानकारी दी जाए और उनकी पसंद के मुताबिक मार्गदर्शन किया जाए।

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इसका उद्देश्य छात्रों का समग्र विकास करना है, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें और देश के भविष्य में योगदान दे सकें। (Sainik Schools)

नए सैनिक स्कूल खोलने की योजना

सरकार पहले ही देश में 100 नए सैनिक स्कूल खोलने की योजना शुरू कर चुकी है। ये स्कूल एनजीओ, प्राइवेट संस्थानों और राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में खोले जा रहे हैं। अब तक 86 नए स्कूलों को मंजूरी मिल चुकी है।

इन नए स्कूलों के जरिए ज्यादा से ज्यादा छात्रों को सैनिक शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। (Sainik Schools)

फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या

समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि कई सैनिक स्कूलों को बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर राज्य सरकारों से मिलने वाली आर्थिक मदद काफी नहीं है।

इस वजह से स्कूलों के रखरखाव, स्टाफ सुविधाओं और अन्य जरूरी कामों में दिक्कत आती है। समिति ने सुझाव दिया है कि इन स्कूलों को पर्याप्त फंड दिया जाए ताकि उनकी जरूरतें पूरी हो सकें। (Sainik Schools)

सरकार को दिए निर्देश

समिति ने रक्षा मंत्रालय से कहा है कि वह वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर सैनिक स्कूलों के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करे। इसके साथ ही पुराने 33 सैनिक स्कूलों के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान देने को कहा गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नए स्कूलों को फीस सपोर्ट, ट्रेनिंग ग्रांट और अन्य सुविधाएं समय पर दी जानी चाहिए, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे। (Sainik Schools)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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