📍नई दिल्ली/रावलाकोट | 22 Jun, 2026, 8:08 PM
PoJK Protests 2026: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके में राजनीतिक अधिकारों, महंगाई, बिजली दरों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन लगातार 14वें दिन भी जारी रहा। रावलाकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग धरने पर डटे हैं, जबकि सुधनोती, तराड़खेल, मंधोल और दूसरे इलाकों में भी विरोध कार्यक्रमों की खबरें सामने आई हैं।
आंदोलन के शुरुआती दिनों में इसमें मुख्य रूप से राजनीतिक कार्यकर्ता और स्थानीय संगठनों के लोग शामिल थे। अब महिलाओं और स्कूली बच्चों की भागीदारी ने इसे अलग रूप दे दिया है। प्रदर्शन स्थलों पर “पाकिस्तानी फोर्सेज आउट”, “हमें बुनियादी अधिकार चाहिए”, “इंटरनेट बहाल करो” और “मुफ्त शिक्षा चाहिए” जैसे नारे लगाए जा रहे हैं।
ज्वाइंट अवामी एक्शन कमिटी (जेएएसी0 इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। संगठन ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सरकार के सामने 38 मांगों का चार्टर रखा है और 23 जून तक कार्रवाई की मांग की है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि मांगों पर ठोस जवाब नहीं मिला तो रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक बड़ा मार्च निकाला जाएगा।
PoJK Protests 2026: ईदगाह मैदान में बच्चों के हाथों में तख्तियां
रावलाकोट के ईदगाह मैदान में पिछले कई दिनों से धरना चल रहा है। आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि पीओजेके के अलग-अलग जिलों से 70 हजार से अधिक लोग धरने में शामिल हुए हैं। क्षेत्र में इंटरनेट और संचार सेवाएं प्रभावित होने से सूचना का प्रवाह सीमित है।
🚨 Children join PoJK protests
One of the most striking developments in the ongoing agitation in Pakistan-occupied Jammu & Kashmir is the visible participation of schoolchildren.
Reports from Tarar Khel and Rawalakot show children raising slogans and carrying placards over issues… pic.twitter.com/7wE0IBBcmQ— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) June 22, 2026
धरना स्थल पर स्कूली बच्चों के हाथों में ऐसी तख्तियां थीं, जिन पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की वापसी, शिक्षा, भोजन, इंटरनेट और बुनियादी अधिकारों से जुड़े संदेश लिखे थे। कुछ तख्तियों पर संयुक्त राष्ट्र से पीओजेके की स्थिति पर ध्यान देने की अपील भी की गई।
सुधनोती जिले के तराड़खेल में 10 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों के सार्वजनिक स्थान पर जुटकर नारे लगाए। मंधोल इलाके में महिलाओं ने मार्च निकालकर राजनीतिक अधिकारों, महंगाई और जरूरी सेवाओं की उपलब्धता का मुद्दा उठाया। महिलाओं का कहना था कि इंटरनेट बंद होने, बाजार प्रभावित होने और खाद्य आपूर्ति में बाधा आने से परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ रहा है।
12 आरक्षित सीटों से शुरू हुआ राजनीतिक विवाद
वर्तमान आंदोलन का प्रमुख राजनीतिक कारण पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद है। विधानसभा में कुल 45 सीटें हैं। इनमें 12 सीटें उन लोगों के प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित हैं, जो 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर से विस्थापित होकर पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में जाकर बस गए।
जेएएसी का तर्क है कि पीओजेके विधानसभा में प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से उन लोगों का होना चाहिए जो वास्तव में इसी क्षेत्र में रहते हैं और यहां के स्थानीय मतदाता हैं। संगठन इन 12 सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान के दूसरे शहरों में रहने वाले प्रतिनिधियों की विधानसभा में मौजूदगी स्थानीय लोगों के राजनीतिक प्रभाव को कम करती है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सुप्रीम कोर्ट ने इन सीटों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त होने की बात कही है। अदालत के अनुसार, इन्हें हटाने के लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत होगी। सरकार का पक्ष है कि यह व्यवस्था कश्मीर विवाद से जुड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक ढांचे का हिस्सा है तथा विस्थापित लोगों को प्रतिनिधित्व देना आवश्यक है।
इस फैसले के बाद जेएएसी और उसके समर्थकों का विरोध तेज हुआ। जुलाई में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के कारण भी यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया है।
38 मांगों में बिजली, गेहूं, रोजगार और जवाबदेही के मुद्दे
जेएएसी की मांगें केवल आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं हैं। संगठन ने बिजली की दरों, गेहूं और खाद्य सामग्री पर सब्सिडी, महंगाई, सरकारी खर्च, भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पीओजेके में जलविद्युत संसाधन होने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली महंगी मिलती है। प्रदर्शनकारी बिजली की कीमत उत्पादन लागत के अनुरूप रखने की मांग कर रहे हैं। गेहूं और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतें भी आंदोलन का बड़ा कारण बनी हैं।
जेएएसी ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को मिलने वाली सुविधाओं तथा सरकारी खर्चों में कटौती की मांग भी रखी है। संगठन का कहना है कि आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है, जबकि प्रशासनिक ढांचे पर खर्च कम नहीं हो रहा।
सरकार का दावा है कि 38 में से कई मांगों पर काम किया जा चुका है या कार्रवाई चल रही है। हालांकि आंदोलनकारी कहते हैं कि कुछ घोषणाओं के बावजूद जमीन पर पूरी तरह लागू होने वाली राहत नहीं मिली है। इसी अंतर को लेकर दोनों पक्षों में टकराव बना हुआ है।

रावलाकोट में झड़पों के बाद बढ़ी सुरक्षा
जून के पहले सप्ताह में रावलाकोट और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की खबरें आईं। इसके बाद कई जगह पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई। सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए और कुछ मार्गों पर लोगों की आवाजाही सीमित की गई।
🚨 June 23 deadline raises stakes in PoJK
The Awami Action Committee has reportedly given the Pakistan authorities until June 23 to respond to its 38-point charter of demands.
Organisers have warned of a large march from Rawalakot to Muzaffarabad if the demands are not addressed.… pic.twitter.com/Q7neAbJQq7— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) June 22, 2026
रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं की रिपोर्टों में हिंसा और मौतों का उल्लेख किया गया है। मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग आंकड़े दिए गए हैं। रॉयटर्स की 19 जून की रिपोर्ट में कम से कम 24 लोगों की मौत का जिक्र किया गया, जिनमें नागरिकों के साथ चार पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए।
आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने झड़पों में 58 लोगों के मारे जाने का दावा किया है। इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रदर्शनकारी मौतों की जवाबदेही तय करने और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई। अधिकारियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों पर हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षा बलों पर हमले के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, जेएएसी और प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया।
संगठन पर लगाया प्रतिबंध
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सरकार ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमिटी पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बाद संगठन से जुड़े कई नेताओं और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें आईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नेताओं पर राजद्रोह से जुड़े मामले दर्ज किए गए और उनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। संस्था ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, संगठन पर प्रतिबंध और संचार सेवाओं में रोक की स्वतंत्र जांच की मांग की है। एमनेस्टी ने शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करने की बात कही है।
रावलाकोट के ईदगाह मैदान में जेएएसी के आयोजक सरदार अमन खान ने हजारों लोगों को संबोधित किया। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से आंदोलनकारियों की मांगों पर कार्रवाई करने को कहा। खान ने आरोप लगाया कि पीओजेके के लोगों को लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों से वंचित रखा गया है।
उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर बंगालियों, बलूचों और पश्तूनों के खिलाफ दमन करने का आरोप लगाया। खान ने कहा कि पीओजेके के लोग भी अपने अधिकारों को लेकर चुप नहीं रहेंगे। उनके भाषण के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आजादी और अधिकारों से जुड़े नारे लगाए।
इंटरनेट बंद होने से बैंकिंग, पढ़ाई और कारोबार प्रभावित
पीओजेके के कई इलाकों में 5 जून से इंटरनेट सेवाएं प्रभावित या बंद रहने की खबरें हैं। संचार सेवाएं बंद होने से आम लोगों को बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन पढ़ाई और जरूरी संपर्क में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट और सैटेलाइट संचार सेवाएं प्रभावित होने से एटीएम, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान पर असर पड़ा। बाजारों में कई दुकानें बंद रहीं और कुछ जगहों पर सार्वजनिक परिवहन भी सामान्य तरीके से नहीं चल पाया।
छोटे दुकानदारों, दिहाड़ी मजदूरों और परिवहन से जुड़े लोगों की कमाई प्रभावित हुई। छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई और परीक्षा संबंधी जानकारी लेने में दिक्कत हुई। मरीजों और उनके परिवारों को भी संचार व्यवस्था बाधित होने से परेशानी हुई।
14 जून से पीओजेके में प्रवेश करने वाले कुछ मार्गों पर खाद्य सामग्री ले जाने वाले ट्रकों को रोके जाने की खबरें भी आईं। स्थानीय लोगों ने राशन, दवाइयों और रोजमर्रा की वस्तुओं की उपलब्धता पर असर पड़ने की बात कही है। प्रदर्शनकारी इंटरनेट बहाली, खाद्य आपूर्ति सामान्य करने और जरूरी सेवाएं बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
23 जून की डेडलाइन
जेएएसी ने पाकिस्तान सरकार को 23 जून तक का समय दिया है। संगठन का कहना है कि यदि 38 मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक बड़ा मार्च निकाला जाएगा। मुजफ्फराबाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की प्रशासनिक राजधानी है।
सरदार अमन खान ने कहा कि आंदोलनकारी मुजफ्फराबाद में राजनीतिक संस्थाओं पर जनता की भागीदारी और जवाबदेही की मांग को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश के जन आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठित जनता अपनी मांगों को लेकर सरकारों पर दबाव बना सकती है।
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने बातचीत की इच्छा जताई है। सरकार का कहना है कि कुछ मुद्दे संवैधानिक और न्यायिक सीमाओं से जुड़े हैं, इसलिए उन पर तुरंत फैसला संभव नहीं है। जेएएसी का कहना है कि बातचीत तभी उपयोगी होगी जब राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक राहत और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई दिखाई दे।


