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भारत के अपाचे हेलीकॉप्टरों को मिलेगा लॉन्ग-टर्म टेक्निकल सपोर्ट, एम777 तोपों के लिए भी बड़ा पैकेज

अमेरिकी अधिसूचना के अनुसार भारत ने एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर के लिए लॉन्ग-टर्म सस्टेनमेंट सपोर्ट मांगा है। इस सपोर्ट पैकेज की अनुमानित कीमत 230 मिलियन डॉलर (लगभग 2,174 करोड़ रुपये) बताई गई है...

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📍नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 22 Jun, 2026, 1:02 PM

India Apache-M777 Support Package: भारत के एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों और एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों की ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखने के लिए अमेरिका ने सस्टेनमेंट सपोर्ट सर्विसेज की प्रस्तावित बिक्री की औपचारिक अधिसूचना जारी की है। अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (डीएससीए) के अनुसार, इस प्रस्तावित पैकेज की कुल अनुमानित लागत 482.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 4,557 करोड़ रुपये) है।

डीएससीए अमेरिकी सरकार की वह एजेंसी है, जो फॉरेन मिलिट्री सेल्स यानी एफएमएस कार्यक्रम के तहत दूसरे देशों को होने वाली रक्षा बिक्री और सपोर्ट पैकेज की प्रक्रिया संभालती है। एजेंसी ने 17 जून को फेडरल रजिस्टर में भारत से जुड़े इस प्रस्ताव की अधिसूचना जारी की। इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने 18 मई को इस संभावित बिक्री की जानकारी अमेरिकी कांग्रेस को दी थी।

India Apache-M777 Support Package: एम777ए2 तोपों के लिए 230 मिलियन डॉलर का पैकेज

अमेरिकी अधिसूचना के अनुसार भारत ने एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर के लिए लॉन्ग-टर्म सस्टेनमेंट सपोर्ट मांगा है। इस सपोर्ट पैकेज की अनुमानित कीमत 230 मिलियन डॉलर (लगभग 2,174 करोड़ रुपये) बताई गई है।

एम777ए2 एक 155 मिलीमीटर, 39-कैलिबर अल्ट्रा-लाइट टोव्ड हॉवित्जर है। इसका सबसे बड़ा फायदा इसका कम वजन है। पारंपरिक भारी तोपों के मुकाबले इसे हेलीकॉप्टर, सैन्य परिवहन विमान और विशेष वाहनों के जरिए कठिन इलाकों तक पहुंचाना आसान माना जाता है। भारत ने इन्हें मुख्य रूप से पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तोपखाने की क्षमता मजबूत करने के लिए शामिल किया है।

भारत ने अमेरिका से एफएमएस रूट के तहत 145 एम777ए2 हॉवित्जर खरीदी थीं। इनमें कुछ तोपें तैयार हालत में भारत पहुंची थीं, जबकि शेष तोपों की असेंबली भारत में की गई। इन तोपों को भारतीय सेना की अलग-अलग आर्टिलरी रेजिमेंटों में शामिल किया गया है।

डीएससीए के मुताबिक एम777 सपोर्ट पैकेज में एंसिलरी आइटम्स, स्पेयर्स, रिपेयर एंड रिटर्न सुविधा, ट्रेनिंग, टेक्निकल असिस्टेंस, फील्ड सर्विस रिप्रेजेंटेटिव, डिपो कैपेबिलिटी और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट शामिल है।

एंसिलरी आइटम्स का मतलब उन सपोर्ट इक्विपमेंट्स से है जो तोप के ऑपरेशन, मेंटेनेंस और जांच के लिए जरूरी होते हैं। स्पेयर्स में तोप के ऐसे पुर्जे आते हैं जिन्हें समय-समय पर बदलना पड़ता है। इनमें मैकेनिकल पार्ट्स, हाइड्रोलिक सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और फायर कंट्रोल से जुड़े उपकरण शामिल हो सकते हैं।

रिपेयर एंड रिटर्न सिस्टम में खराब पुर्जे या उपकरण को मरम्मत के लिए भेजा जाता है और उसे ठीक करके वापस दिया जाता है। डिपो कैपेबिलिटी का संबंध बड़े स्तर के रखरखाव और ओवरहॉल से होता है। जब कोई उपकरण फील्ड यूनिट स्तर पर ठीक नहीं हो सकता, तब उसे विशेष डिपो या मेंटेनेंस सुविधा में ले जाकर जांचा और दुरुस्त किया जाता है। (India Apache-M777 Support Package)

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पहाड़ों में कारगर है एम777

भारतीय सेना के लिए ऊंचाई वाले इलाकों में तोपखाने की तैनाती हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें सीमित होती हैं। मौसम भी कई महीनों तक सैन्य आवाजाही को प्रभावित कर सकता है। ऐसे इलाकों में भारी तोपों को ले जाना, तैनात करना और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना जटिल काम है।

एम777ए2 का वजन लगभग 4.2 टन है। इसे सीएच-47एफ चिनूक जैसे हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर से उठाकर फॉरवर्ड लोकेशन तक ले जाया जा सकता है। यही क्षमता इसे भारतीय सेना के लिए अलग बनाती है। किसी भी तोप की प्रभावशीलता केवल उसकी फायरिंग रेंज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे जरूरत पड़ने पर कितनी जल्दी तैनात किया जा सकता है।

एम777 में डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगा है। इससे टारगेट की स्थिति, फायरिंग डेटा और बैलिस्टिक कैलकुलेशन को तेजी से प्रोसेस करने में मदद मिलती है। फायर कंट्रोल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स और गन सिस्टम के लगातार रखरखाव के लिए मूल निर्माता और सप्लाई चेन से सपोर्ट जरूरी होता है। अमेरिकी पैकेज इसी जरूरत को ध्यान में रखकर प्रस्तावित किया गया है। (India Apache-M777 Support Package)

अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए 198.2 मिलियन डॉलर की मदद

अमेरिकी रक्षा विभाग ने अलग अधिसूचना में कहा है कि भारत ने एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए सस्टेनमेंट सपोर्ट सर्विसेज मांगी हैं। इस पैकेज की अनुमानित लागत 198.2 मिलियन डॉलर (लगभग 1,873 करोड़ रुपये) है।

अपाचे एक ट्विन-इंजन अटैक हेलीकॉप्टर है, जिसे प्रिसीजन स्ट्राइक, एंटी-टैंक ऑपरेशन, क्लोज एयर सपोर्ट और बैटलफील्ड रिकॉनिसेंस जैसे मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भारत के पास भारतीय वायुसेना के लिए खरीदे गए 22 अपाचे हेलीकॉप्टर हैं। भारतीय सेना के लिए अलग से छह अपाचे हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया गया था।

एएच-64ई अपाचे में आधुनिक सेंसर, टारगेटिंग सिस्टम, हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले, नाइट विजन क्षमता और डिजिटल मिशन सिस्टम लगे होते हैं। हेलीकॉप्टर में 30 मिलीमीटर की चेन गन, रॉकेट और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल जैसे हथियार लगाए जा सकते हैं। इसके मिशन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लगातार अपडेट, टेस्ट और मेंटेन करने की जरूरत होती है।

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अमेरिकी अधिसूचना के अनुसार अपाचे पैकेज में अमेरिकी सरकार और कॉन्ट्रैक्टर की इंजीनियरिंग, टेक्निकल और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सर्विसेज शामिल हैं। इसके साथ टेक्निकल डेटा, पब्लिकेशंस, पर्सनेल ट्रेनिंग और अन्य प्रोग्राम सपोर्ट भी दिया जाएगा।

टेक्निकल डेटा और पब्लिकेशंस में ऑपरेशन मैनुअल, मेंटेनेंस गाइड, पार्ट्स कैटलॉग, सर्विस बुलेटिन और तकनीकी दस्तावेज शामिल होते हैं। इन दस्तावेजों के जरिए तकनीकी कर्मी हेलीकॉप्टर के अलग-अलग सिस्टम की जांच और मरम्मत कर पाते हैं। पर्सनेल ट्रेनिंग में पायलट, ग्राउंड क्रू, एवियोनिक्स टेक्नीशियन और मेंटेनेंस स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाती है। (India Apache-M777 Support Package)

अपाचे के लिए सस्टेनमेंट सपोर्ट का क्या है मतलब

किसी अटैक हेलीकॉप्टर की ताकत केवल उसके हथियारों से तय नहीं होती। उसकी उपलब्धता यानी कितने हेलीकॉप्टर किसी समय उड़ान भरने की स्थिति में हैं, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। इसे सर्विसेबिलिटी और ऑपरेशनल रेडीनेस कहा जाता है।

अपाचे में इंजन, रोटर सिस्टम, ट्रांसमिशन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण, सेंसर, रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम जैसे कई जटिल हिस्से होते हैं। इनमें किसी भी हिस्से में तकनीकी समस्या आने पर हेलीकॉप्टर को उड़ान से पहले जांच की जरूरत होती है। यदि जरूरी स्पेयर समय पर उपलब्ध न हो तो प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ग्राउंडेड रह सकता है।

सस्टेनमेंट सपोर्ट पैकेज के तहत इंजीनियरिंग सहायता, स्पेयर सप्लाई, मरम्मत प्रक्रिया और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जाती है। इससे फील्ड में काम करने वाली यूनिटों को जटिल तकनीकी मामलों में मूल निर्माता और विशेषज्ञ टीमों की मदद मिलती है। (India Apache-M777 Support Package)

बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और बीएई सिस्टम्स की भूमिका

अमेरिकी अधिसूचना में अपाचे सपोर्ट के लिए बोइंग कंपनी और लॉकहीड मार्टिन को प्रमुख कॉन्ट्रैक्टर बताया गया है। बोइंग अपाचे हेलीकॉप्टर का मूल निर्माता है। लॉकहीड मार्टिन अपाचे के कई महत्वपूर्ण सेंसर, टारगेटिंग और हथियार सिस्टम से जुड़ी तकनीकों में भूमिका रखती है।

एम777ए2 हॉवित्जर के सपोर्ट कार्यक्रम के लिए यूनाइटेड किंगडम के कुम्ब्रिया स्थित बीएई सिस्टम्स को प्रमुख कॉन्ट्रैक्टर बताया गया है। बीएई सिस्टम्स एम777 हॉवित्जर कार्यक्रम से जुड़ी प्रमुख कंपनी है। तोप के रखरखाव, स्पेयर्स, टेक्निकल सपोर्ट और डिपो स्तर की क्षमता में कंपनी की भूमिका रहती है। (India Apache-M777 Support Package)

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एफएमएस रूट से क्यों लिया जाता है ऐसा सपोर्ट

एफएमएस यानी फॉरेन मिलिट्री सेल्स अमेरिकी सरकार के माध्यम से होने वाली रक्षा बिक्री व्यवस्था है। इसमें खरीदार देश सीधे अमेरिकी रक्षा उद्योग से सामान्य व्यावसायिक खरीद नहीं करता, बल्कि अमेरिकी सरकार के जरिए अनुबंध होता है। इस प्रक्रिया में उपकरण, स्पेयर्स, ट्रेनिंग और सपोर्ट सेवाओं के लिए सरकारी स्तर पर व्यवस्था की जाती है।

जटिल सैन्य प्लेटफॉर्मों के लिए खरीद के बाद का सपोर्ट उतना ही जरूरी होता है जितना मूल प्लेटफॉर्म की खरीद। तोपों और हेलीकॉप्टरों की उम्र कई दशक होती है। इस दौरान उन्हें नियमित सर्विसिंग, ओवरहॉल, स्पेयर पार्ट्स, टेक्निकल अपग्रेड और प्रशिक्षित मैनपावर की जरूरत पड़ती है।

भारत ने अपाचे और एम777 दोनों प्लेटफॉर्म अमेरिका से एफएमएस रूट के जरिए लिए हैं। इसलिए उनके लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस और सपोर्ट के लिए भी इसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। (India Apache-M777 Support Package)

अमेरिकी अधिसूचना में भारत को लेकर कही ये बात

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि प्रस्तावित बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करती है। अधिसूचना में भारत को एक प्रमुख रक्षा साझेदार बताया गया है और कहा गया है कि इस मदद से भारत की सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी।

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, यह पैकेज भारत की मौजूदा और उभरती सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि भारत इन सेवाओं और उपकरणों को अपने सशस्त्र बलों में शामिल करने में सक्षम है।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि इस प्रस्तावित बिक्री से क्षेत्र के बुनियादी सैन्य संतुलन में कोई बदलाव नहीं होगा और अमेरिका की अपनी रक्षा तैयारियों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। (India Apache-M777 Support Package)

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