HomeDRDOएक 'अग्नि-6' मिसाइल और कई निशाने…MIRV टेस्ट से बढ़ेगी चीन-पाकिस्तान की टेंशन!

एक ‘अग्नि-6’ मिसाइल और कई निशाने…MIRV टेस्ट से बढ़ेगी चीन-पाकिस्तान की टेंशन!

हालांकि डीआरडीओ ने आधिकारिक तौर पर मिसाइल का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन रक्षा सूत्रों ने इसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) श्रेणी का परीक्षण बताया गया...

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📍नई दिल्ली | 9 May, 2026, 5:58 PM

Agni MIRV Missile Test: भारत ने 8 मई 2026 को ओडिशा तट से एडवांस अग्नि मिसाइल का सफल फ्लाइट ट्रायल कर अपनी लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता का बड़ा प्रदर्शन किया। इस परीक्षण की सबसे अहम बात यह रही कि मिसाइल में मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल (MIRV) सिस्टम लगाया गया था। इसका मतलब यह है कि अब एक ही मिसाइल अलग-अलग दिशाओं में मौजूद कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह परीक्षण डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। मिसाइल में कई पेलोड लगाए गए थे, जिन्हें भारतीय महासागर क्षेत्र में फैले अलग-अलग लक्ष्यों की तरफ भेजा गया। ग्राउंड और शिप आधारित ट्रैकिंग सिस्टम ने लॉन्च से लेकर सभी पेलोड के लक्ष्य तक पहुंचने तक पूरी उड़ान को मॉनिटर किया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि परीक्षण के सभी मिशन आब्जेक्टिव्स सफलतापूर्वक हासिल हुए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय सेना और रक्षा उद्योग को इस सफलता पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण देश की रक्षा तैयारियों को नई ताकत देगा।

Agni MIRV Missile Test: क्या है यह नई अग्नि-6 मिसाइल?

हालांकि डीआरडीओ ने आधिकारिक तौर पर मिसाइल का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन रक्षा सूत्रों ने इसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) श्रेणी का परीक्षण बताया गया। एक सूत्र ने कहा कि यह परीक्षण आईसीबीएम कैटेगरी का था, भले ही इसका डिजाइन पारंपरिक अग्नि-6 जैसा न दिखता हो।

इससे पहले डीआरडीओ चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत भी कह चुके थे कि अग्नि-6 कार्यक्रम को लेकर उनकी तकनीकी तैयारियां पूरी हैं और सरकार की मंजूरी मिलते ही आगे बढ़ा जाएगा।

परीक्षण से पहले भारत ने 6 से 9 मई के लिए बंगाल की खाड़ी में 3600 किलोमीटर क्षेत्र के लिए NOTMAR यानी नोटिस टू मेरिनर्स जारी किया था। यह आमतौर पर बड़े मिसाइल परीक्षणों से पहले किया जाता है ताकि समुद्री और हवाई क्षेत्र सुरक्षित रखा जा सके।

8 मई की शाम को मिसाइल को ओडिशा तट पर मौजूद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्च किया गया। यह द्वीप पहले व्हीलर आइलैंड के नाम से जाना जाता था और डीआरडीओ के प्रमुख मिसाइल परीक्षण केंद्रों में शामिल है।

मिसाइल के लॉन्च होते ही ग्राउंड आधारित रडार, टेलीमेट्री सिस्टम और समुद्र में तैनात ट्रैकिंग जहाजों ने इसकी उड़ान पर नजर रखी। मिसाइल ने तय रास्ते का पालन किया और उसके सभी पेलोड अलग-अलग लक्ष्यों की तरफ बढ़े।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक पूरे मिशन के दौरान सभी सिस्टम सामान्य तरीके से काम करते रहे और सभी पेलोड अपने निर्धारित क्षेत्रों तक पहुंचे।

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किन तकनीकों का हुआ इस्तेमाल

एडवांस अग्नि मिसाइल में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया माना जा रहा है। इनमें एडवांस नेविगेशन सिस्टम, हाई प्रिसिजन गाइडेंस, री-एंट्री टेक्नोलॉजी और मल्टीपल पेलोड डिप्लॉयमेंट शामिल हैं।

री-एंट्री टेक्नोलॉजी सबसे अहम मानी जाती है। जब मिसाइल अंतरिक्ष जैसी ऊंचाई से वापस वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो तापमान हजारों डिग्री तक पहुंच सकता है। ऐसे में वॉरहेड को सुरक्षित रखना बेहद कठिन होता है।

रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक इस तरह की तकनीक केवल कुछ देशों के पास ही होती है।

रफ्तार करीब मैक 24 तक

इस एडवांस अग्नि मिसाइल की सबसे ज्यादा स्पीड तब होती है, जब इसका री-एंट्री व्हीकल यानी MIRV पेलोड अंतरिक्ष से वापस धरती के वायुमंडल में प्रवेश करता है। इस दौरान इसकी रफ्तार करीब मैक 24 तक पहुंच जाती है। जो आवाज की गति से 24 गुना ज्यादा तेज होती है। इसकी स्पीड लगभग 29,400 किलोमीटर प्रति घंटा या करीब 8 किलोमीटर प्रति सेकंड मानी जाती है।

बैलिस्टिक मिसाइल की उड़ान कई चरणों में होती है। शुरुआत में जब मिसाइल लॉन्च होती है और उसका रॉकेट इंजन जल रहा होता है, तब उसकी गति धीरे-धीरे बढ़ती है। इसके बाद मिसाइल अंतरिक्ष में पहुंचती है, जहां वह मिड-कोर्स फेज में तय रास्ते पर आगे बढ़ती है।

सबसे अहम चरण टर्मिनल फेज होता है। इसी समय मिसाइल का री-एंट्री व्हीकल बहुत तेज गति से धरती की तरफ लौटता है। यही वह चरण होता है, जब इसकी स्पीड मैक 20 से मैक 25 तक पहुंच सकती है। अग्नि-5 के लिए भी करीब मैक 24 की स्पीड बताई जाती है और इस नई एडवांस अग्नि मिसाइल की गति भी लगभग इसी स्तर की मानी जा रही है।

MIRV तकनीक की वजह से एक ही मिसाइल के अंदर मौजूद अलग-अलग पेलोड अलग दिशाओं में जाकर अलग-अलग टारगेट को निशाना बना सकते हैं। हालांकि उनकी मुख्य री-एंट्री स्पीड बेहद ज्यादा रहती है।

इतनी तेज गति का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि दुश्मन के एयर डिफेंस और मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। दुनिया की दूसरी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें भी लगभग इसी स्पीड रेंज में उड़ती हैं।

क्या होती है ICBM मिसाइल

आईसीबीएम यानी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ऐसी लंबी दूरी की मिसाइल होती है जो हजारों किलोमीटर दूर मौजूद लक्ष्य को निशाना बना सकती है। सामान्य तौर पर 5500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को आईसीबीएम श्रेणी में रखा जाता है।

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अगर भारत पूरी तरह आईसीबीएम क्षमता हासिल कर लेता है, तो दुनिया के किसी भी हिस्से तक उसकी मिसाइल पहुंच सकती है। अभी अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास ऐसी क्षमता मानी जाती है। फ्रांस और ब्रिटेन के पास लंबी दूरी की परमाणु क्षमता वाली सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आईसीबीएम तकनीक केवल लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता नहीं दिखाती, बल्कि यह एडवांस रॉकेट प्रोपल्शन, गाइडेंस सिस्टम और री-एंट्री टेक्नोलॉजी में महारत का संकेत भी होती है।

कैसे शुरू हुआ अग्नि मिसाइल कार्यक्रम

भारत का अग्नि मिसाइल कार्यक्रम डीआरडीओ के इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत शुरू हुआ था। शुरुआत छोटी दूरी की अग्नि-1 से हुई, जिसकी रेंज करीब 700 किलोमीटर थी। इसके बाद अग्नि-2, अग्नि-3, अग्नि-4 और अग्नि-5 विकसित की गईं।

अग्नि-5 को भारत की सबसे आधुनिक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल माना जाता है। इसकी रेंज 5000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है। अब एडवांस अग्नि मिसाइल और MIRV तकनीक को अग्नि श्रृंखला की अगली पीढ़ी माना जा रहा है।

रक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह केवल रेंज बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि मिसाइल को ज्यादा स्मार्ट, ज्यादा सटीक और ज्यादा घातक बनाने की दिशा में कदम है।

क्या होती है MIRV तकनीक?

MIRV यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल आधुनिक मिसाइल तकनीक की सबसे मुश्किल सिस्टम्स में से एक मानी जाती है।

सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल में केवल एक वॉरहेड होता है, जो एक टारगेट पर हमला करता है। लेकिन MIRV सिस्टम में एक ही मिसाइल के अंदर कई री-एंट्री व्हीकल या वॉरहेड लगाए जाते हैं। मिसाइल जब अंतरिक्ष जैसी ऊंचाई तक पहुंचती है, तो उसका ऊपरी हिस्सा खुलता है और अलग-अलग वॉरहेड अलग दिशाओं में निकल जाते हैं।

इसके बाद हर वॉरहेड अपने अलग लक्ष्य की तरफ बढ़ता है। यानी एक ही मिसाइल कई शहरों, सैन्य ठिकानों या रणनीतिक लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक MIRV तकनीक दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है, क्योंकि उसे एक साथ कई वॉरहेड रोकने पड़ते हैं।

दुश्मन के मिसाइल डिफेंस को कैसे चुनौती देती है MIRV

आज कई देशों ने एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम विकसित किए हैं, जो आने वाली मिसाइलों को हवा में नष्ट करने की कोशिश करते हैं। लेकिन MIRV सिस्टम इन डिफेंस नेटवर्क के लिए मुसिबत है।

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अगर एक मिसाइल में पांच या उससे ज्यादा वॉरहेड हों, तो डिफेंस सिस्टम को हर वॉरहेड को अलग-अलग ट्रैक करना पड़ेगा। कई बार इनमें डिकॉय यानी नकली टारगेट भी शामिल किए जाते हैं, जिससे असली वॉरहेड की पहचान मुश्किल हो जाती है।

इसी वजह से MIRV तकनीक को स्ट्रैटेजिक डिटरेंस यानी न्यूक्लियर डिटरेंस का अहम हिस्सा माना जाता है।

भारत के लिए यह परीक्षण क्यों अहम

भारत लंबे समय से “नो फर्स्ट यूज” नीति पर चलता रहा है। यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर उस पर हमला हुआ तो वह जवाब देने में सक्षम रहेगा।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि MIRV तकनीक भारत की “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” को मजबूत करती है। इसका मतलब है कि अगर दुश्मन पहले हमला करता है, तब भी भारत जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

भारत के सामने चीन और पाकिस्तान दोनों की चुनौती है। चीन के पास पहले से DF-41 जैसी लंबी दूरी की MIRV क्षमता वाली मिसाइल मौजूद है। पाकिस्तान भी अपनी मिसाइल क्षमता लगातार बढ़ा रहा है।

ऐसे में एडवांस अग्नि मिसाइल का यह परीक्षण भारत की रणनीतिक तैयारी के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

दुनिया के दूसरे देशों के पास क्या क्षमता है

रूस के पास RS-28 सरमत जैसी मिसाइल है, जिसकी रेंज 12000 किलोमीटर से ज्यादा मानी जाती है। अमेरिका के पास मिनुटमैन-3 और नया सेंटिनल कार्यक्रम है। चीन के DF-41 को दुनिया की सबसे खतरनाक MIRV मिसाइलों में गिना जाता है।

उत्तर कोरिया भी लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है। कई रिपोर्टों में उसकी मिसाइल रेंज 10000 किलोमीटर से ज्यादा बताई गई है।

भारत अब उन देशों की सूची में तेजी से आगे बढ़ रहा है जिनके पास लंबी दूरी की मल्टीपल वॉरहेड क्षमता मौजूद है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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