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भारतीय नौसेना को मिला टेक्नोलॉजी-ड्रिवन चीफ, जानिए कौन हैं वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन

कृष्णा स्वामीनाथन ऐसे दौर में नौसेना प्रमुख बन रहे हैं जब हिंद महासागर क्षेत्र तेजी से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है। चीन लगातार हिंद महासागर में अपने युद्धपोत, सर्विलांस जहाज और पनडुब्बियां भेज रहा है...

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📍नई दिल्ली | 9 May, 2026, 1:10 PM

New Navy Chief India: वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन भारतीय नौसेना के अगले चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ होंगे। वह 31 मई को एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की जगह पदभार संभालेंगे। वर्तमान में वह पश्चिमी नौसेना फ्लीट के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर तैनात हैं। पश्चिमी नौसेना फ्लीट को भारतीय नौसेना की “स्वॉर्ड आर्म” यानी सबसे अहम युद्धक ताकत माना जाता है।

नौसेना में तकरीबन चार दशक लंबा अनुभव रखने वाले वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना के सबसे अनुभवी ऑपरेशनल अधिकारियों में गिना जाता है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, पाकिस्तान अपनी नौसैनिक ताकत को मजबूत कर रहा है और भारतीय नौसेना बड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रमों पर काम कर रही है।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक उनका कार्यकाल दिसंबर 2028 तक रह सकता है। यानी उन्हें करीब ढाई साल से ज्यादा समय मिलेगा। नौसेना के बड़े सुधारों और लंबे प्रोजेक्ट्स को देखते हुए इसे अहम माना जा रहा है।

New Navy Chief India: ऐसे समय में मिली जिम्मेदारी जब समुद्र में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा

कृष्णा स्वामीनाथन ऐसे दौर में नौसेना प्रमुख बन रहे हैं जब हिंद महासागर क्षेत्र तेजी से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है। चीन लगातार हिंद महासागर में अपने युद्धपोत, सर्विलांस जहाज और पनडुब्बियां भेज रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान भी चीन की मदद से अपनी नौसेना को आधुनिक बना रहा है।

हाल ही में पाकिस्तान ने चीन से हैंगोर क्लास एआईपी पनडुब्बी शामिल की है। इसे पाकिस्तान नौसेना के लिए बड़ी ताकत माना जा रहा है। ऐसे में भारतीय नौसेना भी अपनी अंडरवॉटर क्षमता और समुद्री निगरानी को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ साल भारतीय नौसेना के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को ऑपरेशनल अनुभव के साथ टेक्नोलॉजी और भविष्य के युद्ध की अच्छी समझ है।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के हैं एक्सपर्ट

वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्हें 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था।

नौसेना के अंदर उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में रही है जो भविष्य के युद्ध और नई तकनीकों पर खास ध्यान देते हैं। उन्होंने नौसेना में आधुनिक टेक्नोलॉजी, नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली और अनमैन्ड सिस्टम्स को लेकर कई महत्वपूर्ण काम किए हैं।

सूत्रों का कहना है कि वह मानते हैं कि आने वाले समय में युद्ध केवल बड़े युद्धपोतों या मिसाइलों से नहीं बल्कि डेटा, नेटवर्किंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अनमैन्ड सिस्टम्स से तय होंगे।

कई बड़े युद्धपोतों की संभाली है कमान

अपने लंबे करियर के दौरान कृष्णा स्वामीनाथन ने नौसेना के कई अहम युद्धपोतों और युद्धक प्लेटफॉर्म्स की कमान संभाली है।

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वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने वीर-क्लास मिसाइल बोट आईएनएस विद्युत (K48) और आईएनएस विनाश (K47) को कमांड किया है। इसके बाद उन्होंने कोरा-क्लास मिसाइल कॉर्वेट आईएनएस कुलिश (P63) की जिम्मेदारी भी संभाली।

बाद में उन्हें दिल्ली-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर आईएनएस मैसूर (D60) की कमान सौंपी गई, जिसे भारतीय नौसेना के सबसे ताकतवर युद्धपोतों में गिना जाता है। उन्होंने भारतीय नौसेना के फ्लैगशिप एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य (R33) के दूसरे कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई थी।

नौसेना में आईएनएस विक्रमादित्य जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर की कमान संभालना बेहद अहम जिम्मेदारी माना जाता है क्योंकि यह भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकतों में शामिल है।

“स्वॉर्ड आर्म” वेस्टर्न फ्लीट का कर चुके हैं नेतृत्व

कृष्णा स्वामीनाथन ने भारतीय नौसेना की वेस्टर्न फ्लीट का भी नेतृत्व किया। इसे नौसेना की “स्वॉर्ड आर्म” यानी हमला करने वाली मुख्य ताकत कहा जाता है।

वेस्टर्न फ्लीट पाकिस्तान के समुद्री मोर्चे और अरब सागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की सबसे अहम ऑपरेशनल फॉर्मेशन मानी जाती है। युद्ध जैसी स्थिति में यही फ्लीट सबसे पहले कार्रवाई करती है।

उनके कार्यकाल के दौरान समुद्री ऑपरेशंस, फ्लीट ट्रेनिंग और मल्टी-शिप ऑपरेशनल एक्सरसाइज पर खास फोकस किया गया था।

इंडियन नेवल सेफ्टी टीम की स्थापना में अहम रोल

रियर एडमिरल बनने के बाद उन्होंने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में चीफ स्टाफ ऑफिसर ट्रेनिंग के तौर पर काम किया। यहां उन्होंने नौसेना के ट्रेनिंग सिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने इंडियन नेवल सेफ्टी टीम की स्थापना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह टीम नौसेना के अलग-अलग ऑपरेशनल क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की निगरानी करती है।

नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक आधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों और एयरक्राफ्ट कैरियर के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऑपरेशनल सुरक्षा बेहद अहम हो गई है। इसी वजह से इस सिस्टम को काफी महत्व दिया जाता है।

नौसेना मुख्यालय में भी संभाले कई अहम पद

कृष्णा स्वामीनाथन ने नौसेना मुख्यालय में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रहे। इसके अलावा कंट्रोलर ऑफ पर्सनल सर्विसेज और चीफ ऑफ पर्सनल जैसे अहम पद भी संभाले।

बाद में वह वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने नौसेना के आधुनिकीकरण और नई तकनीकों से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया। पिछले साल जुलाई में उन्हें मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान का प्रमुख बनाया गया था।

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ऑपरेशन सिंदूर में 30 से ज्यादा युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती

पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल के. स्वामीनाथन ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की आक्रामक तैयारी पाकिस्तान द्वारा युद्धविराम की मांग करने की बड़ी वजहों में से एक थी।

उन्होंने बताया था कि बहुत कम समय में भारतीय नौसेना ने 30 से ज्यादा युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती कर दी थी। आईएनएस विक्रांत एयरक्राफ्ट कैरियर बैटल ग्रुप के साथ भारतीय नौसेना के फ्रंटलाइन युद्धपोत पाकिस्तान के मकरान तट के पास युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार स्थिति में मौजूद थे।

वाइस एडमिरल स्वामीनाथन के मुताबिक भारतीय नौसेना की आक्रामक तैनाती और लगातार दबाव की वजह से पाकिस्तान नौसेना अपने तट के पास ही सीमित होकर रह गई। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की संभावित कार्रवाई का खतरा पाकिस्तान के युद्धविराम मांगने की अहम वजहों में शामिल था।

उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ था और भारतीय नौसेना तथा पश्चिमी नौसेना कमान देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए किसी भी मिशन को अंजाम देने के लिए तैयार थी।

अब पनडुब्बियों और अनमैन्ड सिस्टम पर रहेगा बड़ा फोकस

रक्षा सूत्रों के मुताबिक कृष्णा स्वामीनाथन के कार्यकाल में भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर ताकत पर खास ध्यान दिया जाएगा।

भारतीय नौसेना लंबे समय से नई पनडुब्बियों की जरूरत महसूस कर रही है। प्रोजेक्ट-75 इंडिया के तहत छह नई पनडुब्बियों की योजना लंबे समय से लंबित है। माना जा रहा है कि नए नौसेना प्रमुख इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर जोर देंगे।

इसके अलावा भारत की अगली न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी परियोजना पर भी तेजी से काम हो सकता है।

नौसेना अब केवल पारंपरिक युद्धपोतों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अनमैन्ड सिस्टम्स और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर पर तेजी से फोकस बढ़ाया जा रहा है।

रक्षा अधिकारियों का कहना है कि समुद्री युद्ध अब पूरी तरह बदल चुका है। अब ड्रोन, अनमैन्ड अंडरवॉटर व्हीकल्स, नेटवर्क आधारित सेंसर और रियल टाइम डेटा युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

आत्मनिर्भर भारत पर रहेगा जोर

सरकार “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण पर जोर दे रही है। नए नौसेना प्रमुख को भी इस दिशा में अहम भूमिका निभानी होगी।

भारतीय नौसेना पहले ही कई स्वदेशी युद्धपोत, डेस्ट्रॉयर और फ्रिगेट शामिल कर चुकी है। अब अगली पीढ़ी के युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण पर भी तेजी से काम हो रहा है।

सूत्रों का कहना है कि वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन स्वदेशी टेक्नोलॉजी और “निश टेक्नोलॉजी” के इस्तेमाल पर खास फोकस करते हैं। यही वजह है कि उन्हें टेक्नोलॉजी-ड्रिवन अधिकारी माना जाता है।

थिएटर कमांड और जॉइंटनेस में भी निभाएंगे बड़ी भूमिका

नए नौसेना प्रमुख को केवल समुद्री चुनौतियों से ही नहीं बल्कि सैन्य सुधारों से जुड़े बड़े बदलावों में भी भूमिका निभानी होगी।

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हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को नया सीडीएस नियुक्त किया गया है। सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच जॉइंटनेस और थिएटर कमांड सिस्टम पर तेजी से काम चल रहा है।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और नए सीडीएस मिलकर ट्राई-सर्विस इंटीग्रेशन को आगे बढ़ाएंगे।

थिएटर कमांड मॉडल के तहत तीनों सेनाओं के संसाधनों को इंटीग्रेट करने की योजना है ताकि युद्ध के दौरान संयुक्त ऑपरेशन तेजी से किए जा सकें।

रणनीतिक सोच रखने वाले अधिकारी

कृष्णा स्वामीनाथन को केवल ऑपरेशनल अधिकारी ही नहीं बल्कि रणनीतिक सोच रखने वाला अधिकारी भी माना जाता है।

उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी खड़कवासला से सैन्य प्रशिक्षण लिया। इसके अलावा ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वॉर कॉलेज से भी अध्ययन किया।

उनके पास जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से बीएससी की डिग्री है। कोचिन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से टेलीकम्युनिकेशन में एमएससी भी किया है।

उन्होंने लंदन के किंग्स कॉलेज से डिफेंस स्टडीज में एमए, मुंबई यूनिवर्सिटी से स्ट्रैटेजिक स्टडीज में एमफिल और इंटरनेशनल स्टडीज में पीएचडी भी की है।

नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक उनकी यही अकादमिक और रणनीतिक समझ उन्हें बाकी अधिकारियों से अलग बनाती है।

भविष्य के युद्ध की तैयारी पर खास नजर

नौसेना के अंदर कृष्णा स्वामीनाथन की पहचान ऐसे अधिकारी के तौर पर रही है जो हमेशा भविष्य के युद्ध की तैयारी पर जोर देते हैं।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक वह बार-बार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि आने वाले समय में समुद्री युद्ध केवल जहाजों और मिसाइलों तक सीमित नहीं रहेगा। साइबर वॉरफेयर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, डेटा नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अनमैन्ड सिस्टम्स की भूमिका तेजी से बढ़ेगी।

इसी वजह से उनके कार्यकाल में नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर, रियल टाइम सेंसर फ्यूजन और समुद्री निगरानी क्षमता पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है।

भारतीय नौसेना फिलहाल हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने, समुद्री सुरक्षा मजबूत करने और नई पीढ़ी के युद्धपोतों को शामिल करने पर तेजी से काम कर रही है। अब इन बड़े कार्यक्रमों की जिम्मेदारी वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के हाथ में होगी।

Vice Admiral Krishna Swaminathan Appointed New Navy Chief Amid China-Pakistan Maritime Challenges

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    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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