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भारत डायनेमिक्स ने बनाया ‘स्मार्ट स्ट्राइक’ लॉन्ग रेंज स्वदेशी टॉरपीडो, एडवांस वायर-गाइडेड टेक्नोलॉजी से है लैस

इस टॉरपीडो के आने से भारतीय नौसेना की ताकत में सीधा इजाफा होगा। यह खासतौर पर एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) यानी दुश्मन की पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई में काम आएगा...

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📍नई दिल्ली/विशाखापत्तनम | 25 Apr, 2026, 1:48 PM

BDL Torpedo: देश की सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने भारतीय नौसेना के लिए भारत का पहला प्रोडक्शन-ग्रेड वायर गाइडेड हेवी वेट टॉरपीडो तैयार किया है। बीडीएल ने टॉरपीडो को विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लैबोरेटरी (एनएसटीएल) को सौंप दिया है।

टॉरपीडो एक ऐसा पानी के अंदर चलने वाला हथियार होता है, जिसे दुश्मन के जहाज या पनडुब्बी को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

“हेवी वेट टॉरपीडो” उन टॉरपीडो को कहा जाता है जो आकार में बड़े होते हैं और ज्यादा दूरी तक जाकर ज्यादा ताकत के साथ हमला कर सकते हैं। इन्हें आमतौर पर पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है।

इस नए टॉरपीडो की खास बात यह है कि यह वायर गाइडेड सिस्टम पर काम करता है। यानी लॉन्च करने के बाद भी इसे कंट्रोल किया जा सकता है और जरूरत के हिसाब से इसकी दिशा बदली जा सकती है।

BDL Torpedo: भारत का पहला प्रोडक्शन-ग्रेड सिस्टम

अब तक भारत इस तरह के एडवांस टॉरपीडो के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा है। लेकिन इस बार जो सिस्टम बीडीएल ने तैयार किया है, वह पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है।

इस टारपीडो को “प्रोडक्शन-ग्रेड” कहा जा रहा है, जिसका मतलब है कि यह सिर्फ टेस्ट या प्रोटोटाइप नहीं, बल्कि इस्तेमाल के लिए तैयार सिस्टम है।

इस टॉरपीडो को प्रैक्टिस (ट्रेनिंग) और कॉम्बैट (युद्ध) दोनों तरह के कॉन्फिगरेशन में तैयार किया गया है, ताकि इसे ट्रेनिंग और असली ऑपरेशन दोनों में इस्तेमाल किया जा सके।

इस टॉरपीडो को डीआरडीओ की लैब एनएसटीएल ने डिजाइन किया है, जबकि इसका उत्पादन बीडीएल ने किया है।

बीडीएल को इस प्रोजेक्ट में डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर (डीसीपीपी) बनाया गया था। कंपनी न सिर्फ निर्माण ही नहीं बल्कि डेवलपमेंट प्रोसेस में भी शामिल हुई।

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इस पूरे प्रोजेक्ट में कई छोटे और मझोले उद्योगों की भी भागीदारी रही है, जिससे देश के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को भी मजबूती मिली है।

कैसे काम करता है यह टॉरपीडो

यह टॉरपीडो कई एडवांस तकनीकों से लैस है। इसमें फाइबर ऑप्टिक वायर गाइडेंस सिस्टम होता है, जिससे इसे लॉन्च के बाद भी कंट्रोल किया जा सकता है।

इसके अलावा इसमें एक्टिव और पैसिव एकॉस्टिक होमिंग सिस्टम होता है, जो पानी के अंदर दुश्मन की पनडुब्बी या जहाज की आवाज पहचानकर उसे ट्रैक करता है।

यह सिस्टम पहले टारगेट को खोजता है, फिर उस पर हमला करता है और अगर पहली बार में निशाना चूक जाए तो दोबारा अटैक करने की क्षमता भी रखता है।

यह टारपीडो केवल एक बार इस्तेमाल होने वाला हथियार नहीं, बल्कि लगातार ट्रैकिंग और अटैक करने वाला स्मार्ट सिस्टम है।

इस टॉरपीडो के आने से भारतीय नौसेना की ताकत में सीधा इजाफा होगा। यह खासतौर पर एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) यानी दुश्मन की पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई में काम आएगा। इसके अलावा यह सतह पर मौजूद जहाजों को भी निशाना बना सकता है।

समुद्र के अंदर लड़ाई यानी अंडरवॉटर वॉरफेयर में इस तरह के हथियार बेहद अहम होते हैं, क्योंकि दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढना और उन्हें खत्म करना आसान काम नहीं होता। इस नए सिस्टम से नौसेना को अपने ऑपरेशन ज्यादा सटीक और प्रभावी तरीके से करने में मदद मिलेगी।

BDL Torpedo

पहले के टॉरपीडो से कितना अलग

भारत ने इससे पहले भी टॉरपीडो बनाए हैं। वरुणास्त्र को जहाजों से लॉन्च किया जाता है। लेकिन यह नया सिस्टम खास तौर पर पनडुब्बियों के लिए डिजाइन किया गया है और इसमें इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन और कम आवाज जैसी खूबियां शामिल हैं, जिससे यह ज्यादा स्टेल्थ यानी छिपकर काम करने में सक्षम होता है।

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इस वजह से इसे आधुनिक समुद्री युद्ध की जरूरतों के हिसाब से ज्यादा एडवंस माना जा रहा है। इस तरह के टॉरपीडो का इस्तेमाल उन इलाकों में ज्यादा अहम होता है जहां समुद्री गतिविधियां ज्यादा होती हैं।

भारतीय नौसेना के लिए यह सिस्टम हिंद महासागर क्षेत्र में काफी उपयोगी रहेगा, जहां अलग-अलग देशों की नौसेनाएं सक्रिय रहती हैं।

इसके अलावा पनडुब्बियों के जरिए होने वाले ऑपरेशन में भी यह अहम भूमिका निभाएगा, जहां दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना और समय पर कार्रवाई करना जरूरी होता है।

इस टॉरपीडो को तैयार करने से पहले कई चरणों में टेस्टिंग की गई है। इसमें हार्बर ट्रायल, सी ट्रायल और अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन की जांच शामिल रही है। इसके बाद ही इसे प्रोडक्शन-ग्रेड के रूप में तैयार किया गया और अब इसे आधिकारिक तौर पर सौंपा गया है। इस पूरी प्रक्रिया में कई साल लगे हैं, जिसमें डिजाइन, डेवलपमेंट और फाइनल प्रोडक्शन शामिल रहा है।

क्या तक्षक है यह टॉरपीडो?

हालांकि कंपनी ने इस टॉरपीडो का नाम नहीं बताया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह तक्षक है। क्योंकि इसकी खूबियां तक्षक से मेल खा रही हैं। तक्षक एक नया और एडवांस इलेक्ट्रिक हेवीवेट टॉरपीडो है, जिसे भारत में बनाया गया है। इसे खास तौर पर पनडुब्बियों से दुश्मन पर हमला करने के लिए तैयार किया गया है।

तक्षक में इलेक्ट्रिक इंजन लगा है, जो बहुत कम आवाज करता है। इसके अलावा यह “स्विम-आउट” तरीके से लॉन्च होता है, यानी बिना तेज आवाज के पानी में निकलता है। इससे दुश्मन को इसकी भनक लगाना मुश्किल होता है।

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यह टॉरपीडो करीब 40 किलोमीटर तक जाकर हमला कर सकता है। यानी पनडुब्बी को दुश्मन के काफी करीब जाने की जरूरत नहीं पड़ती। तक्षक की स्पीड लगभग 40 नॉट्स (करीब 70-75 किमी/घंटा) है। जो पानी के अंदर यह काफी तेज मानी जाती है।

यह टॉरपीडो करीब 400 मीटर या उससे ज्यादा गहराई में भी काम कर सकता है। इससे गहरे समुद्र में छिपी पनडुब्बियों को भी निशाना बनाया जा सकता है। वहीं इसमें भी फाइबर-ऑप्टिक वायर लगा है, जिससे इसे लॉन्च करने के बाद भी कंट्रोल किया जा सकता है और ऑपरेटर बीच में ही इसकी दिशा बदल सकता है।

तक्षक में ऐसा सिस्टम है जो पानी के अंदर आवाज (साउंड) के जरिए दुश्मन को ढूंढता है। यह अपने आप टारगेट को पहचानकर उस पर हमला कर सकता है। अगर पहली बार में निशाना नहीं लगता, तो यह फिर से टारगेट ढूंढकर दोबारा हमला कर सकता है। वहीं, अगर बीच में कंट्रोल वायर टूट जाए, तब भी यह अपने आप (ऑटोनॉमस मोड) में टारगेट पर हमला कर सकता है।

तक्षक सिर्फ पनडुब्बियों ही नहीं, बल्कि समुद्र में चल रहे जहाजों पर भी हमला कर सकता है। इसमें ऐसे सिस्टम लगे हैं जो दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक चालों (ECM) से बचकर काम कर सकते हैं। (BDL Torpedo)

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  • News Desk

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