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‘लास्ट लाइन डिफेंस’ मजबूत करने की तैयारी, जेन टेक्नोलॉजीज को मिला एंटी-ड्रोन कैनन बनाने का लाइसेंस

सरकार से मिली अनुमति के बाद जेन टेक्नोलॉजीज जिन कैनन का निर्माण करेगी, उनका इस्तेमाल कई अहम क्षेत्रों में होगा। इनमें एयर डिफेंस, नेवल ऑपरेशन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं...

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📍नई दिल्ली/हैदराबाद | 24 Apr, 2026, 8:04 PM

Zen Technologies cannon licence: भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी जेन टेक्नोलॉजीज को सरकार से एक अहम मंजूरी मिली है। कंपनी को आर्म्स एक्ट 1959 के तहत हथियार बनाने का लाइसेंस दिया गया है। इस लाइसेंस के तहत अब कंपनी 12.7 मिमी, 23 मिमी, 30 मिमी और 40 मिमी कैनन यानी तोपें बना सकेगी।

यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब दुनिया भर में ड्रोन और लो-फ्लाइंग एरियल थ्रेट्स तेजी से बढ़ रहे हैं। इन खतरों से निपटने के लिए अब पारंपरिक सिस्टम के साथ नए उपायों की जरूरत महसूस की जा रही है।

Zen Technologies cannon licence: किन कामों में इस्तेमाल होंगी ये तोपें

सरकार से मिली अनुमति के बाद जेन टेक्नोलॉजीज जिन कैनन का निर्माण करेगी, उनका इस्तेमाल कई अहम क्षेत्रों में होगा। इनमें एयर डिफेंस, नेवल ऑपरेशन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं।

ये तोपें खासतौर पर “लास्ट लेयर डिफेंस” के तौर पर काम करती हैं। जब कोई ड्रोन या हवाई खतरा बिल्कुल नजदीक पहुंच जाता है, तब ये सिस्टम उसे रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और छोटे एरियल टारगेट्स के खिलाफ ये कैनन तेजी से फायर कर सकते हैं। इसी वजह से इन्हें तेज और असरदार सुरक्षा सिस्टम माना जाता है।

एडवांस सिस्टम के साथ बढ़ेगी ताकत

फायर कंट्रोल सिस्टम, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर जैसे आधुनिक सिस्टम लगाने के बाद कैनन की क्षमता और बढ़ जाती है। जिसके बाद यह सिस्टम बहुत तेजी से टारगेट को पहचान सकता है और उस पर सटीक हमला कर सकता है।

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इसके अलावा प्रोग्रामेबल एम्यूनिशन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिससे अलग-अलग तरह के टारगेट के हिसाब से फायरिंग की जा सके। इससे कम लागत में ज्यादा असरदार सुरक्षा मिलती है।

पिछले कुछ सालों में युद्ध का तरीका तेजी से बदला है। अब ड्रोन और बिना पायलट वाले सिस्टम का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। ऐसे में पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के अलावा तेज और सस्ते समाधान की जरूरत भी बढ़ी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए इस तरह के कैनन सिस्टम को अहम माना जा रहा है। ये न केवल सेना के लिए, बल्कि बॉर्डर एरिया और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए भी उपयोगी होते हैं। एयरबेस, सैन्य ठिकाने, पावर प्लांट और अन्य जरूरी स्थानों की सुरक्षा में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

भारत में ही बनेगा पूरा सिस्टम

इस लाइसेंस के साथ अब इन कैनन का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। यह “इंडिजेनस्ली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड” यानी आईडीडीएम मॉडल के तहत बनाया जाएगा। जिसके तहत भारत अपनी जरूरत के हिसाब से खुद सिस्टम तैयार करेगा और विदेशी निर्भरता कम होगी। वहीं, जेन टेक्नोलॉजीज पहले से ही डिफेंस ट्रेनिंग और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर काम करती रही है। अब इस नए लाइसेंस के बाद कंपनी हार्ड-किल सिस्टम भी बना सकेगी।

हैदराबाद स्थित ज़ेन टेक्नोलॉजीज पिछले कई सालों से डिफेंस सेक्टर में काम कर रही है। कंपनी ने ट्रेनिंग सिमुलेटर, लाइव फायर सिस्टम और काउंटर-ड्रोन सॉल्यूशन जैसे कई प्रोडक्ट विकसित किए हैं।

कंपनी के पास दर्जनों इंडिजेनस प्रोडक्ट्स का पोर्टफोलियो है और यह देश-विदेश में अपने सिस्टम सप्लाई कर चुकी है।

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इस नए लाइसेंस के बाद कंपनी का फोकस अब पूरी तरह इंटीग्रेटेड डिफेंस सॉल्यूशन तैयार करने पर होगा, जिसमें ड्रोन की पहचान से लेकर उसे नष्ट करने तक की पूरी क्षमता शामिल होगी। (Zen Technologies cannon licence)

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