📍नई दिल्ली/स्टॉकहोम | 8 Jun, 2026, 12:26 PM
SIPRI Nuclear Report 2026: दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही है। कई दशकों तक परमाणु हथियारों की संख्या कम करने और उनके इस्तेमाल की भूमिका घटाने की कोशिशें चलती रहीं, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। दुनिया की प्रमुख परमाणु शक्तियां अपने हथियारों को लगातार आधुनिक बना रही हैं और नई तकनीकों से लैस कर रही हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की नई ईयरबुक 2026 ने वैश्विक सुरक्षा को लेकर कई अहम सवाल खड़े किए हैं।
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के नौ परमाणु हथियार संपन्न देश अपने परमाणु जखीरे को आधुनिक बनाने में जुटे हुए हैं। इनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल शामिल हैं। रिपोर्ट का कहना है कि परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता ऐसे समय में सामने आ रही है जब दुनिया में गलत आकलन, तनाव और सैन्य टकराव के खतरे भी बढ़ रहे हैं।
SIPRI Nuclear Report 2026: दुनिया में कितने परमाणु हथियार मौजूद हैं?
सिपरी के मुताबिक जनवरी 2026 तक दुनिया में कुल लगभग 12,187 परमाणु वॉरहेड मौजूद थे। इनमें से करीब 9,745 सैन्य भंडार में रखे गए थे और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
रिपोर्ट बताती है कि लगभग 4,012 वॉरहेड मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर तैनात थे, जबकि बाकी केंद्रीय भंडार में रखे गए थे। इनमें से लगभग 2,100 से 2,200 वॉरहेड ऐसे थे जिन्हें कुछ ही समय में लॉन्च किया जा सकता था। इनका सबसे बड़ा हिस्सा रूस और अमेरिका के पास है।
सिपरी के मुताबिक अब चीन और भारत भी सीमित संख्या में कुछ परमाणु हथियारों को शांतिकाल में मिसाइलों पर तैनात रखने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
शीत युद्ध के बाद पहली बार बदल रहा है ट्रेंड
शीत युद्ध समाप्त होने के बाद से दुनिया में परमाणु हथियारों की कुल संख्या लगातार कम होती रही थी। इसका मुख्य कारण अमेरिका और रूस द्वारा पुराने वॉरहेड को हटाना और नष्ट करना था।
लेकिन अब यह स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुराने हथियारों को हटाने की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जबकि नए परमाणु हथियार तेजी से तैनात किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में वैश्विक परमाणु भंडार फिर बढ़ सकता है।
सिपरी के निदेशक करीम हग्गाग ने कहा कि कई प्रभावशाली नेता और नीति निर्माता अब परमाणु हथियारों को राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटी के रूप में पेश कर रहे हैं। उनके अनुसार इससे वैश्विक जोखिम बढ़ सकते हैं और परमाणु हथियारों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। (SIPRI Nuclear Report 2026)
रूस और अमेरिका के पास अब भी सबसे बड़ा जखीरा
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग 83 प्रतिशत इस्तेमाल करने योग्य परमाणु हथियार केवल रूस और अमेरिका के पास हैं। हालांकि दोनों देशों के सैन्य भंडार में 2025 के दौरान कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया, लेकिन दोनों लगातार अपने परमाणु बलों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।
अमेरिका एक बड़े परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम पर काम कर रहा है। इसमें नई मिसाइलें, नए बम और नए डिलीवरी सिस्टम्स शामिल हैं। हालांकि इस कार्यक्रम को लागत और समय सीमा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं रूस भी अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि रूस की नई सरमात अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षणों में चुनौतियां सामने आईं। इसके बावजूद रूस कई नए सिस्टम्स पर काम जारी रखे हुए है। (SIPRI Nuclear Report 2026)
चीन सबसे तेजी से बढ़ा रहा परमाणु ताकत
सिपरी की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा ध्यान चीन के परमाणु विस्तार पर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार चीन के पास अब लगभग 620 परमाणु वॉरहेड हैं।
चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपने मिसाइल साइलो नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है। जनवरी 2026 तक चीन ने देश के उत्तरी हिस्से में सैकड़ों मिसाइल साइलो तैयार कर लिए थे। इसके अलावा पूर्वी क्षेत्रों में भी नए साइलो बनाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा गति बनी रहती है तो दशक के अंत तक चीन के पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या रूस और अमेरिका के बराबर पहुंच सकती है।
हालांकि कुल परमाणु हथियारों की संख्या के मामले में चीन अभी भी अमेरिका और रूस से काफी पीछे है। (SIPRI Nuclear Report 2026)
भारत ने भी बढ़ाई अपनी परमाणु क्षमता
रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2025 के दौरान अपने परमाणु हथियार भंडार में हल्का विस्तार किया है और नए डिलीवरी सिस्टम्स के डेवलपमेंट पर काम जारी रखा।
सिपरी का कहना है कि भारत का आधुनिकीकरण कार्यक्रम अब लंबी दूरी के हथियारों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे सिस्टम विकसित करना है जो चीन के भीतर दूर स्थित टरगेट्स तक पहुंच सकें।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की सुरक्षा योजना में पाकिस्तान अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और दोनों मोर्चों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई जा रही है।
भारत लगातार नई मिसाइल तकनीकों, समुद्र आधारित परमाणु क्षमता और एडवांस डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है। (SIPRI Nuclear Report 2026)
पाकिस्तान भी बढ़ा रहा है अपनी तैयारी
सिपरी के अनुसार पाकिस्तान ने 2025 में नए डिलीवरी सिस्टम डेवलप करने और विखंडनीय सामग्री के उत्पादन पर काम जारी रखा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की परमाणु क्षमता भी आने वाले सालों में बढ़ सकती है। इसके पीछे नए मिसाइल सिस्टम्स का विकास और परमाणु सामग्री का उत्पादन प्रमुख कारण बताए गए हैं।
सिपरी ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीमित सैन्य संघर्ष का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष के दौरान दोनों देशों ने कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन दोनों पक्षों ने तनाव को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाए। (SIPRI Nuclear Report 2026)
उत्तर कोरिया लगातार बढ़ा रहा परमाणु कार्यक्रम
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। सिपरी का अनुमान है कि उत्तर कोरिया के पास लगभग 60 परमाणु वॉरहेड हो सकते हैं।
इसके अलावा उसके पास इतना विखंडनीय पदार्थ मौजूद है जिससे कम से कम 30 और वॉरहेड बनाए जा सकते हैं।
उत्तर कोरिया ने 2025 में कई नई मिसाइल प्रणालियों का परीक्षण भी किया। इनमें नई पीढ़ी की ठोस ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें शामिल हैं।
फ्रांस और ब्रिटेन भी कर रहे हैं आधुनिकीकरण
रिपोर्ट बताती है कि फ्रांस और ब्रिटेन ने भी अपने परमाणु कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। फ्रांस नई पीढ़ी की परमाणु पनडुब्बियों और हाइपरसोनिक परमाणु क्रूज मिसाइलों पर काम कर रहा है। वहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया है।
ब्रिटेन ने अपने परमाणु भंडार की वास्तविक संख्या सार्वजनिक करना बंद कर दिया है। साथ ही उसने अमेरिका से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम एफ-35ए लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया है। (SIPRI Nuclear Report 2026)
इजरायल की परमाणु गतिविधियों पर भी नजर
इजरायल सार्वजनिक रूप से परमाणु हथियार रखने की पुष्टि नहीं करता, लेकिन सिपरी का मानना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम का आधुनिकीकरण कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास निर्माण गतिविधियां तेज हुईं। विशेषज्ञ इसे परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों के रूप में देख रहे हैं। (SIPRI Nuclear Report 2026)
बढ़ रही है गोपनीयता और घट रही है पारदर्शिता
सिपरी ने एक और महत्वपूर्ण चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार परमाणु हथियार संपन्न देश अब पहले की तुलना में कम जानकारी सार्वजनिक कर रहे हैं।
कई देश अपने परमाणु भंडार का आकार बताना बंद कर चुके हैं। इससे पारदर्शिता कम हो रही है और दूसरे देशों के लिए सही आकलन करना मुश्किल होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब देशों के बीच सीधा संवाद कम हो और जानकारी सीमित हो, तब गलतफहमी और तनाव का खतरा बढ़ जाता है। (SIPRI Nuclear Report 2026)
परमाणु अप्रसार व्यवस्था पर भी दबाव
रिपोर्ट में परमाणु अप्रसार संधि को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। मई 2026 में समाप्त हुई समीक्षा बैठक लगातार तीसरी ऐसी बैठक रही जिसमें सदस्य देश किसी साझा अंतिम दस्तावेज पर सहमत नहीं हो सके।
सिपरी का मानना है कि परमाणु शक्तियों द्वारा नए हथियारों की तैनाती, आधुनिकीकरण कार्यक्रम और हथियार नियंत्रण समझौतों का कमजोर होना वैश्विक अप्रसार व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है। (SIPRI Nuclear Report 2026)


