📍नई दिल्ली/मुंबई | 22 Jul, 2026, 8:56 PM
IASV Triveni Samudra Pradakshina: भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की नौ महिला अधिकारियों ने 314 दिनों तक समुद्र में रहकर दुनिया का चक्कर लगाने का ऐतिहासिक अभियान पूरा कर लिया है। यह पहली बार है जब तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों ने एक साथ एक ही नौकायन अभियान में हिस्सा लिया और करीब 25,500 नॉटिकल माइल की समुद्री यात्रा पूरी की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस ऐतिहासिक अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ का औपचारिक स्वागत किया।
यह अभियान 11 सितंबर 2025 को मुंबई से शुरू हुआ था। महिला अधिकारी भारतीय सेना के सेलिंग वेसल आईएएसवी त्रिवेणी पर सवार होकर दुनिया की परिक्रमा के लिए निकली थीं। लगभग दस महीने बाद यह दल सुरक्षित मुंबई लौट आया। इस दौरान दल ने चार महासागरों को पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय सभी मानकों को पूरा किया।
IASV Triveni Samudra Pradakshina: पहली बार तीनों सेनाओं की महिला अधिकारी एक साथ निकलीं
‘समुद्र प्रदक्षिणा‘ भारतीय सशस्त्र बलों का पहला ऐसा अभियान था, जिसमें भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना की महिला अधिकारियों ने एक साथ हिस्सा लिया। पूरे अभियान के दौरान सभी अधिकारी एक ही टीम के रूप में रहीं। उन्होंने साथ प्रशिक्षण लिया, समुद्र में लंबे समय तक साथ रहकर नौकायन किया और सभी चुनौतियों का मिलकर सामना किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभियान केवल समुद्री यात्रा नहीं, बल्कि नारी शक्ति, तीनों सेनाओं की जॉइंटनेस और नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मिशन दिखाता है कि जब तीनों सेनाएं एक लक्ष्य के लिए साथ काम करती हैं तो उनकी क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
करीब दो साल की तैयारी के बाद शुरू हुआ मिशन
इस अभियान की तैयारी लगभग दो साल पहले शुरू हुई थी। महिला अधिकारियों को समुद्र में लंबी दूरी तक नौकायन, खराब मौसम से निपटने, तकनीकी उपकरणों के संचालन, आपातकालीन स्थिति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा पूरे अभियान के दौरान 24 घंटे काम करने वाला एक शोर-बेस्ड सपोर्ट नेटवर्क भी एक्टिव रहा, जो लगातार दल की निगरानी करता रहा और जरूरत पड़ने पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता रहा।
अभियान के दौरान आईएएसवी त्रिवेणी ने दुनिया की परिक्रमा के लिए जरूरी सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा किया। जहाज ने पृथ्वी के सभी प्रमुख देशांतरों को पार किया, दो बार भूमध्य रेखा को पार किया, इंटरनेशनल डेट लाइन को पार किया और दुनिया के तीन सबसे कठिन समुद्री मार्गों तक सफलतापूर्वक पहुंचा। (IASV Triveni Samudra Pradakshina)

स्वदेशी आईएएसवी त्रिवेणी 50 फीट लंबा सेलिंग वेसल
इस पूरे अभियान में इस्तेमाल किया गया आईएएसवी त्रिवेणी पूरी तरह भारत में बनाया गया 50 फीट लंबा सेलिंग वेसल है। रक्षा मंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह जहाज भारतीय इंजीनियरिंग, स्वदेशी तकनीक और रणनीतिक आत्मविश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि आईएएसवी त्रिवेणी ने यह साबित किया है कि भारत अब केवल आधुनिक रक्षा उपकरणों का उपयोग ही नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें विकसित करने और कठिन अभियानों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल करने की क्षमता भी रखता है।
ड्रेक पैसेज से केप हॉर्न तक, दुनिया के सबसे कठिन समुद्री मार्ग किए पार
इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री इलाकों को सुरक्षित पार करना भी शामिल रहा। आईएएसवी त्रिवेणी ने ड्रेक पैसेज से सफलतापूर्वक गुजरते हुए केप हॉर्न का चक्कर पूरा किया। ड्रेक पैसेज दक्षिण अमेरिका के केप हॉर्न और अंटार्कटिका के बीच स्थित है। इसे दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में गिना जाता है, जहां तेज हवाएं, ऊंची लहरें और अचानक बदलता मौसम जहाजों के लिए बड़ी चुनौती बनते हैं।
इस कठिन मार्ग को सफलतापूर्वक पार करने के बाद अभियान दल को प्रतिष्ठित केप हॉर्नर्स समुदाय की सदस्यता मिली। यह सम्मान केवल उन नाविकों को दिया जाता है, जो दुनिया के सबसे कठिन समुद्री रास्तों में से एक को सफलतापूर्वक पार करते हैं।
A landmark moment for India’s Armed Forces! #RakshaMantri @rajnathsingh flagged in ‘Samudra Pradakshina’, the first-ever Tri-Service all-women circumnavigation sailing expedition. Nine women officers completed a 314-day, 25,500-nautical mile voyage across four oceans aboard IASV… pic.twitter.com/DyY2NcCFjY
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) July 22, 2026
यात्रा के दौरान आईएएसवी त्रिवेणी ने केप लीविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप जैसे तीन प्रमुख समुद्री केप भी पार किए। इसके अलावा दल ने दो बार भूमध्य रेखा पार की और इंटरनेशनल डेट लाइन को भी पार किया। इन सभी उपलब्धियों के बाद अभियान ने विश्व स्तर पर मान्य समुद्री परिक्रमा के सभी मानकों को पूरा कर लिया। (IASV Triveni Samudra Pradakshina)
कई देशों में पहुंचा भारत का संदेश
आईएएसवी त्रिवेणी ने यात्रा के दौरान कई देशों के बंदरगाहों पर भी रुककर भारत का प्रतिनिधित्व किया। इन पड़ावों के दौरान दल ने भारतीय संस्कृति, समुद्री परंपरा और सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभियान भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने का भी माध्यम बना। उन्होंने कहा कि आईएएसवी त्रिवेणी एक जहाज ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों में भारत का तैरता हुआ प्रतिनिधि बनकर पहुंचा।
तीनों सेनाओं की संयुक्त क्षमता का उदाहरण बना मिशन
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया जॉइंट ऑपरेशंस, इंटीग्रेटेड कमांड और मल्टी डोमेन वॉरफेयर पर जोर दे रही है, तब इस अभियान ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल का व्यावहारिक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों ने एक साथ रहकर और काम करके यह दिखाया कि संयुक्त योजना और साझा नेतृत्व किसी भी मिशन की सफलता को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने महिला अधिकारियों के साहस और धैर्य की सराहना करते हुए कहा कि समुद्र की ऊंची लहरों से भी भारत की बेटियों का हौसला बड़ा साबित हुआ है। (IASV Triveni Samudra Pradakshina)
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