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रक्षा मंत्री बोले- युद्ध में रिसर्च और सरप्राइज ही जीत की कुंजी, ऑपरेशन सिंदूर बना मिसाल

रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में कुछ खास क्षेत्रों में तेजी से काम करने की जरूरत है। इसमें डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स, हाइपरसोनिक वेपन्स, अंडरवॉटर सिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल हैं...

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📍प्रयागराज | 4 May, 2026, 2:45 PM

Future Warfare Technology India: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी और नए तरह के युद्ध के दौर में भारत अपनी सैन्य रणनीति को नए तरीके से तैयार कर रहा है। नॉर्थ टेक सिम्पोजियम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि अब सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि रिसर्च, नई तकनीक और “सरप्राइज एलिमेंट” ही भविष्य के युद्ध में जीत तय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों ने दिखा दिया है कि भारत अब बदलते युद्ध को समझकर उसी हिसाब से कार्रवाई कर रहा है।

Future Warfare Technology India: तकनीक ने बदल दिया युद्ध का तरीका

प्रयागराज में चल रहे तीन दिवसीय ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ के उद्घाट समारोह में रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के समय में युद्ध का स्वरूप बहुत तेजी से बदल रहा है। पहले जहां टैंक और मिसाइलें युद्ध का मुख्य हिस्सा थीं, वहीं अब ड्रोन और सेंसर जैसे सिस्टम बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि सिर्फ तीन-चार साल में ही युद्ध का तरीका पूरी तरह बदल गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब रोजमर्रा की चीजें भी हथियार के तौर पर इस्तेमाल हो रही हैं। लेबनान और सीरिया में हुए पेजर हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इन घटनाओं ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर किया है कि आधुनिक युद्ध अब किस दिशा में जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा, “आज की स्थिति में हमें हर तरह की चुनौती के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि अब युद्ध सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी के जरिए कहीं भी और कभी भी हो सकता है।”

Future Warfare Technology India

सरप्राइज एलिमेंट सबसे बड़ा हथियार

रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध में जीत उसी की होती है, जिसके पास सरप्राइज एलिमेंट होता है। यानी जो दुश्मन को बिना बताए और अचानक हमला करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि भारत को भी अपनी सैन्य क्षमताओं को इस दिशा में और मजबूत करना होगा।

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उन्होंने कहा, “इतिहास गवाह है कि युद्ध में वही पक्ष जीतता है, जिसके पास सरप्राइज का फायदा होता है। हमारी सेनाएं इस दिशा में काम कर रही हैं, लेकिन हमें और ज्यादा सक्रिय होकर आगे बढ़ना होगा।

रिसर्च को बताया सबसे जरूरी

रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में रिसर्च की अहमियत पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में रिसर्च का कोई विकल्प नहीं है और भविष्य के युद्ध आज लैबोरेटरी में तय हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने डिफेंस रिसर्च को अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखा है और डीआरडीओ के जरिए इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि अब डीआरडीओ अकेले काम नहीं कर रहा, बल्कि इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम कर रहा है। सरकार ने रिसर्च और डेवलपमेंट बजट का 25 फीसदी हिस्सा इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों के लिए रखा है।

उन्होंने कहा, “अगर आप दूर तक जाना चाहते हैं, तो साथ मिलकर चलना होगा। डीआरडीओ अब इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम कर रहा है।”

इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स को बढ़ावा

रक्षा मंत्री ने बताया कि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट बजट का 25 फीसदी हिस्सा इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों के लिए रखा गया है। अब तक इन क्षेत्रों ने 4500 करोड़ रुपये से ज्यादा का उपयोग किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव किया गया है और पहले जो 20 प्रतिशत फीस ली जाती थी, उसे हटा दिया गया है। इससे कंपनियों को नई तकनीक अपनाने में आसानी हो रही है।

उन्होंने बताया कि डीआरडीओ अब तक 2200 से ज्यादा टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को दे चुका है, जिससे देश में रक्षा उत्पादन को मजबूती मिली है।

Future Warfare Technology India
GOC-in-C, Northern Command Lieutenant General Pratik Sharma with Defence Minister

नई तकनीकों पर फोकस

रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में कुछ खास क्षेत्रों में तेजी से काम करने की जरूरत है। इसमें डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स, हाइपरसोनिक वेपन्स, अंडरवॉटर सिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल हैं।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि अब भारतीय कंपनियों को डीआरडीओ के पेटेंट्स का उपयोग करने की सुविधा दी जा रही है। इससे उनकी तकनीकी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि डीआरडीओ की टेस्टिंग फैसिलिटीज भी कंपनियों के लिए खोली गई हैं, जहां हर साल सैकड़ों कंपनियां रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए इनका इस्तेमाल करती हैं।

उन्होंने इंडस्ट्री से अपील की कि वे इन क्षेत्रों में आगे आएं और नई तकनीक विकसित करें। सरकार इस दिशा में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।

ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र

अपने भाषण में रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया और इसे आधुनिक तकनीकी युद्ध का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दुनिया को भारत की सैन्य ताकत और तकनीकी क्षमता का परिचय कराया।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर इस बात का साफ प्रमाण है कि भारत बदलते युद्ध के स्वरूप को समझता है और नई तकनीकों का इस्तेमाल पूरी आत्मविश्वास के साथ करता है।”

उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में आकाशतीर, आकाश मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने iDEX, ADITI और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड जैसी योजनाओं का जिक्र किया, जो इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं, जो देश की रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहे हैं।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रक्षा उत्पादन

रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके साथ ही रक्षा निर्यात भी 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

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उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में निजी क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा है और अब विदेशी कंपनियां भी भारत के साथ काम करने में रुचि दिखा रही हैं।

Future Warfare Technology India
General Officer Commanding-in-Chief (GOC-in-C), Central Command Lieutenant General Anindya Sengupta

सिम्पोजियम से सेना और इंडस्ट्री में बढ़ेगा तालमेल

इस मौके पर सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि यह सिम्पोजियम सेना और इंडस्ट्री के बीच तालमेल बढ़ाने का एक बड़ा मंच है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक तैयार करना है, जो सीधे ऑपरेशन में काम आ सके।

वहीं नॉर्दर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद नए आइडिया और अनुभव को जमीन पर लागू करने वाली क्षमता में बदलना है। उन्होंने कहा कि हाल के संघर्षों को देखते हुए ड्रोन, काउंटर ड्रोन सिस्टम, एआई आधारित निर्णय प्रणाली और प्रिसीजन स्ट्राइक जैसी तकनीकें अब बेहद जरूरी हो गई हैं।

इस सिम्पोजियम में 284 कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। इनमें एमएसएमई, स्टार्टअप्स, निजी कंपनियां और सेना से जुड़े इनोवेटर्स शामिल हैं। यहां कई नई तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है, जो सेना के लिए उपयोगी हो सकती हैं। इस कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ मिलकर यह भी तय करेंगे कि किन तकनीकों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए और कैसे उन्हें सेना में लागू किया जा सकता है।

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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