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एससीओ बैठक में रक्षा मंत्री ने किया ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र, बोले- अब सुरक्षित नहीं रहे आतंकवाद के ठिकाने

रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि यह कार्रवाई भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दिखाती है, जिसमें आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ जवाब देने में कोई हिचक नहीं है...

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📍नई दिल्ली/बिश्केक | 28 Apr, 2026, 2:34 PM

Operation Sindoor SCO Meeting: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) के डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर साफ और कड़ा रुख रखा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया है कि अब आतंकवाद के केंद्र सुरक्षित नहीं रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

Operation Sindoor SCO Meeting: ऑपरेशन सिंदूर का दिया उदाहरण

रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि यह कार्रवाई भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दिखाती है, जिसमें आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ जवाब देने में कोई हिचक नहीं है। उन्होंने कहा कि जो जगहें पहले आतंकवाद का सुरक्षित ठिकाना मानी जाती थीं, अब वे भी जवाबी कार्रवाई से बाहर नहीं हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पार से होने वाले आतंकवादी हमले किसी भी देश की संप्रभुता पर सीधा हमला होते हैं और ऐसे मामलों में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। (Operation Sindoor SCO Meeting)

Operation Sindoor SCO Meeting
Photo: PIB

आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील

राजनाथ सिंह ने एससीओ के सदस्य देशों से कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सभी देशों को एक साथ खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों को पनाह देने, समर्थन देने या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

उनके अनुसार, जब तक इन सुरक्षित ठिकानों को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अधूरी रहेगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह का राजनीतिक अपवाद नहीं होना चाहिए।

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“आतंकवाद का कोई धर्म या देश नहीं”

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद का कोई देश या धर्म नहीं होता। इसलिए इसके खिलाफ सभी देशों को एक समान और सख्त रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस खतरे से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं और यह तभी संभव है जब सभी देश बिना किसी भेदभाव के एक जैसी नीति अपनाएं।

उन्होंने पिछले साल जारी तियानजिन डिक्लेरेशन का भी जिक्र किया, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रुख अपनाने की बात कही गई थी। इसे उन्होंने भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि एससीओ की जिम्मेदारी सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक शांति और स्थिरता पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है और ऐसे में एससीओ की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि एससीओ के तहत काम कर रही रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर (RATS) आतंकवाद के खिलाफ अहम भूमिका निभा रही है। इसके जरिए सदस्य देश मिलकर कट्टरपंथ और आतंकवाद से जुड़े खतरों का सामना कर रहे हैं।

दुनिया के बदलते हालात पर जताई चिंता

रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि आज दुनिया का माहौल काफी बदल रहा है। कई देश अब अंदरूनी मामलों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में कमी देखी जा रही है। ऐसे समय में यह जरूरी है कि देश आपसी सहयोग और भरोसे को मजबूत करें।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दुनिया को एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की जरूरत है या मौजूदा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की। उनके अनुसार, जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जिसमें हर व्यक्ति को सम्मान मिले और मतभेद विवाद में न बदलें।

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राजनाथ सिंह ने कहा कि देशों को हमेशा बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया को हिंसा और युद्ध की दिशा में नहीं बढ़ना चाहिए, बल्कि शांति और विकास की ओर जाना चाहिए।

उन्होंने महात्मा गांधी के संदेश का भी जिक्र किया और कहा कि हर कार्रवाई से पहले यह सोचना चाहिए कि उसका असर आम लोगों, खासकर गरीब और जरूरतमंदों पर क्या पड़ेगा। उन्होंने कहा कि असली ताकत वही है जो कमजोर लोगों की रक्षा के लिए इस्तेमाल की जाए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत एससीओ के उद्देश्यों को लागू करने में सकारात्मक भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच आपसी सम्मान, समानता और विश्वास के आधार पर सहयोग बढ़ाना जरूरी है।

उनके अनुसार, अगर सदस्य देश मिलकर काम करें, तो एससीओ क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। (Operation Sindoor SCO Meeting)

बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा

इस बैठक में सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आतंकवाद और कट्टरपंथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इन विषयों का असर न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखा जा रहा है। सदस्य देशों ने यह भी माना कि 2026 एससीओ के गठन के 25 साल पूरे होने का साल है और ऐसे समय में संगठन की भूमिका पहले से ज्यादा अहम हो गई है। बढ़ती अनिश्चितता के बीच एससीओ से स्थिरता और सहयोग की उम्मीद की जा रही है। (Operation Sindoor SCO Meeting)

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