📍नई दिल्ली/बेलगावी | 28 Apr, 2026, 3:55 PM
16th Bhairav Battalion Indian Army: भारतीय सेना ने अपनी ऑपरेशनल ताकत को और मजबूत करते हुए कर्नाटक के बेलगावी में एक नई यूनिट खड़ी की। यह यूनिट है 16वीं ‘भैरव’ बटालियन, जिसे भैरव लाइट कमांडो बटालियन भी कहा जाता है। इस बटालियन का गठन मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंटल सेंटर में किया गया, जो सेना के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित ट्रेनिंग सेंटर में से एक माना जाता है।
जिस रेजिमेंटल सेंटर में इस बटालियन का गठन हुआ, वह मराठा लाइट इन्फैंट्री का हिस्सा है। यह भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सम्मानित रेजिमेंट्स में से एक है। इस सेंटर ने वर्षों से सेना के लिए प्रशिक्षित और सक्षम सैनिक तैयार किए हैं। रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर जॉयदीप मुखर्जी ने नई बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर को बटालियन का ध्वज सौंपा। इस दौरान नई यूनिट के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर भी पेश किया।
16th Bhairav Battalion Indian Army: कितनी बटालियन बनाने की योजना है
अभी तक कुल 16 भैरव बटालियन बनाई जा चुकी हैं। सेना की योजना है कि इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 25 तक की जाए। हर बटालियन में करीब 250 से 300 तक विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक होते हैं।
इन सैनिकों को सिर्फ इन्फैंट्री से ही नहीं, बल्कि आर्टिलरी, सिग्नल्स, एयर डिफेंस जैसी अलग-अलग शाखाओं से लिया जाता है, ताकि यूनिट ज्यादा सक्षम और मल्टीपर्पज बन सके।
ये यूनिट्स सीधे ब्रिगेड या डिवीजन कमांडर के कंट्रोल में काम करती हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत एक्शन लेती हैं। इनका फोकस तेजी, लचीलापन और कम समय में ऑपरेशन पूरा करने पर होता है।
किन-किन रेजिमेंट्स में बनाई जा रही हैं भैरव
भैरव बटालियन को सीधे किसी एक फोर्स से नहीं लिया जाता, बल्कि इन्हें अलग-अलग इन्फैंट्री रेजिमेंटल सेंटर में तैयार किया जाता है। यहां अलग-अलग यूनिट्स से चुने गए सैनिकों को एक साथ लाकर खास ट्रेनिंग दी जाती है।
इससे पहले चौथी भैरव बटालियन सिख लाइट इन्फैंट्री के तहत बनाई गई थी, जिसने रिपब्लिक डे परेड में भी हिस्सा लिया था। इसके अलावा राजपूत, गढ़वाल, कुमाऊं, जाट और डोगरा जैसी अलग-अलग इन्फैंट्री रेजिमेंट्स के सेंटर में भी भैरव बटालियन बनाई जा रही हैं।
इसमें “सन ऑफ द सॉयल” का कॉन्सेप्ट भी अपनाया जाता है, यानी सैनिकों को उनके क्षेत्र और रेजिमेंट से जोड़कर रखा जाता है, ताकि उनकी पहचान और तालमेल बना रहे।
एलसी और एलएसी पर हैं तैनात
भैरव लाइट कमांडो बटालियन को भारतीय सेना ने खास तौर पर संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों के लिए तैयार किया है। इनका मुख्य काम ऐसे क्षेत्रों में तेजी से कार्रवाई करना है, जहां हालात अचानक बदल सकते हैं। इसलिए इनकी तैनाती देश के अलग-अलग बॉर्डर सेक्टर में की जा रही है।
भैरव बटालियन को चार बड़े कमांड एरिया में रखा जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके। इनकी सबसे ज्यादा तैनाती नॉर्दर्न कमांड में है। यह इलाका जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को कवर करता है, जहां चीन और पाकिस्तान दोनों तरफ से सुरक्षा चुनौतियां रहती हैं। लद्दाख के लेह सेक्टर में 14 कॉर्प्स के तहत इन बटालियनों को हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन के लिए रखा गया है। श्रीनगर वाले 15 कॉर्प्स और जम्मू के नगरोटा वाले 16 कॉर्प्स में भी इनकी मौजूदगी है, जहां ये लाइन ऑफ कंट्रोल के आसपास एक्टिव रहती हैं।
इसके अलावा वेस्टर्न कमांड के तहत राजस्थान और पाकिस्तान बॉर्डर के रेगिस्तानी इलाकों में भी इनकी तैनाती है। यहां इनका इस्तेमाल डेजर्ट वारफेयर के लिए किया जाता है। कुछ बटालियन को खास नाम भी दिए गए हैं, जैसे “डेजर्ट फाल्कंस”, जो उनके ऑपरेशन एरिया को दिखाता है।
ईस्टर्न कमांड में, यानी उत्तर-पूर्व के पहाड़ी और घने इलाकों में भी भैरव बटालियन तैनात की जा रही हैं। यहां इनका फोकस खासकर एलएसी के आसपास पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्रों में ऑपरेशन करना होता है। इसके अलावा कुछ यूनिट्स साउथ वेस्टर्न कमांड और अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी रखी गई हैं।
भैरव बटालियन को आगे की चौकियों के पास रखा जाता है, ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। इनका मुख्य काम रैपिड रिस्पॉन्स, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना, अचानक कार्रवाई करना और हाइब्रिड वॉरफेयर जैसे ऑपरेशन को संभालना होता है।
16वीं भैरव बटालियन के गठन के साथ अब ऐसी यूनिट्स की संख्या बढ़कर सोलह हो गई है। सेना की योजना है कि ऐसी और बटालियन भी बनाई जाएं, ताकि जरूरत के हिसाब से अलग-अलग इलाकों में इन्हें तैनात किया जा सके।
इन यूनिट्स को देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में रखा जा रहा है, जहां तेजी से प्रतिक्रिया देना जरूरी होता है। इससे सेना की कुल ऑपरेशनल क्षमता में बढ़ोतरी होती है और अलग-अलग तरह के ऑपरेशन करने की क्षमता मजबूत होती है।
क्या है ‘भैरव’ बटालियन
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने भैरव बटालियन को खड़ा किया था, जिसे मॉडर्न वॉरफेयर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भैरव कमांडोज पारंपरिक इन्फैंट्री के घातक और स्पेशल फोर्सेज के बीच की एक कड़ी है। यानी यह यूनिट सामान्य सैनिकों से ज्यादा तेज है, लेकिन पूरी तरह स्पेशल फोर्स जैसी नहीं होती।
इन बटालियनों को “लीन” और “हाई मोबिलिटी” यूनिट कहा जाता है। इनमें सैनिकों की संख्या सीमित रखी जाती है, लेकिन उनकी ट्रेनिंग और मूवमेंट क्षमता बहुत तेज होती है। एक भैरव बटालियन में आम तौर पर करीब 250 के आसपास विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक होते हैं।
क्यों जरूरी हैं भैरव बटालियन
भारतीय सेना में पहले से ही पारंपरिक इन्फैंट्री और स्पेशल फोर्सेज मौजूद हैं, लेकिन बदलते युद्ध के स्वरूप में एक ऐसी फोर्स की जरूरत महसूस की जा रही थी, जो दोनों के बीच की भूमिका निभा सके। भैरव बटालियन इसी जरूरत को पूरा करती है।
आधुनिक युद्ध में अब तेजी, लचीलापन और सटीक जानकारी बहुत अहम हो गई है। ऐसे में छोटी लेकिन प्रशिक्षित यूनिट्स ज्यादा प्रभावी मानी जाती हैं। भैरव बटालियन को इसी सोच के तहत तैयार किया गया है, ताकि सेना के पास ऑपरेशन के लिए ज्यादा विकल्प मौजूद रहें।
स्पेशल फोर्सेज का दबाव कम करने में मदद
भैरव बटालियन का एक और अहम उद्देश्य स्पेशल फोर्सेज पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। पहले कई ऐसे ऑपरेशन होते थे, जिन्हें स्पेशल फोर्सेज को ही अंजाम देना पड़ता था। अब इन बटालियनों के आने से कुछ जिम्मेदारियां इनके पास भी आ गई हैं।
इससे स्पेशल फोर्सेज को अपने खास और बेहद संवेदनशील मिशनों पर फोकस करने में आसानी होती है, जबकि भैरव यूनिट्स तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले ऑपरेशन संभालती हैं।
भैरव बटालियन के सैनिकों का चयन अलग-अलग यूनिट्स से किया जाता है। इनमें इन्फैंट्री के अलावा आर्टिलरी, सिग्नल्स और एयर डिफेंस जैसी शाखाओं के सैनिक भी शामिल हो सकते हैं। चयन के बाद इन्हें विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
इस ट्रेनिंग में स्नो क्राफ्ट, माउंटेन वारफेयर, क्लोज कॉम्बैट और आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसके अलावा इन्हें ऐसे हालात के लिए भी तैयार किया जाता है, जहां कम संसाधनों में काम करना पड़े।

