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India-Russia Strategic Partnership: नई चुनौतियों में भी काम आएगी पुरानी दोस्ती, अब सिर्फ खरीदारी नहीं, साथ मिलकर बनाएंगे हथियार

यह बदलाव भविष्य की कई डिफेंस प्रोजेक्ट्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इनमें अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एयरो-इंजन, समुद्री इंजन, रडार और मिसाइल सिस्टम्स शामिल हैं...

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📍नई दिल्ली | 6 Dec, 2025, 11:26 AM

India-Russia Strategic Partnership: भारत और रूस के छह दशक पुराने रक्षा संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 23वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया। दोनों देशों ने तय किया है कि अब रक्षा सहयोग का नया आधार को-रिसर्च, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन होगा। यह कदम भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता पहल को मजबूती देने के लिए उठाया गया है। दोनों पक्षों ने “स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर सहमति जताई है।

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संयुक्त बयान में कहा गया कि साल 2000 में घोषित स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को इस साल 25 वर्ष पूरे हो गए हैं और दोनों नेताओं ने पारस्परिक विश्वास व राष्ट्रीय हितों के सम्मान का फिर से उल्लेख किया। बयान में दोनों पक्षों ने बताया कि द्विपक्षीय संबंध समय की कसौटी पर खरे रहे हैं और जियोपॉलिटिकल अस्थिरता के बावजूद यह रिश्ता मजबूत बना हुआ है। बयान में दोनों देशों ने सभी स्तरों पर बढ़ते संपर्कों और उच्चस्तरीय दौरों को संतोषजनक बताया। (India-Russia Strategic Partnership)

India-Russia Strategic Partnership: फोकस जॉइंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर

भारत और रूस का रक्षा सहयोग दशकों पुराना है। पहले भारत रूस से हथियार खरीदता था। लेकिन अब यह रिश्ता बदल रहा है। जॉइंट स्टेटमेंट में साफ लिखा है कि भारत की आत्मनिर्भर पहल को देखते हुए अब फोकस जॉइंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट (साथ मिलकर नई टेक्नोलॉजी बनाना), को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन यानी साथ मिलकर हथियार बनाने पर है। (India-Russia Strategic Partnership)

जॉइंट स्टेटमेंट में दोनों देशों के बीच हुई 22वीं इंडिया-रशिया इंटर-गवर्नमेंटल कमिशन ऑन मिलिटरी एंड मिलिटरी-टेक्निकल को-ऑपरेशन (RIGC-M&MTC) बैठक का हवाला देते हुए कहा गया कि भारत में रूसी हथियारों के स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और मेंटेनेंस का प्रोडक्शन होगा। मेक इन इंडिया के तहत यह किया जाएगा। साथ ही, भारतीय सेनाओं की जरूरत पूरी करने के साथ-साथ तीसरे देशों को एक्सपोर्ट भी किया जाएगा। इसके साथ ही जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज इंद्रा जारी रखने पर भी सहमति जताई गई। (India-Russia Strategic Partnership)

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अब सिर्फ खरीदारी नहीं, साथ मिलकर बनाएंगे हथियार

दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत की आत्मनिर्भरता जरूरतों को देखते हुए रक्षा साझेदारी को इस दिशा में बढ़ायाजा रहा है, ताकि एडवांस टेक्नोलॉजी और मॉडर्न डिफेंस सिस्टम्स भारत में ही डेवलप और मैन्युफैक्चर किए जा सकें।

यह बदलाव भविष्य की कई डिफेंस प्रोजेक्ट्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इनमें अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एयरो-इंजन, समुद्री इंजन, रडार और मिसाइल सिस्टम्स शामिल हैं, जिनकी जरूरत आने वाले सालों में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को होगी। रूस के पास इन सेक्टर्स में पहले से ही एडवांस टेक्नोलॉजी है जिनमें एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और पांचवीं पीढ़ी का सुखोई-57 लड़ाकू विमान शामिल हैं। (India-Russia Strategic Partnership)

फिलहाल ब्रह्मोस मिसाइल ही भारत-रूस की सबसे प्रमुख संयुक्त परियोजना है। हालांकि, इसका मूल डिजाइन सोवियत काल के याखोंट मिसाइल से लिया गया था, जिसे भारत ने अपनाकर आगे डेवलप किया है।

करीब दस साल पहले भारत ने रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को संयुक्त रूप से डेवलप करने की परियोजना से खुद को अलग कर लिया था। दो वर्ष पहले दोनों देशों ने भारत में एके-203 राइफल बनाने के लिए जॉइंट प्रोडक्शन शुरू किया, हालांकि इसका डिजाइन रूस में ही डेवलप हुआ था।

भारत में कई रूसी प्लेटफॉर्म जैसे सुखोई-30 एमकेआई, टी-90 टैंक और मिग-21 लाइसेंस के तहत बनाए जाते हैं, लेकिन उनके डिजाइन और महत्वपूर्ण तकनीक अब भी रूस के पास ही है।

मोदी-पुतिन वार्ता में दोनों देशों ने सैन्य सहयोग को और बढ़ाने का फैसला किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रूसी हथियारों के स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता को हल करने के लिए अब भारत में ही इनके जॉइंट प्रोडक्शन पर सहमति बनी है। (India-Russia Strategic Partnership)

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संयुक्त बयान के अनुसार, “दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि रूस में बने हथियारों और उपकरणों के मेंटेनेंस के लिए जरूरी स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और अन्य मैटेरियल्स का उत्पादन भारत में संयुक्त रूप से किया जाएगा।”

यह उत्पादन ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट वेंचर्स के जरिए किया जाएगा। इसके साथ ही, ऐसे उपकरणों को दोस्ताना देशों को निर्यात करने की भी संभावना रहेगी।

वार्ता में भारत–रूस इंटर-गवर्नमेंटल कमीशन ऑन मिलिटरी एंड मिलिटरी टेक्निकल कोऑपरेशन की 22वीं बैठक के नतीजों का भी स्वागत किया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण सहमति बनी थी। (India-Russia Strategic Partnership)

India-Russia Strategic Partnership: यूएनएससी में भारत को सपोर्ट

बयान में आतंकवाद विरोधी सहयोग पर दोनों पक्षों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने हालिया आतंकवादी घटनाओं की कड़ी निंदा की और संयुक्त रूप से यूएन में सूचिबद्ध आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सहयोग बढ़ाने तथा टेररिज्म फाइनेंसिंग और पारंपरिक तथा डिजिटल माध्यमों से रेडिकलाइजेशन को रोकने पर सहमति व्यक्त की।

बहु-पक्षीय मंचों में भी सहयोग पर दोनों ने विचार साझा किया। संयुक्त बयान में जी20, ब्रिक्स, एससीओ और संयुक्त राष्ट्र के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने का संकल्प है। दोनों पक्ष यूएनएससी में सुधार, बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता पर भी सहमत दिखे। रूस ने भारत के यूएनएससी के नियमित सदस्य के रूप में शामिल होने के समर्थन की बात दोहराई। (India-Russia Strategic Partnership)

क्यों है यह समिट इतनी महत्वपूर्ण?

दुनिया में दो खेमे बन रहे हैं– एक अमेरिका का, दूसरा रूस-चीन का। भारत दोनों से अच्छे संबंध रखता है। यह समिट दिखाता है कि भारत अपनी राह खुद बनाता है। डिफेंस में नई पार्टनरशिप से भारत मजबूत बनेगा, रूस को भी सपोर्ट मिलेगा। जियोपॉलिटिक्स में यह संदेश है कि पुरानी दोस्ती नई चुनौतियों में भी काम आएगी। (India-Russia Strategic Partnership)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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