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PoJK Crisis Explained: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन और शटडाउन, रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक सड़कों पर उतरे हजारों लोग

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से आर्थिक समस्याएं, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी लोगों की नाराजगी का कारण बनी हुई हैं। यही वजह है कि इस बार आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं और व्यापारियों ने भी हिस्सा लिया...

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📍नई दिल्ली/मुजफ्फराबाद | 9 Jun, 2026, 8:46 PM

PoJK Crisis Explained: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। रावलाकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, भिंबर, डडयाल, पलंदरी और सुधनोती समेत कई इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की। कई जगहों पर बाजार बंद रहे और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार सोमवार को सुबह से ही विभिन्न शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। कई स्थानों पर लोगों ने मुख्य सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, जबकि कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की भी खबरें सामने आईं। रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में हालात सबसे ज्यादा तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं।

PoJK Crisis Explained: कई शहरों में बंद रहा कारोबार

सूत्रों के मुताबिक विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, कोटली, भिंबर और डडयाल जैसे शहरों में अधिकांश दुकानें बंद रहीं। सार्वजनिक परिवहन भी कई इलाकों में प्रभावित हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से आर्थिक समस्याएं, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी लोगों की नाराजगी का कारण बनी हुई हैं। यही वजह है कि इस बार आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं और व्यापारियों ने भी हिस्सा लिया।

रावलाकोट में सुबह करीब 11 बजे के बाद बड़ी संख्या में लोग मुख्य सड़क पर जमा हो गए। इसके बाद पूरे इलाके में यातायात प्रभावित हो गया। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर नारे लगाए और प्रशासन से जवाब मांगा।

सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं। रावलाकोट की ओर बढ़ रहे समूहों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

कुछ रिपोर्टों में गोलीबारी और पैलेट गन के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। हालांकि विभिन्न स्रोतों में घायल और प्रभावित लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इसलिए स्वतंत्र रूप से इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो सकी है।

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मुजफ्फराबाद के नीलम ब्रिज इलाके से भी टकराव की खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो में अफरा-तफरी जैसे दृश्य दिखाई दिए, हालांकि उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। (PoJK Crisis Explained)

आखिर क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?

आंदोलन की सबसे बड़ी वजह आर्थिक मुद्दों को माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी लंबे समय से बिजली, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को लेकर नाराज हैं।

आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि पीओके क्षेत्र में कई जलविद्युत परियोजनाएं मौजूद हैं। उनका तर्क है कि जब बिजली उत्पादन स्थानीय क्षेत्र में हो रहा है तो वहां के लोगों को सस्ती दरों पर बिजली मिलनी चाहिए।

इसी तरह आटा, चावल और दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारी इन वस्तुओं पर राहत और सब्सिडी की मांग कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार आंदोलनकारियों ने कुल 38 मांगें रखी हैं, जिनमें आर्थिक और राजनीतिक दोनों प्रकार के मुद्दे शामिल हैं।

विधानसभा की 12 सीटों को लेकर भी विवाद

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख राजनीतिक मांगों में पीओके विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों का मुद्दा भी शामिल है।

इन सीटों को उन लोगों के लिए आरक्षित रखा गया है जिन्हें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से बाहर रहने वाले शरणार्थी समुदाय का प्रतिनिधि माना जाता है।

आंदोलन से जुड़े समूहों का कहना है कि जो लोग पीओके में रहते ही नहीं हैं, उन्हें वहां की विधानसभा में प्रतिनिधित्व क्यों दिया जाता है। इसी कारण इन सीटों को समाप्त करने की मांग की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए राजनीतिक प्रभाव कायम रखा जाता है। हालांकि इस विषय पर पाकिस्तान सरकार की ओर से अलग दृष्टिकोण रखा जाता रहा है।

पिछले आंदोलन से जुड़ा है मौजूदा विरोध

वर्तमान प्रदर्शन को पिछले वर्ष हुए आंदोलन की अगली कड़ी माना जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार अक्टूबर 2025 में भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए थे। उस समय भी लोगों ने महंगाई, बिजली दरों और राजनीतिक अधिकारों को लेकर आवाज उठाई थी।

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उस दौरान सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत भी हुई थी। कई मांगों पर सहमति बनने की खबरें सामने आई थीं, लेकिन आंदोलनकारी समूहों का आरोप है कि उन वादों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ।

इसी कारण पिछले कुछ महीनों से लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता रहा और अब एक बार फिर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। (PoJK Crisis Explained)

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की अहम भूमिका

इस आंदोलन के केंद्र में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) नाम का संगठन बताया जा रहा है। यह संगठन पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर अभियान चलाता रहा है। आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को सामने लाना है।

दूसरी ओर प्रशासन ने कुछ मामलों में इस संगठन की गतिविधियों पर आपत्ति जताई है। इसी को लेकर हाल के दिनों में तनाव और बढ़ गया।

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन के खिलाफ की गई कार्रवाई ने भी लोगों के बीच असंतोष को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। (PoJK Crisis Explained)

पलंदरी और सुधनोती में भी दिखा गुस्सा

रावलाकोट और मुजफ्फराबाद के अलावा पलंदरी और सुधनोती में भी बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करते दिखाई दिए।
पलंदरी में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किए गए आंसू गैस के खाली गोले दिखाते हुए विरोध दर्ज कराया।

वहीं सुधनोती में लोगों ने रैलियां निकालीं और प्रशासन से मांगों को स्वीकार करने की अपील की। कई स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे जबकि कुछ इलाकों में तनाव की स्थिति बनी रही। (PoJK Crisis Explained)

आर्थिक संकट बना बड़ी वजह

स्थानीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि वर्तमान आंदोलन की जड़ में आर्थिक संकट एक बड़ा कारण है। महंगाई, रोजगार के सीमित अवसर और बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ गई हैं, और लोगों को गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि उनकी आय और खर्च के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है।

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व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में कारोबार प्रभावित हो रहा है जबकि युवाओं में रोजगार को लेकर चिंता बढ़ रही है। यही कारण है कि आंदोलन केवल राजनीतिक समूहों तक सीमित नहीं रहा बल्कि समाज के अलग-अलग वर्ग इसमें शामिल दिखाई दे रहे हैं। (PoJK Crisis Explained)

पूरे क्षेत्र में बढ़ी सुरक्षा

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रमुख सरकारी इमारतों, प्रशासनिक परिसरों और महत्वपूर्ण मार्गों पर अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं और संचार व्यवस्था को लेकर भी सीमित प्रतिबंधों की खबरें सामने आई हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्थानों पर भिन्न रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने की कोशिश कर रहा है। (PoJK Crisis Explained)

हालात पर बनी हुई है नजर

दिनभर चले प्रदर्शनों के बाद भी कई स्थानों पर लोग सड़कों पर मौजूद रहे। रावलाकोट, कोटली और मुजफ्फराबाद में सबसे ज्यादा भीड़ देखी गई। सूत्रों के अनुसार प्रदर्शनकारी अपनी आर्थिक और राजनीतिक मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है। (PoJK Crisis Explained)

Author

  • साहिल पठान

    साहिल पठान एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों के पत्रकार हैं, जो रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर लिखते हैं। साहिल ने डीडी न्यूज, बीबीसी, न्यूज 24, भारत एक्सप्रेस और टी.ऐ.ऍन्‌. नेटवर्क जैसे कई बड़े मीडिया संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण खबरें और विशेष रिपोर्टें की हैं। वह अक्सर सीमावर्ती इलाकों और सैन्य क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करते हैं, जहां वे भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े मुद्दों को स्पष्टता, जिम्मेदारी और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

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साहिल पठान एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों के पत्रकार हैं, जो रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर लिखते हैं। साहिल ने डीडी न्यूज, बीबीसी, न्यूज 24, भारत एक्सप्रेस और टी.ऐ.ऍन्‌. नेटवर्क जैसे कई बड़े मीडिया संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण खबरें और विशेष रिपोर्टें की हैं। वह अक्सर सीमावर्ती इलाकों और सैन्य क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करते हैं, जहां वे भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े मुद्दों को स्पष्टता, जिम्मेदारी और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

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