HomeIndian Armyभारतीय सेना को मिलेंगी 300 नई K9 वज्र तोपें? 23,000 करोड़ की...

भारतीय सेना को मिलेंगी 300 नई K9 वज्र तोपें? 23,000 करोड़ की मेगा डील पर बड़ा फैसला जल्द

के9 वज्र-टी एक आधुनिक सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोप है। यह दक्षिण कोरिया की प्रसिद्ध के9 थंडर सिस्टम्स का भारतीय वर्जन संस्करण है, जिसे भारतीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 9 Jun, 2026, 9:59 PM

300 K9 Vajra Deal: भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए 300 से अधिक अतिरिक्त के9 वज्र-टी स्व-चालित तोपों (सेल्फ प्रोपेल्ड) की खरीद के लिए सरकार की मंजूरी लेने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित सौदे की कीमत लगभग 23,000 करोड़ रुपये है।

सूत्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव जल्द ही डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड के सामने रखा जा सकता है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो इन तोपों का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) द्वारा किया जाएगा, जो दक्षिण कोरिया की हनव्हा टेकविन के सहयोग से भारत में के9 वज्र का प्रोडक्शन करती है।

सूत्रों का कहना है कि यह पिछले कई दशकों में भारतीय सेना की सबसे बड़ी आर्टिलरी खरीद में से एक हो सकती है। इस सौदे के बाद भारतीय सेना के लिए बनने वाली के9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से भी अधिक हो जाएगी।

बता दें कि रक्षा समाचार ने 20 अप्रैल को बताया था कि के9 वज्र-टी के तीसरे फेज को लेकर बातचीत चल रही है।

300 K9 Vajra Deal: क्या है के-9 वज्र-टी?

के9 वज्र-टी एक आधुनिक सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोप है। यह दक्षिण कोरिया की प्रसिद्ध के9 थंडर सिस्टम्स का भारतीय वर्जन संस्करण है, जिसे भारतीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है।

यह 155 मिलीमीटर और 52 कैलिबर की तोप है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे किसी ट्रक से खींचने की जरूरत नहीं होती। यह खुद अपने ट्रैक पर चल सकती है और तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच सकती है। यह शूट एंड स्कूट रणनीति में माहिर है और डेजर्ट व हाई-ऑल्टीट्यूड दोनों इलाकों में कारगर साबित हुई है।

युद्ध में ऐसी तोपों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि वे फायरिंग करने के बाद तुरंत अपनी स्थिति बदल सकती हैं। इससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचना आसान हो जाता है। (300 K9 Vajra Deal)

40 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार

के9 वज्र की मारक क्षमता इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह सामान्य गोला-बारूद के साथ 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक टारगेट को निशाना बना सकती है।

विशेष प्रकार के लॉन्ग रेंज दूरी वाले गोले और रॉकेट असिस्टेड गोला-बारूद के साथ इसकी रेंज लगभग 50 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। यह दुश्मन के ठिकानों, कमांड पोस्ट, गोला-बारूद भंडार और सैन्य जमावड़े को काफी दूर से निशाना बना सकती है। (300 K9 Vajra Deal)

यह भी पढ़ें:  होर्मुज से गाजा तक बारूदी सुरंगों ने कैसे पूरी दुनिया को खतरे में डाला, दशकों तक ‘साइलेंट किलर’ बने रहते हैं डबल एज्ड वेपंस

कुछ सेकंड में कई गोले दागने की क्षमता

के9 वज्र को तेज फायरिंग के लिए डिजाइन किया गया है। यह मात्र 15 सेकंड में तीन गोले दाग सकती है। शुरुआती चरण में यह प्रति मिनट छह से आठ गोले तक दागने में सक्षम है। लंबे समय तक ऑपरेशन के दौरान भी यह लगातार दो से तीन गोले प्रति मिनट फायर कर सकती है।

इसमें मल्टीपल राउंड सिमल्टेनियस इम्पैक्ट तकनीक भी मौजूद है। इसका मतलब यह है कि अलग-अलग कोणों से छोड़े गए कई गोले एक ही समय पर लक्ष्य पर गिर सकते हैं। इस तकनीक से दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय नहीं मिल पाता।

रेगिस्तान से लेकर लद्दाख तक शानदार प्रदर्शन

भारतीय सेना ने के9 वज्र को केवल रेगिस्तानी इलाकों के लिए नहीं अपनाया है। शुरुआत में इन तोपों को पश्चिमी सीमा के रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किया गया था। बाद में चीन के साथ सीमा पर बढ़े तनाव के दौरान इन्हें लद्दाख में भी तैनात किया गया।

सूत्रों के अनुसार लद्दाख के कठिन मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों में इन तोपों का विशेष परीक्षण किया गया था। वहां इसके इंजन, सस्पेंशन और अन्य प्रणालियों का प्रदर्शन शानदार रहा। यही वजह है कि अब सेना इनकी संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है। (300 K9 Vajra Deal)

300 K9 Vajra Deal
K9 Vajra self-propelled howitzers. (Image Source: PM Modi X Account)

पीएम मोदी ने की थी के9 वज्र की सवारी

19 जनवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सूरत के पास हजीरा स्थित एल एंड टी के आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लैक्स का उद्घाटन किया था। यह भारत का पहला प्राइवेट सेक्टर प्लांट था, जहां के9 वज्र का उत्पादन शुरू हुआ।

उसके बाद उन्होंने हाल ही में 6 जून को फिर हजीरा प्लांट का दौरा किया। जहां उन्होंने जोरावर लाइट टैंक, के9 वज्र और अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का जायजा लिया। इस यात्रा में उन्होंने एल एंड टी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ में भूमिका की सराहना की। इस मौके पर पीएम मोदी ने खुद के9 वज्र पर सवार होकर इसकी मोबिलिटी और ताकत का अनुभव लिया।

इस साल अप्रैल में शुरू हुई थी बातचीत

20 अप्रैल को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के दौरान के9 वज्र-टी स्व-चालित हॉवित्जर को लेकर बातचीत हुई थी। दोनों देशों ने के9 वज्र प्रोजेक्ट को अगले चरण में ले जाने, स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और एडवांस टेक्नोलॉजी के हस्तांतरण पर विस्तार से बातचीत की थी। इसके अलावा के9 वज्र-टी तोपों को और आधुनिक बनाने के लिए नई तकनीक लगाने की योजना को लेकर भी चर्चा हुई थी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से काम करेगी।

यह भी पढ़ें:  OPERATION SHIVA 2025: अमरनाथ यात्रा में यात्रियों को न हो कोई दिक्कत इसके लिए भारतीय सेना ने शुरू किया ये खास ऑपरेशन, कोई भी दुस्साहस आतंकियों को पड़ेगा भारी

इस अपग्रेड में रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम (आरसीडब्ल्यूएस) शामिल होगा, जो अपने आप ड्रोन को पहचान सकता है, उनका पीछा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें निशाना बना सकता है।

इसके साथ ही इनमें जैमर और खास सेंसर भी जोड़े जाएंगे, जिससे ये दुश्मन के ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से बेहतर तरीके से निपट सकें। ऐसी सुविधाएं के9 के नए वर्जन, जैसे के9ए2 और के9ए3 में पहले से मौजूद हैं। (300 K9 Vajra Deal)

300 K9 Vajra Deal
K9 Vajra self-propelled howitzers. (Image Source: PM Modi X Account)

2017 में मिला था पहला ऑर्डर

के9 वज्र की कहानी भारत में साल 2017 से शुरू हुई। उस समय भारतीय सेना ने 100 तोपों के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का पहला कॉन्ट्रैक्ट किया था। इस परियोजना की जिम्मेदारी एलएंडटी को दी गई थी। कंपनी ने गुजरात के हजीरा स्थित अपने आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स में इन तोपों का उत्पादन शुरू किया।

इन 100 तोपों की डिलीवरी तय समय से पहले पूरी कर दी गई थी। साल 2021 तक सभी तोपें सेना को सौंप दी गई थीं।

पहले अनुबंध के बाद सेना ने इन तोपों के प्रदर्शन की समीक्षा की। रक्षा सूत्रों के अनुसार सेना के9 वज्र के प्रदर्शन से संतुष्ट रही। इसके बाद 2023-24 में दूसरा लगभग 7,600 करोड़ रुपये की लागत से 100 और तोपों का अतिरिक्त ऑर्डर दिया गया। अब तीसरी बार 23,000 करोड़ रूपये की तीसरी डील में 300 से अधिक नई तोपों की खरीद का प्रस्ताव सामने आया है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो के9 वज्र भारतीय सेना की सबसे बड़ी सेल्फ प्रोपेल्ड गन सिस्टम बन जाएगी।

स्वदेशीकरण बढ़ाने पर फोकस 

के9 वज्र परियोजना की एक खास बात इसका बढ़ता स्वदेशीकरण है। पहले बैच के दौरान कई प्रमुख पुर्जे विदेश से आते थे। लेकिन धीरे-धीरे भारत में निर्माण बढ़ाया गया। रक्षा उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब इस प्लेटफॉर्म में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें:  Rajnath Singh at CCC 2025: कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस बोले रक्षा मंत्री- अदृश्य खतरों के लिए तैयार रहें सेना, युद्ध में जीत के लिए JAI है जरूरी

इसमें भारतीय उद्योग, छोटे और मध्यम उद्यमों तथा विभिन्न सप्लाई चेन कंपनियों की भी भागीदारी बढ़ी है। (300 K9 Vajra Deal)

दो मोर्चों की चुनौती के बीच बढ़ रही जरूरत

भारतीय सेना को एक साथ पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर तैयार रहना पड़ता है। पश्चिम में पाकिस्तान सीमा और उत्तर में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति को देखते हुए सेना लंबी दूरी की फायरपावर बढ़ाने पर जोर दे रही है।

सूत्रों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में केवल सैनिकों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली तोपें और सटीक मार करने वाले हथियार भी उतने ही जरूरी होते हैं। वहीं, के9 वज्र इसी जरूरत को पूरा करती है।

पुरानी तोपों की जगह ले रही नई प्रणाली

भारतीय सेना लंबे समय से अपनी आर्टिलरी को आधुनिक बनाने की प्रक्रिया में लगी हुई है। कई दशक पुरानी 105 मिलीमीटर और 130 मिलीमीटर तोपों को धीरे-धीरे नई 155 मिलीमीटर वाली गनों से बदला जा रहा है।

इस अभियान के तहत धनुष तोप, एटीएजीएस, एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर और पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम भी शामिल की गई हैं।

सामान्य तोपों की तुलना में के9 वज्र में क्रू बेहतर सुरक्षा के भीतर काम करता है। इसमें विशेष कवच सुरक्षा, न्यूक्लियर-बायोलॉजिकल-केमिकल सुरक्षा प्रणाली और आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम लगे हुए हैं। युद्ध के दौरान चालक दल को खुले क्षेत्र में काम नहीं करना पड़ता, जिससे उनकी सुरक्षा बढ़ जाती है। (300 K9 Vajra Deal)

Author

  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular