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Explainer: क्या हैं इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर ब्रिगेड्स और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर यूनिट्स? समझें भारतीय सेना के सबसे बड़े बदलाव का पूरा प्लान

फिलहाल सेना में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की जिम्मेदारी विशेष सिग्नल यूनिट्स संभालती हैं। लेकिन नई ईडब्ल्यू ब्रिगेड बनने के बाद मौजूदा उपकरणों और संसाधनों को एक साथ जोड़कर अधिक प्रभावी तरीके से काम किया जाएगा...

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📍नई दिल्ली | 10 Jun, 2026, 11:47 AM

Indian Army EW Brigades: भारतीय सेना एक ऐसे बदलाव के दौर से गुजर रही है जिसे पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी मिलिट्री रिस्ट्रक्चरिंग माना जा रहा है। यह बदलाव सिर्फ नई बंदूकें, मिसाइलें या ड्रोन खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि सेना के पूरे स्ट्रक्चर, युद्ध लड़ने के तरीके और फैसले लेने की प्रक्रिया को बदलने से जुड़ा हुआ है। सेना अब ऐसी ताकत बनाना चाहती है जो किसी भी मोर्चे पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सके, कम समय में हमला या जवाबी कार्रवाई शुरू कर सके और एक साथ कई क्षेत्रों में लड़ाई लड़ने की क्षमता रखे।

रक्षा सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध की सोच से आगे बढ़कर मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस की दिशा में काम कर रही है। सेना का मानना है कि भविष्य का युद्ध केवल जमीन पर सैनिकों के बीच नहीं होगा, बल्कि साइबर स्पेस, सैटेलाइट नेटवर्क, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम और सूचना के मोर्चे पर भी लड़ा जाएगा।

इसी बड़े परिवर्तन के तहत सेना इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी आईबीजी को लागू करने जा रही है। इसके साथ ही विशेष इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर ब्रिगेड्स बनाई जा रही हैं, जो दुश्मन के रडार, कम्युनिकेशन नेटवर्क और ड्रोन सिस्टम को युद्ध शुरू होने से पहले ही निष्क्रिय करने की क्षमता रखेंगी।

Indian Army EW Brigades: क्या है इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप?

भारतीय सेना लंबे समय तक डिवीजन और कोर बेस्ड स्ट्रक्चर पर काम करती रही है। इस व्यवस्था में किसी बड़े ऑपरेशन के लिए अलग-अलग ब्रांचों को एक साथ लाना पड़ता था। इसमें समय लगता था और कई बार कॉर्डिनेशन की चुनौती भी सामने आती थी। इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप इसका जवाब है।

आईबीजी एक ऐस कॉम्बैट स्ट्रक्चर है जिसमें युद्ध के लिए जरूरी लगभग सभी संसाधन पहले से शामिल रहते हैं। इसमें इन्फैंट्री, आर्टिलरी, इंजीनियरिंग, एयर डिफेंस, ड्रोन यूनिट, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर टीम, लॉजिस्टिक्स, फील्ड हॉस्पिटल और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था एक ही कमांड के तहत काम करती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि आईबीजी में अलग-अलग ब्रिगेड कमांडर नहीं होते। बल्कि मेजर जनरल रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में यह सीधे ऑपरेट करता है। इसका उद्देश्य युद्ध की शुरुआत में ही तेज प्रतिक्रिया देना, लॉजिस्टिकल देरी को कम करना और बहु-क्षेत्रीय (मल्टी-डोमेन) युद्ध के लिए तैयार रहना है।

करीब पांच हजार सैनिकों वाला यह स्ट्रक्चर पारंपरिक ब्रिगेड से बड़ा लेकिन डिवीजन से छोटा होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि युद्ध या संकट की स्थिति में इसे तुरंत तैनात किया जा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि आईबीजी को इस तरह तैयार किया गया है कि वह बिना किसी अतिरिक्त मदद के सीमित समय तक खुद से सैन्य अभियान चला सके। (Indian Army EW Brigades)

जनरल बिपिन रावत की सोच अब जमीन पर उतर रही

आईबीजी का कॉन्सैप्ट पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के कार्यकाल में सामने आया था। उन्होंने सेना के स्ट्रक्चर को अधिक चुस्त और टेक्नोलॉजी बेस्ड बनाने के लिए व्यापक अध्ययन शुरू कराया था।

उस समय सेना के सामने दो बड़ी चुनौतियां थीं। पहली, चीन के साथ उत्तरी सीमा पर बढ़ता तनाव और दूसरी, पाकिस्तान के साथ पश्चिमी मोर्चे पर लगातार सुरक्षा चुनौतियां।

इन परिस्थितियों में सेना को ऐसे स्ट्रक्चर की जरूरत महसूस हुई जो पारंपरिक व्यवस्था की तुलना में तेजी से कार्रवाई कर सके। इसी सोच से आईबीजी मॉडल का कॉन्सैप्ट सामने आया। (Indian Army EW Brigades)

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कई साल तक चले ट्रायल

आईबीजी को सीधे लागू नहीं किया गया। पहले इसे कई चरणों में परखा गया। साल 2019 में पश्चिमी सीमा पर स्थित 9 कोर यानी राइजिंग स्टार कॉर्प्स को ट्रायल एरिया बनाया गया। इसके बाद 2019 में ही पूर्वी क्षेत्र में हिम विजय अभ्यास के दौरान इस मॉडल को पहाड़ी युद्ध के लिए परखा गया। इसमें माउंटेन स्ट्राइक कोर (17 कोर) ने इसमें भाग लिया।

इन अभ्यासों में यह देखा गया कि कठिन भूगोल, ऊंचाई वाले क्षेत्रों और आधुनिक तकनीक से लैस दुश्मन के खिलाफ आईबीजी कितना प्रभावी साबित हो सकता है।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि परीक्षणों के दौरान आईबीजी ने तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और कम लॉजिस्टिक देरी जैसी खूबियां दिखाई। इसके बाद सेना ने इस मॉडल को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक बाद के वर्षों में ड्रोन, रियल टाइम डेटा शेयरिंग और आधुनिक कम्युनिकेशंस सिस्टम्स को भी इसमें जोड़ा गया।

सबसे पहले बदलेगा माउंटेन स्ट्राइक कोर

जनवरी 2026 में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने संकेत दिया था कि आईबीजी प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। सबसे पहले चीन सीमा की जिम्मेदारी संभालने वाले 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर को आईबीजी में बदला जाएगा। इस कोर की दो डिवीजनों (59 डिवीजन और 23 डिवीजन) से चार आईबीजी बनाए जाएंगे। प्रत्येक आईबीजी स्वतंत्र रूप से आक्रामक और रक्षात्मक दोनों ऑपरेशंस कर सकेगा।

यह प्रक्रिया 2027 के मध्य तक पूरी करने का लक्ष्य है। इसके बाद मथुरा स्थित 1 कोर, अंबाला स्थित 2 कोर और भोपाल स्थित 21 कोर जैसे अन्य स्ट्राइक कोर का भी पुनर्गठन किया जाएगा।

यह कोर चीन सीमा पर आक्रामक क्षमता बनाए रखने के लिए तैयार किया गया था। इसके अंतर्गत आने वाली डिवीजनों को पुनर्गठित करके चार आईबीजी बनाए जाएंगे।

रक्षा सूत्रों के अनुसार ये आईबीजी पहाड़ी इलाकों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। इनमें हल्के लेकिन हाईली मोबाइल वेपंस, ड्रोन नेटवर्क, एयर मोबिलिटी और विशेष लॉजिस्टिक की व्यवस्था शामिल होगी।

सेना का कहना है कि इस बदलाव का मकसद केवल सैनिकों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि ऐसी सैन्य ताकत तैयार करना है जो किसी भी स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दे सके। (Indian Army EW Brigades)

थिएटर कमांड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

आईबीजी को केवल एक नई मिलिट्री यूनिट के तौर पर नहीं देखा जा रहा। यह प्रस्तावित थिएटर कमांड सिस्टम की आधारशिला भी है।

भारत भविष्य में अपनी सैन्य ताकत को उत्तर, पश्चिम और समुद्री थिएटर कमांड में संगठित करना चाहता है। इन कमांडों के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के संसाधनों का संयुक्त इस्तेमाल होगा।

सूत्रों का कहना है कि आईबीजी भविष्य के थिएटर कमांड मॉडल की सबसे छोटी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल यूनिट होगी।

क्यों बनाई जा रही हैं EW Brigades?

चीन और पाकिस्तान लगातार अपनी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं। वे दुश्मन के संचार नेटवर्क को जाम कर सकते हैं, गलत सिग्नल भेजकर भ्रम पैदा कर सकते हैं और साइबर हमलों के साथ इलेक्ट्रॉनिक हमले भी कर सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने विशेष ईडब्ल्यू ब्रिगेड बनाने का फैसला किया है।

फिलहाल सेना में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की जिम्मेदारी विशेष सिग्नल यूनिट्स संभालती हैं। लेकिन नई ईडब्ल्यू ब्रिगेड बनने के बाद मौजूदा उपकरणों और संसाधनों को एक साथ जोड़कर अधिक प्रभावी तरीके से काम किया जाएगा। इनका काम दुश्मन के संचार नेटवर्क को पकड़ना, उसकी गतिविधियों पर नजर रखना, रेडियो सिग्नलों को बाधित करना और ड्रोन तथा रडार सिस्टम को जाम करना होगा।

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आज हर मिलिट्री सिस्टम किसी न किसी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल छोड़ता है। लड़ाकू विमान, मिसाइल, टैंक, रडार, ड्रोन और कम्युनिकेशन नेटवर्क लगातार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का उपयोग करते हैं।

ईडब्ल्यू ब्रिगेड दुश्मन के ड्रोन और हवाई खतरों की जानकारी तुरंत आर्टिलरी और एयर डिफेंस यूनिट्स तक पहुंचाएंगी, जिससे उन टारगेट्स को तेजी से निशाना बनाया जा सकेगा।

यही कारण है कि इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर आधुनिक युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

भारतीय सेना ने अब विशेष ईडब्ल्यू यानी इलैक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ब्रिगेड्स बनाने का फैसला किया है। इनका मुख्य काम दुश्मन के रडार, संचार नेटवर्क, ड्रोन और डेटा लिंक को पहचानना, ट्रैक करना और जरूरत पड़ने पर जाम करना होगा।

ये नई ब्रिगेड रुद्र ब्रिगेड्स का हिस्सा होंगी। रुद्र ब्रिगेड्स ऐसी आधुनिक मिलिट्री युनिट्स हैं जिनमें इन्फैंट्री, आर्मर्ड व्हीकल्स, आर्टिलरी, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और लॉजिस्टिक को एक साथ जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य युद्ध के दौरान सभी क्षमताओं को एक ही कमांड के तहत उपलब्ध कराना है। (Indian Army EW Brigades)

गोली चलने से पहले दुश्मन को अंधा करने की तैयारी

ईडब्ल्यू ब्रिगेड्स यह भी सुनिश्चित करेंगी कि भारतीय सेना का अपना संचार नेटवर्क सुरक्षित और सुचारु रूप से काम करता रहे। इनका काम दुश्मन की “आंख और कान” को कमजोर करना और सेना के इनफॉरमेशन सिस्टम को सुरक्षित रखना होगा।

रक्षा सूत्रों के अनुसार नई ईडब्ल्यू ब्रिगेड्स को पाकिस्तान और चीन सीमा के अलग-अलग सेक्टरों में तैनात किया जाएगा। इनका उद्देश्य युद्ध शुरू होने से पहले दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक गतिविधियों का नक्शा तैयार करना होगा।

युद्ध की स्थिति में यही ब्रिगेड्स दुश्मन के रडार नेटवर्क को ब्लॉक कर सकती हैं, कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम कर सकती हैं और ड्रोन कंट्रोल लिंक को प्रभावित कर सकती हैं। ईडब्ल्यू ब्रिगेड्स में एडवांस्ड जेमर्स, डायरेक्शन फाइंडर्स और सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) सिस्टम होंगे।

सूत्रों ने बताया कि आधुनिक युद्ध में कई बार जीत उस पक्ष की होती है जो दुश्मन को पहले देख ले और खुद दिखाई न दे। ईडब्ल्यू ब्रिगेड्स इसी सिद्धांत पर काम करेंगी। (Indian Army EW Brigades)

ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक

रक्षा सूत्रों का कहना है कि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने अपनी टेक्निकल स्ट्रक्चर की व्यापक समीक्षा की थी। उस समीक्षा में यह सामने आया कि भविष्य के संघर्षों में ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और डेटा आधारित युद्ध की भूमिका और बढ़ेगी। इसी के बाद नई टेक्नोलॉजी बेस्ड मिलिट्री स्ट्रक्चर्स को तेजी से आगे बढ़ाया गया।

करगिल विजय दिवस 2025 के अवसर पर सेना प्रमुख ने रुद्र ब्रिगेड्स, 30 से अधिक भैरव कमांडो बटालियनों, ड्रोन संचालन के लिए शक्तिबाण रेजिमेंट्स और दिव्यास्त्र बैटरियों के गठन को मंजूरी दी थी। नई इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर ब्रिगेड्स इसी सैन्य आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा हैं और सेना की तकनीकी क्षमता को और मजबूत करेंगी।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और डीआरडीओ की बड़ी भूमिका

सेना की नई इलेक्ट्रॉनिक क्षमता को मजबूत करने में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और डीआरडीओ की महत्वपूर्ण भूमिका है।

रक्षा मंत्रालय भी इस योजना को नई टेक्नोलॉजी के जरिए सपोर्ट कर रहा है। अक्टूबर 2025 में धाराशक्ति इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 5,150 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। यह सिस्टम डीआरडीओ ने डेवलप किया है और इसका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), एलएंडटी और अन्य भारतीय कंपनियां कर रही हैं।

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इन सिस्टम्स को इस तरह डेवलप किया गया है कि वे दुश्मन के ड्रोन, रडार और संचार नेटवर्क की पहचान कर सकें तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय भी कर सकें।

इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ 1,476 करोड़ रुपये का समझौता किया है। इसके तहत आधुनिक मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम खरीदे जा रहे हैं। ये सिस्टम संभव, सम्युक्त और हिमशक्ति जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों के तहत विकसित किए जा रहे हैं।

सितंबर 2025 में सेना और वायुसेना के संयुक्त अभ्यास के दौरान इस सिस्टम ने लगभग 150 किलोमीटर दूरी पर दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करने की क्षमता दिखाई थी। यह सिस्टम खतरे का तुरंत विश्लेषण कर जामिंग भी कर सकता है।

इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने बीईएल के साथ 1,476 करोड़ रुपये का समझौता भी किया है। इसके तहत पांच आधुनिक मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम खरीदे जाएंगे। ये सिस्टम कठिन इलाकों में आगे बढ़ रही सेना के साथ चल सकते हैं और चीन सीमा तथा पश्चिमी मोर्चे पर तैनात किए जाएंगे। (Indian Army EW Brigades)

इनफॉरमेशन वॉरफेयर भी बन गया नया मोर्चा

भारतीय सेना केवल इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तक सीमित नहीं रहना चाहती। अब सूचना युद्ध भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। आज सोशल मीडिया, फेक न्यूज, साइबर हमले और मनोवैज्ञानिक अभियान किसी भी संघर्ष का हिस्सा बन चुके हैं।

इसीलिए सेना ने विशेष इंफॉर्मेशन वारफेयर संगठन तैयार किया है। यह संगठन साइबर एक्सपर्ट्स, साइकोलॉजिकल आपरेशंस यूनिट्स, और स्ट्रेटेजिक कम्यूनिकेशन यूनिट्स को एक प्लेटफार्म पर लाता है।

इसके अलावा एक ट्राई-सर्विस इंफॉर्मेशन वारफेयर यूनिट भी बनाई जा रही है। यह यूनिट थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करेगी। यह संगठन इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) मुख्यालय के तहत काम करेगा और तीनों सेनाओं के सूचना एवं साइबर अभियानों को एक साथ चलाने में मदद करेगा।

इसका उद्देश्य दुश्मन द्वारा फैलाए जाने वाले भ्रामक प्रचार का मुकाबला करना और सही सूचना को तेजी से आगे पहुंचाना है।

एआई, ड्रोन और डेटा बनेंगे नई ताकत

सेना ने साल 2026 को नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष घोषित किया है। इसका उद्देश्य विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्मों को एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है। ड्रोन, रडार, सेंसर, निगरानी प्रणाली और अग्रिम चौकियों से आने वाली जानकारी एक ही नेटवर्क पर उपलब्ध होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड सिस्टम इस डेटा का विश्लेषण करेगी और कमांडरों को तेजी से फैसले लेने में मदद देगी। (Indian Army EW Brigades)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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