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भारतीय सेना की बढ़ेगी ताकत! रेगिस्तान से लद्दाख तक दम दिखाने वाली के9 वज्र की नई डील पर दक्षिण कोरिया से बातचीत

के9 वज्र दरअसल दक्षिण कोरिया के के9 थंडर का भारतीय वर्जन है, जिसे भारत में के9 वज्र-टी नाम से जाना जाता है। यह एक 155एमएम/52-कैलिबर ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर है, जिसे लार्सन एंड टुब्रो कंपनी गुजरात के हजीरा प्लांट में बनाती है...

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📍नई दिल्ली | 20 Apr, 2026, 11:11 PM

India South Korea K9 Vajra Deal: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग को लेकर बड़ी बातचीत हुई है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत को अब तक दो फेज में के9 वज्र की सप्लाई हो चुकी है, जबकि तीसरे फेज पर बातचीत जारी है। इस नए चरण में सिर्फ सिस्टम खरीदने के बजाय ज्यादा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर दिया जा रहा है, ताकि इन प्लेटफॉर्म्स के निर्माण और तकनीक से जुड़ा काम भारत में ही आगे बढ़ाया जा सके।

India South Korea K9 Vajra Deal: के9 वज्र और एयर डिफेंस पर बड़ा बयान

विदेश मंत्रालय के सचिव पी. कुमारन ने इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को एक अहम जानकारी साझा की। बताया गया कि दक्षिण कोरिया भारत को पहले ही के9 वज्र और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम्स के दो फेज में सप्लाई कर चुका है।

अब तीसरे फेज को लेकर बातचीत चल रही है, जिसमें पहले से ज्यादा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि सिर्फ सिस्टम खरीदने के बजाय अब उनके डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक को भारत में विकसित करने पर जोर रहेगा।

इसके साथ ही और ज्यादा गन सिस्टम्स और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम्स को लेकर भी चर्चा हो रही है। वहीं दोनों देश एयर डिफेंस को मजबूत करने के लिए नए विकल्पों पर काम कर रहे हैं। (India South Korea K9 Vajra Deal)

के9 वज्र क्या है और क्यों अहम है

के9 वज्र दरअसल दक्षिण कोरिया के के9 थंडर का भारतीय वर्जन है, जिसे भारत में के9 वज्र-टी नाम से जाना जाता है। यह एक 155एमएम/52-कैलिबर ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर है, जिसे लार्सन एंड टुब्रो कंपनी गुजरात के हजीरा प्लांट में बनाती है। जिसमें दक्षिण कोरिया की कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है।

यह तोप करीब 50 किलोमीटर तक मार कर सकती है। इसकी खास बात यह है कि यह बहुत तेजी से फायर कर सकती है। शुरुआत में कुछ ही सेकंड में लगातार तीन गोल दाग सकती है और बाद में हर मिनट कई राउंड फायर कर सकती है। इसमें हाई मोबिलिटी और डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगा होता है, जिससे निशाना ज्यादा सटीक लगता है। यह भारी होने के बावजूद शूट एंड स्काउट खूबी की वजह से तेजी से अपनी जगह बदल सकती है। के9 वज्र को अलग-अलग तरह के इलाकों, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में भी काम करने के लिए बनाया गया है।

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शुरुआत में भारतीय सेना ने इस तोप को राजस्थान और पंजाब के रेगिस्तानी और खुले मैदानी इलाकों में इस्तेमाल के लिए शामिल किया था। लेकिन बाद में लद्दाख में चीन के साथ तनाव बढ़ने के बाद इसे बेहद ठंडे और ऊंचाई वाले इलाकों में भी तैनात किया गया। माइनस 20 डिग्री तक की बर्फीली परिस्थितियों में भी इसने बिना किसी दिक्कत के काम किया और वहां अपनी क्षमता साबित की।

के9 वज्र-टी को अपग्रेड करने की योजना

इसके अलावा भारतीय सेना अपनी के9 वज्र-टी तोपों को और आधुनिक बनाने की योजना बना रही है। इसके तहत इनमें ऐसी नई तकनीक लगाई जाएगी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से काम करेगी।

इस अपग्रेड में रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम (आरसीडब्ल्यूएस) शामिल होगा, जो अपने आप ड्रोन को पहचान सकता है, उनका पीछा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें निशाना बना सकता है।

इसके साथ ही इनमें जैमर और खास सेंसर भी जोड़े जाएंगे, जिससे ये दुश्मन के ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से बेहतर तरीके से निपट सकें। ऐसी सुविधाएं के9 के नए वर्जन, जैसे के9ए2 और के9ए3 में पहले से मौजूद हैं। (India South Korea K9 Vajra Deal)

कब साइन हुआ पहला कॉन्ट्रैक्ट

के9 वज्र का पहला कॉन्ट्रैक्ट 2017 में हुआ था। उस समय भारतीय सेना के लिए 4,875 करोड़ (646 मिलियन डॉलर) की लागत के साथ 100 के9 वज्र तोपों का ऑर्डर दिया गया था। इस डील में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी शामिल थी, जिसके बाद भारत में ही इसका निर्माण शुरू हुआ। उस समय इसमें आधे से ज्यादा हिस्से भारत में ही बनने लगे थे। इन तोपों की डिलीवरी तय समय से पहले पूरी कर ली गई और 2020-21 से सेना को मिलनी शुरू हो गई।

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इसके बाद दूसरा फेज दिसंबर 2024 में शुरू हुआ। इसमें फिर से बड़ी संख्या में के9 वज्र सिस्टम के लिए लार्सन एंड टुब्रो को ऑर्डर दिया गया। इस डील की लागत लगभग 7,600 करोड़ (895-900 मिलियन डॉलर) थी। इस बार लोकल मैन्युफैक्चरिंग को और बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि ज्यादा से ज्यादा काम भारत में ही हो सके। इस फेज में भी दक्षिण कोरिया की कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस और भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के बीच समझौता हुआ, जिसमें अतिरिक्त पार्ट्स और सिस्टम्स की सप्लाई शामिल रही।

समुद्री और इंडस्ट्री सेक्टर में बढ़ा सहयोग

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के इस दौरे के दौरान समुद्री क्षेत्र में भी बड़ा समझौता हुआ। भारत और दक्षिण कोरिया ने शिपबिल्डिंग, शिपिंग और मैरिटाइम लॉजिस्टिक्स के लिए एक कॉम्प्रिहेंसिव फ्रेमवर्क तैयार किया है।

इसका मकसद समुद्री व्यापार को मजबूत करना और सप्लाई चेन को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही पोर्ट्स के विकास को लेकर भी एक एमओयू साइन किया गया है, जिससे बंदरगाहों के इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनेजमेंट में सहयोग बढ़ेगा।

इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन के लिए एक नई कमेटी बनाने का फैसला भी हुआ है। इससे दोनों देशों की कंपनियों के बीच तालमेल बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। स्टील सप्लाई चेन से जुड़े टेक्नोलॉजी और ट्रेड पर भी समझौता हुआ है। (India South Korea K9 Vajra Deal)

डिजिटल और फाइनेंशियल सेक्टर में नई पहल

डिजिटल सेक्टर में ‘इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ की शुरुआत करने का फैसला लिया गया है। इसका उद्देश्य टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है।

फाइनेंशियल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। भारत की एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और कोरिया की फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशंस संस्था के बीच समझौता हुआ है, जिससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

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इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में रेगुलेटरी संस्थाओं के बीच भी सहयोग पर सहमति बनी है। (India South Korea K9 Vajra Deal)

क्लाइमेट, एनर्जी और साइंस पर जोर

दोनों देशों ने क्लाइमेट और एनवायरमेंट से जुड़े मुद्दों पर भी समझौते किए हैं। पेरिस एग्रीमेंट के तहत सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।

एनर्जी रिसोर्स सिक्योरिटी पर भी जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया गया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

साइंस एंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला हुआ है, जिसमें रिसर्च और नई टेक्नोलॉजी के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। (India South Korea K9 Vajra Deal)

इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने का एलान

इस दौरान दोनों देशों ने इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने की घोषणा की। इसके जरिए वैश्विक सप्लाई चेन और आर्थिक मुद्दों पर बातचीत होगी।

विदेश मंत्रालयों के बीच ग्लोबल मुद्दों पर नई बातचीत शुरू करने का भी फैसला लिया गया है, जिसमें क्लाइमेट चेंज, आर्कटिक और मैरिटाइम सहयोग शामिल हैं।

दक्षिण कोरिया ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में शामिल होने का फैसला किया है। साथ ही कोरिया इंटरनेशनल सोलर एलायंस में जुड़ेगा, जबकि भारत ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट का हिस्सा बनेगा।

दोनों देशों ने 2028-29 को ‘इंडिया-कोरिया फ्रेंडशिप ईयर’ के रूप में मनाने की घोषणा भी की है, जिससे लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा दिया जाएगा। (India South Korea K9 Vajra Deal)

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