📍नई दिल्ली | 8 Jun, 2026, 7:32 PM
HAL Tejas Mk1A Delay: भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में शामिल तेजस एमके-1ए को बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। रक्षा मंत्रालय अब हिंदुस्तान एचएएल पर पैनल्टी लगाने की संभावना पर विचार कर रहा है, क्योंकि भारतीय वायुसेना को अब तक एक भी ऑपरेशनल तेजस एमके-1ए विमान नहीं मिला है।
सोमवार सुबह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एचएएल की प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद थे। बैठक में बाकी प्रोजेट्स के अलावा तेजस एमके-1ए कार्यक्रम की प्रगति, इंजन सप्लाई की स्थिति और उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों का कहना है कि इसी सप्ताह भारतीय वायुसेना और एचएएल के बीच अलग से एक समीक्षा बैठक भी हो सकती है, जिसमें विमान की वास्तविक स्थिति और लंबित तकनीकी कार्यों की समीक्षा की जाएगी।
HAL Tejas Mk1A Delay: 2021 में हुआ था 45,696 करोड़ रुपये का बड़ा सौदा
भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने साल 2021 में एचएएल के साथ 83 तेजस एमके-1ए विमानों का कॉन्ट्रैक्ट किया था। इस सौदे की कुल कीमत 45,696 करोड़ रुपये थी।
इस ऑर्डर में 73 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान और 10 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान शामिल हैं। समझौते के अनुसार फरवरी 2024 से विमान की डिलीवरी शुरू हो जानी चाहिए थी।
योजना के मुताबिक एचएएल को हर साल लगभग आठ विमान भारतीय वायुसेना को सौंपने थे। लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी तेजस एमके-1ए औपचारिक रूप से वायुसेना को नहीं सौंपा गया है।
यही वजह है कि अब रक्षा मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से देख रहा है। (HAL Tejas Mk1A Delay)
देरी की सबसे बड़ी वजह क्या है?
तेजस एमके-1ए कार्यक्रम में देरी की सबसे बड़ी वजह इंजन सप्लाई को माना जा रहा है। इस विमान में अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक का एफ-404 आईएन-20 इंजन लगाया जाना है। एचएएल ने वर्ष 2021 में 99 इंजनों के लिए लगभग 716 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया था।
मूल योजना के अनुसार अप्रैल 2023 से इंजन मिलने शुरू हो जाने चाहिए थे। लेकिन सप्लाई समय पर नहीं हो सकी।
सूत्रों के मुताबिक अप्रैल 2026 तक एचएएल को केवल छह इंजन ही प्राप्त हुए हैं। जबकि दर्जनों विमान प्रोडक्शन लाइन में तैयार खड़े हैं और केवल इंजन का इंतजार कर रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी इस मुद्दे को लेकर कई बार अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत करनी पड़ी थी।
Defence Minister Rajnath Singh today reviewed the progress of key ongoing projects of Hindustan Aeronautics Limited (HAL), with a focus on strengthening India’s indigenous aerospace and defence capabilities. The review comes amid efforts to accelerate critical defence production… pic.twitter.com/vguqttzZFO
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) June 8, 2026
एचएएल ने भी जीई पर लगाया जुर्माना
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि एचएएल ने केवल देरी का हवाला नहीं दिया, बल्कि उसने इंजन सप्लाई में देरी के लिए जनरल इलेक्ट्रिक पर कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार पैनल्टी भी लगाई है।
सूत्रों के अनुसार देरी से मिलने वाले इंजनों पर लिक्विडेटेड डैमेज क्लॉज के तहत जुर्माना लगाया गया है। यानी एचएएल को भी समय पर इंजन न मिलने से नुकसान हुआ है और उसने इसकी भरपाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट संबंधी प्रावधानों का इस्तेमाल किया है।
जानकारी के मुताबिक जीई ने अब जून से दिसंबर 2026 के बीच करीब 20 इंजन देने का भरोसा दिया है। एचएएल को उम्मीद है कि मार्च 2027 तक पर्याप्त संख्या में इंजन मिल जाएंगे। (HAL Tejas Mk1A Delay)
तैयार हैं विमान, लेकिन नहीं हैं इंजन
दिलचस्प बात यह है कि विमान निर्माण का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। एचएएल पहले ही पांच ऐसे तेजस एमके-1ए विमान तैयार कर चुका है जिनमें कॉन्ट्रैक्ट के तहत तय अधिकांश क्षमताएं मौजूद हैं। इसके अलावा कई अन्य विमान भी निर्माण चरण पूरा कर चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक लगभग 18 से 20 एयरफ्रेम प्रोडक्शन लाइन में तैयार खड़े हैं। इन विमानों की असेंबली पूरी हो चुकी है, लेकिन इंजन उपलब्ध नहीं होने के कारण इन्हें उड़ान योग्य नहीं बनाया जा सका है।
#HAL could face contractual penalties from the #DefenceMinistry over delays in the delivery of #Tejas Mk-1A fighter jets to the #IndianAirForce. Despite having six engines and nearly 18 aircraft structures reportedly ready, the aerospace major is yet to deliver the first Tejas…
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) June 8, 2026
एईएसए रडार इंटीग्रेशन भी बना चुनौती
इसके अलावा इसी हफ्ते भारतीय वायुसेना के साथ होने वाली रिव्यू बैठक में एईएसए रडार इंटीग्रेशन को लेकर बातचीत हो सकती है। सूत्रों के अनुसार केवल रडार लगाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि उसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मिशन कंप्यूटर और वेपन कंट्रोल सिस्टम के साथ पूरी तरह जोड़ना भी जरूरी है।
सूत्रों का कहना है कि आधुनिक लड़ाकू विमान में रडार, सेंसर, हथियार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम एक-दूसरे के साथ लगातार डेटा साझा करते हैं। यदि इन सभी के बीच सही तालमेल न हो तो विमान की पूरी क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से एचएएल और संबंधित एजेंसियां इस इंटीग्रेशन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में लगी हुई हैं। (HAL Tejas Mk1A Delay)
पिछले महीने होनी थी बैठक
इससे पहले मई महीने के दूसरे हफ्ते में भारतीय वायुसेना के साथ एचएएल की रिव्यू बैठक होनी प्रस्तावित थी। लेकिन एचएएल चीफ रवि कोटा ने वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से मुलाकात कर कुछ वक्त मांगा था।
इस बैठक में एचएएल और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों को नई दिल्ली में मिलकर तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करनी थी। साथ ही यह भी तय किया जाना था कि विमान को वायुसेना में शामिल करने से पहले जिन अनिवार्य तकनीकी और ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करना है, उनकी स्थिति क्या है और विमानों की डिलीवरी का नया कार्यक्रम क्या होगा।
सूत्रों के मुताबिक, समीक्षा बैठक तभी हो सकती है जब एचएएल वायुसेना को यह बताए कि लंबित तकनीकी समस्याओं को दूर करने में कितनी प्रगति हुई है। लेकिन अभी तक इस संबंध में पूरी जानकारी वायुसेना को नहीं दी गई है।
वायुसेना ने विमान को सेवा में शामिल करने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं। इनमें मिसाइल परीक्षणों का पूरा होना, एईएसए रडार को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के साथ सफलतापूर्वक जोड़ना और विमान के सभी हथियारों की क्षमता का पूर्ण परीक्षण शामिल है। वायुसेना ने कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी कुछ शर्तों में पहले ही छूट दी हुई है। यदि सभी अनिवार्य आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं तो पहला विमान जल्द से जल्द स्वीकार कर लिया जाएगा। (HAL Tejas Mk1A Delay)
वायुसेना क्यों है चिंतित?
भारतीय वायुसेना इस कार्यक्रम पर विशेष नजर रख रही है क्योंकि उसके लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या पहले से दबाव में है। पुराने मिग-21 जैसे विमान सेवा से बाहर हो चुके हैं। वहीं कई अन्य पुराने प्लेटफॉर्म भी धीरे-धीरे रिटायरमेंट की ओर बढ़ रहे हैं।
ऐसे में तेजस एमके-1ए को वायुसेना के भविष्य की रीढ़ माना जा रहा है। वायुसेना पहले ही 83 विमानों का ऑर्डर दे चुकी है। इसके अलावा 97 और तेजस एमके-1ए विमानों की मांग भी की जा चुकी है।
इस तरह कुल 180 विमानों का संभावित कार्यक्रम भारतीय सैन्य विमानन इतिहास की सबसे बड़ी स्वदेशी परियोजनाओं में शामिल हो चुका है।
वायुसेना के पास वर्तमान में केवल 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42.5 स्क्वाड्रन है। ऐसे में तेजस मार्क-1ए की समय पर डिलीवरी वायुसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या कुछ शर्तों के साथ विमान स्वीकार कर सकती है वायुसेना?
सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना इस बात पर भी विचार कर रही है कि यदि विमान बुनियादी रूप से लड़ाकू भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं, तो कुछ क्षमताओं को बाद में जोड़ने की अनुमति दी जा सकती है।
इसका मतलब यह नहीं होगा कि स्टैंडर्ड्स में कमी की जाएगी, बल्कि कुछ गैर-आवश्यक सुधारों को बाद के चरण में शामिल किया जा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला तकनीकी मूल्यांकन और समीक्षा बैठकों के बाद ही लिया जाएगा।
वायुसेना की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि जो विमान शामिल किए जाएं वे सुरक्षित, विश्वसनीय और युद्धक भूमिका निभाने में सक्षम हों। (HAL Tejas Mk1A Delay)
रक्षा मंत्रालय अब क्यों सख्त हुआ?
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि किसी भी बड़े रक्षा कॉन्ट्रैक्ट में समय सीमा का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि मंत्रालय इंजन आपूर्ति में आई बाहरी बाधाओं से भी अवगत है, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार अंतिम जिम्मेदारी मुख्य निर्माता की होती है।
यही कारण है कि देरी के लिए आर्थिक दंड लगाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि समीक्षा बैठकों के बाद यह तय किया जाएगा कि दंड लगाया जाए या नहीं और यदि लगाया जाए तो उसका स्वरूप क्या होगा।
फरवरी 2026 में एचएएल ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि तेजस मार्क-1ए के पांच विमान डिलीवरी के लिए तैयार हैं। कंपनी का दावा था कि इन विमानों में कॉन्ट्रैक्ट के तहत तय की गई प्रमुख क्षमताएं शामिल कर दी गई हैं। हालांकि रक्षा सूत्रों का कहना है कि भले ही इन विमानों में कई महत्वपूर्ण प्रणालियां लग चुकी हैं, लेकिन अभी सभी क्षमताओं को अंतिम सर्टिफिकेशन नहीं मिला है और कुछ जरूरी मंजूरियां अभी बाकी हैं।
एचएएल ने पिछले साल अक्टूबर में नासिक में हुए विमान की पहली उड़ान के दौरान मार्च 2026 तक डिलीवरी शुरू करने का लक्ष्य बताया था। इससे पहले कंपनी ने कहा था कि पहले दो विमान अक्टूबर तक वायुसेना को सौंप दिए जाएंगे, लेकिन यह टारगेट पूरा नहीं हो सका। (HAL Tejas Mk1A Delay)



