📍नई दिल्ली | 18 May, 2026, 8:00 AM
Tejas Mk-1A Delivery Delay: भारतीय वायु सेना के सबसे अहम फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारतीय वायु सेना के बीच होने वाली अहम रिव्यू बैठक टलने के पीछ अहम वजह सामने आई है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक एचएएल के नए चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि कोटा ने हाल ही में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से मुलाकात की थी और तेजस कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की थी।
सूत्रों का कहना है कि इस दौरान रवि कोटा ने वायु सेना प्रमुख से रिव्यू बैठक को कुछ समय के लिए टालने का अनुरोध किया। उन्होंने करीब एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा है क्योंकि तेजस मार्क-1ए से जुड़े कई महत्वपूर्ण ट्रायल और टेक्निकल टेस्टिंग अभी भी जारी हैं। यह समीक्षा बैठक बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी के बाद यह तय होना है कि विमान भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा कर रहा है या नहीं।
बता दें कि रवि कोटा लंबे समय से तेजस कार्यक्रम से जुड़े रहे हैं और डिफेंस सेक्टर में उन्हें अक्सर “एलसीए मैन” के नाम से भी जाना जाता है। अब एचएएल के शीर्ष पद की जिम्मेदारी संभालते ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम की विश्वसनीयता बनाए रखना और समय पर डिलीवरी करना है।
इस रिव्यू बैठक में वायु सेना की ओर से वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नागेश कपूर, टेस्ट पायलट्स और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने वाले हैं। बैठक में विमान की तकनीकी स्थिति, ट्रायल रिपोर्ट, वेपन सिस्टम और नई डिलीवरी टाइमलाइन पर चर्चा होनी है।
Tejas Mk-1A Delivery Delay: दो साल से ज्यादा पीछे चल रहा है प्रोजेक्ट
तेजस मार्क-1ए प्रोग्राम पहले से ही तय समयसीमा से काफी पीछे चल रहा है। भारतीय वायु सेना को पहले ही इस विमान की शुरुआती खेप मिल जानी चाहिए थी। सूत्रों के मुताबिक पहले तय योजना के अनुसार अब तक करीब 35 से 36 तेजस मार्क-1ए विमान वायु सेना को मिल जाने चाहिए थे।
लेकिन इंजन सप्लाई में देरी, रडार इंटीग्रेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और वेपंस ट्रायल के चलते पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। अब नई समीक्षा बैठक के बाद ही यह साफ होगा कि पहली डिलीवरी कब शुरू होगी।
एचएएल को मिला छठा एफ-404 इंजन
इसी बीच एचएएल को अमेरिका की जीई एयरोस्पेस से एफ-404 इंजन की छठी यूनिट भारत पहुंच चुकी है। यह इंजन तेजस मार्क-1ए का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है।
सूत्रों ने बताया कि एचएएल ने अब तक करीब 18 मार्क-1ए एयरफ्रेम तैयार कर लिए हैं, लेकिन इनमें से केवल कुछ विमानों को ही इंजन मिल पाए हैं।
कुछ इंजन अभी ट्रायल प्रोसेस में हैं जबकि कुछ को विमान में इंटीग्रेट किया जा रहा है। एचएएल का कहना है कि अगस्त या सितंबर 2026 तक इंजन सप्लाई पूरी तरह स्टेबल होने की उम्मीद है। इसके बाद प्रोडक्शन उत्पादन और डिलीवरी की रफ्तार बढ़ सकेगी।
सूत्रों ने बताया कि कहा कि इंजन सप्लाई स्टेबल होने के बाद भारतीय वायु सेना के साथ नई डिलीवरी टाइमलाइन को अंतिम रूप देने पर चर्चा शुरू होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि अगस्त-सितंबर 2026 से तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी शुरू हो सकती है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)
आखिर क्यों हो रही है देरी
रक्षा सूत्रों के मुताबिक देरी की सबसे बड़ी वजह केवल इंजन नहीं है। तेजस मार्क-1ए में कई एडवांस सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिनके इंटीग्रेशन और ट्रायल में वक्त लग रहा है।
वायु सेना ने कुछ मैंडेटरी ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स तय किए हैं। इनमें मिसाइल फायरिंग ट्रायल, एईएसए रडार का इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन और पूरे हथियार पैकेज की फुल टेस्टिंग शामिल है।
सूत्रों का कहना है कि जब तक इन सभी स्टैंडर्ड्स की सफल टेस्टिंग नहीं हो जाती, तब तक विमान को औपचारिक रूप से वायु सेना में शामिल नहीं किया जाएगा।
हालांकि वायु सेना ने एचएएल को कुछ अनुबंधीय शर्तों में राहत भी दी है, लेकिन अनिवार्य तकनीकी जरूरतों को पूरा करना अभी भी जरूरी है।
बता दें कि तेजस मार्क-1ए भारतीय वायु सेना के पुराने मिग-21 विमानों की जगह लेने के लिए डेवलप किया जा रहा है। यह मूल तेजस मार्क-1 का ज्यादा एडवांस और घातक वर्जन है।
इस विमान में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे यानी एईएसए रडार लगाया जा रहा है। यह रडार एक साथ कई टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है और लंबी दूरी पर दुश्मन के विमानों का पता लगाने में सक्षम है।
विमान में नया इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट भी लगाया गया है, जो दुश्मन के रडार और मिसाइलों से बचाव में मदद करेगा। इसके अलावा यह बियॉन्ड विजुअल रेंज यानी बीवीआर मिसाइल से भी लैस है।
तेजस मार्क-1ए को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उसकी मेंटेनेंस जरूरतें कम हों और ऑपरेशनल उपलब्धता ज्यादा रहे। यानी ज्यादा विमान कम समय में उड़ान भर सकेंगे। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)
कब से लगेगा उत्तम रडार
फिलहाल 83 तेजस मार्क-1ए विमानों के मौजूदा ऑर्डर में शुरुआती विमानों में इजरायल का ईएलएम-2052 एईएसए रडार लगाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक स्वदेशी “उत्तम” रडार अभी डीआरडीओ के कंट्रोल में है और एचएएल केवल प्रोडक्शन एजेंसी की भूमिका निभा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक 83 विमानों के ऑर्डर में 41वें विमान से उत्तम रडार को शामिल किया जाएगा। इसके बाद दूसरे बैच के 97 विमानों में 2027 से नया गैलियम नाइट्राइड आधारित एडवांस उत्तम रडार लगाया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि स्वदेशी उत्तम एईएसए रडार की पहली खेप में करीब 33 रडार भारतीय वायु सेना को 2026 से मिलना शुरू होंगे। इन रडारों को तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट में लगाने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि इस रडार में 912 ट्रांसमिट-रिसीव मॉड्यूल होंगे और यह 150 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर फाइटर जेट को ट्रैक कर सकेगा। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)
ट्रायल और सॉफ्टवेयर ट्यूनिंग जारी
एचएएल के मुताबिक विमान में केवल हार्डवेयर नहीं बल्कि कई सॉफ्टवेयर और मिशन सिस्टम सुधार भी किए जा रहे हैं। कंपनी फिलहाल फ्लाइट पैरामीटर वैलिडेशन, सिस्टम इंटीग्रेशन और मिशन सॉफ्टवेयर ट्यूनिंग पर काम कर रही है।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जब विमान भारतीय वायु सेना में शामिल हो तो उसे तुरंत ऑपरेशनल रोल में इस्तेमाल किया जा सके।
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक फाइटर जेट केवल एक विमान नहीं बल्कि उड़ता हुआ नेटवर्क सिस्टम होता है। इसलिए हर सेंसर, रडार, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का एक साथ सही तरीके से काम करना जरूरी होता है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)
पांच विमान तैयार लेकिन मंजूरी बाकी
फरवरी में एचएएल ने दावा किया था कि पांच तेजस मार्क-1ए विमान डिलीवरी के लिए तैयार हैं। कंपनी ने कहा था कि इन विमानों में अधिकांश जरूरी क्षमताएं शामिल कर दी गई हैं।
हालांकि रक्षा सूत्रों का कहना है कि अभी सभी जरूरी सर्टिफिकेशन पूरे नहीं हुए हैं। कुछ जरूरी क्लियरेंस और तकनीकी मंजूरियां अभी बाकी हैं।
यही वजह है कि वायु सेना अंतिम मंजूरी देने से पहले सभी ट्रायल्स और टेस्टिंग्स की समीक्षा करना चाहती है।
वायु सेना के लिए क्यों जरूरी है तेजस
भारतीय वायु सेना इस समय स्क्वाड्रन की कमी का सामना कर रही है। वायु सेना की स्वीकृत ताकत 42.5 फाइटर स्क्वाड्रन की है, लेकिन वर्तमान में उसके पास करीब 29 स्क्वाड्रन ही हैं।
इससे पहले तेजस मार्क-1 के 30 से ज्यादा विमान भारतीय वायु सेना में शामिल हो चुके हैं। ये विमान फिलहाल दो स्क्वाड्रनों नंबर 45 फ्लाइंग डैगर्स और नंबर 18 फ्लाइंग बुलेट्स में ऑपरेशनल भूमिका में हैं।
ऐसे में तेजस मार्क-1ए को भविष्य की लड़ाकू क्षमता का अहम हिस्सा माना जा रहा है। वायु सेना ने कुल 180 तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दिया है।
अगर एचएएल की मौजूदा उत्पादन क्षमता को देखा जाए तो कंपनी सालाना लगभग 24 फाइटर जेट बना सकती है। ऐसे में पूरी डिलीवरी प्रक्रिया को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)
नासिक लाइन से भी बढ़ेगा उत्पादन
एचएएल ने तेजस प्रोडक्शन के लिए बेंगलुरु के अलावा नासिक में भी नई असेंबली लाइन शुरू की है। पिछले साल अक्टूबर में नासिक में बने पहले तेजस मार्क-1ए विमान ने उड़ान भरी थी।
कंपनी का लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाकर समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना है। इसके लिए सप्लाई चेन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और परीक्षण प्रक्रिया पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। (Tejas Mk-1A Delivery Delay)



