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MiG-21 Last Sortie: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इस तरह दी मिग-21 को विदाई, सौंपा फॉर्म-700 डॉक्यूमेंट

विदाई को यादगार बनाने के लिए रक्षा मंत्री ने एक विशेष डाक टिकट और डे कवर भी जारी किया। इसे भारतीय वायुसेना के लंबे और गौरवशाली इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है...

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📍चंडीगढ़ | 27 Sep, 2025, 12:05 AM

MiG-21 Last Sortie: भारतीय वायुसेना के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मिग-21 लड़ाकू विमानों ने आखिरकार शुक्रवार को औपचारिक विदाई दे दी गई। इस मौके को और यादगार बनाने के लिए भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुद ‘बादल 3’ कॉल साइन के साथ मिग-21 की आखिरी सॉर्टी यानी उड़ान भरी। उनके साथ स्क्वॉड्रन लीडर प्रिया शर्माने भी उड़ान भरी। दोनों ने इससे पहले पिछले महीने राजस्थान के नाल एयरबेस पर मिग-21 बाइसन पर सोलो कॉम्बैट सॉर्टी की थी। उस फॉर्मेशन की अगुवाई स्क्वॉड्रन लीडर प्रिया शर्मा ने की थी।

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यह उड़ान सिर्फ एक सैन्य परंपरा का हिस्सा नहीं थी, बल्कि यह उस पूरे दौर को सलाम थी, जिसने भारत की हवाई शक्ति को दशकों तक मजबूती दी। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने MiG-21 का नेतृत्व करते हुए जो फ्लाईपास्ट किया, मिग-21 के प्रति अपनी गहरी आस्था और सम्मान को प्रदर्शित किया।

चंडीगढ़ एयरबेस पर हुए इस समारोह में एक बेहद प्रतीकात्मक फ्लाईपास्ट किया गया। इसमें MiG-21 बाइसन और स्वदेशी एलसीए तेजस ने साथ उड़ान भरी। यह दृश्य पुराने और नए युग का मिलन थास जहां सोवियत दौर का ‘बाइसन’ अपने कंधों पर गौरव का इतिहास लिए विदा हो रहा था और स्वदेशी तेजस भविष्य की दिशा दिखा रहा था।

इसके बाद छह मिग-21 विमानों ने अपनी अंतिम उड़ान पूरी की और रक्षा मंत्री, सेना प्रमुखों और सभी वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में औपचारिक रूप से अलविदा कह दिया गया।

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इस विदाई कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी मौजूद थे। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मिग-21 भारतीय वायुसेना का “बर्ड ऑफ ऑल सीजन्स” रहा है और इसकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता और MiG-21 Last Sortie यादगार है।

समारोह के दौरान एयरफोर्स के अफसरों और 28 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ने फॉर्म-700 डॉक्यूमेंट वायुसेना प्रमुख को सौंपा। यह दस्तावेज किसी विमान की आधिकारिक सेवा समाप्ति का प्रतीक माना जाता है।

विदाई को यादगार बनाने के लिए रक्षा मंत्री ने एक विशेष डाक टिकट और डे कवर भी जारी किया। इसे भारतीय वायुसेना के लंबे और गौरवशाली इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

इस कार्यक्रम में सिर्फ उड़ान ही नहीं, बल्कि वायुसेना की कई विशेष टीमों ने अपने कौशल का प्रदर्शन भी किया। आकाश गंगा स्काईडाइविंग टीम ने शानदार छलांग लगाई, जबकि एयर वारियर ड्रिल टीम ने सटीक और अनुशासित मूवमेंट्स के जरिए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके अलावा सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने आकाश में खास प्रस्तुति की। समारोह के दौरान जगुआर और MiG-21 विमानों ने मिलकर एक प्रतीकात्मक फ्लाईपास्ट भी किया, जिसने 1971 और कारगिल जैसे ऐतिहासिक अभियानों की याद ताजा कर दी और अब  MiG-21 Last Sortie को सब देख रहे है।

मिग-21 भारतीय वायुसेना में 1963 से शामिल हुआ और तब से अब तक इसने हर बड़े युद्ध और ऑपरेशन में अपनी क्षमता साबित की। चाहे वह 1971 का युद्ध हो, कारगिल संघर्ष हो या 2019 का बालाकोट एयरस्ट्राइक, इस विमान ने हमेशा भारतीय तिरंगे को गर्व से ऊंचा रखा।

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वर्षों तक इसे लगातार अपग्रेड किया गया और इसका बाइसन वैरिएंट वायुसेना के लिए सबसे विश्वसनीय इंटरसेप्टर साबित हुआ। लेकिन तकनीकी विकास और नए विमानों के आने के बाद अब MiG-21 Last Sortie सम्मानजनक विदाई दी गई है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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