HomeIndian Air Forceमिशन राफेल 2.0 शुरू! फ्रांस पहुंचे वायुसेना प्रमुख, 114 जेट्स के सौदे...

मिशन राफेल 2.0 शुरू! फ्रांस पहुंचे वायुसेना प्रमुख, 114 जेट्स के सौदे को मिलेगी रफ्तार

भारत ने 114 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को आधिकारिक तौर पर लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (एलओआर) भेज दिया है। यह दस्तावेज पिछले सप्ताह रक्षा मंत्रालय के एक्विजिशन विंग द्वारा फ्रांसीसी सरकार को सौंपा गया...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 1 Jun, 2026, 8:17 PM

IAF Chief France Visit: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह तीन दिन की फ्रांस यात्रा पर हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। इस प्रस्तावित सौदे को भारतीय वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाकू विमान खरीद योजनाओं में गिना जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत ने 114 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को आधिकारिक तौर पर लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (एलओआर) भेज दिया है। यह दस्तावेज पिछले सप्ताह रक्षा मंत्रालय के एक्विजिशन विंग द्वारा फ्रांसीसी सरकार को सौंपा गया। अब फ्रांस अगले दो से तीन महीनों में कीमत, उपलब्धता, उत्पादन व्यवस्था और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़ा अपना जवाब भेजेगा। इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होगी। अधिकारियों का मानना है कि अगले एक वर्ष के भीतर इस सौदे को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

IAF Chief France Visit: फ्रांस यात्रा में क्या है खास

एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है। इस दौरान उनकी मुलाकात फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी दसॉ एविएशन और मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों से होने की संभावना है।

दसॉ एविएशन वही कंपनी है जो राफेल लड़ाकू विमान बनाती है। वहीं एमबीडीए मीटिओर और स्कैल्प जैसी एडवांस मिसाइलें बनाती है। माना जा रहा है कि बातचीत का फोकस राफेल सौदे के अलावा भारतीय हथियारों के इंटीग्रेशन, तकनीकी सहयोग और भारत में उत्पादन व्यवस्था पर भी रहेगा।

पीएम मोदी जा सकते हैं फ्रांस

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून के मध्य में फ्रांस की यात्रा कर सकते हैं। इस दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति और शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में राफेल सौदा भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकता है। चूंकि यह सौदा सरकार-से-सरकार (G2G) मॉडल के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है, इसलिए दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यह भी पढ़ें:  114 राफेल जेट डील से पहले नया ट्विस्ट, अमेरिकी कानून के घेरे में आ सकता है राफेल!

भारत क्यों खरीदना चाहता है 114 नए राफेल

भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रन की कमी का सामना कर रही है। वायुसेना की स्वीकृत क्षमता 42 स्क्वाड्रन की है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या 29 है। पुराने मिग-21 और अन्य विमानों की चरणबद्ध विदाई के बाद यह चुनौती और बढ़ गई है।

इसी कमी को दूर करने के लिए मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के तहत 114 नए लड़ाकू विमानों की योजना तैयार की गई है। राफेल इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है क्योंकि भारतीय वायुसेना पहले से ही 36 विमानों को ऑपरेट कर रही है।

राफेल के आने से वायुसेना को नए स्क्वाड्रन खड़े करने में मदद मिलेगी और कई मोर्चों पर उसकी ऑपरेशनल क्षमता मजबूत होगी।

पहले भी भारत खरीद चुका है राफेल

भारत और फ्रांस के बीच राफेल को लेकर रक्षा सहयोग नया नहीं है। वर्ष 2016 में दोनों देशों के बीच 36 राफेल विमानों की खरीद का समझौता हुआ था। इन विमानों की सप्लाई पूरी हो चुकी है और वे अंबाला तथा हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं।

पिछले कुछ सालों में राफेल ने भारतीय वायुसेना की क्षमता में बड़ा योगदान दिया है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद पर विचार किया जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से मौजूद बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित पायलटों और तकनीकी स्टाफ के कारण राफेल के नए बेड़े को शामिल करना अपेक्षाकृत आसान रहेगा।

भारत में बनेंगे लगभग 90 विमान

इस प्रस्तावित सौदे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहली बार राफेल लड़ाकू विमान का उत्पादन फ्रांस के बाहर किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार 114 विमानों में से 94 राफेल भारत में बनाए जाएंगे। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन किसी भारतीय साझेदार के साथ मिलकर उत्पादन लाइन स्थापित करेगी। शेष 20 विमान फ्रांस से सीधे भारतीय वायुसेना को मिलेंगे।

यह भी पढ़ें:  जर्मनी दौरे पर राजनाथ सिंह, भारतीय समुदाय से बोले- जुड़े रहिए अपनी जड़ों से

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार इस कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिशत स्थानीयकरण (लोकलाइजेशन) का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत भारतीय हथियारों, भारतीय डेटा लिंक और कई स्वदेशी प्रणालियों को भी विमान में एकीकृत करने की अनुमति होगी। यही वजह है कि इस परियोजना को “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के सबसे बड़े रक्षा कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है।

राफेल कार्यक्रम को मेक इन इंडिया अभियान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यदि बड़ी संख्या में विमान भारत में बनते हैं तो इससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

विमानों के निर्माण में शामिल होने वाली भारतीय कंपनियों को अत्याधुनिक तकनीक के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। इससे देश में रक्षा उत्पादन से जुड़ी सप्लाई चेन भी मजबूत होगी।

पहली बार फ्रांस के बाहर बनेगा राफेल

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि राफेल का निर्माण पहली बार फ्रांस के बाहर भारत में होगा। साथ ही भारतीय हथियारों और भारतीय प्रणालियों के एकीकरण पर भी भारत को पर्याप्त अधिकार मिलेंगे। भारतीय नौसेना के लिए राफेल-एम विमानों की डिलीवरी 2028 से शुरू होने की उम्मीद है, जबकि वायुसेना के लिए नए राफेल विमानों की आपूर्ति उसके बाद शुरू हो सकती है।

176 तक पहुंच जाएगी भारतीय राफेल बेड़े की संख्या

भारतीय वायुसेना पहले ही 36 राफेल लड़ाकू विमान शामिल कर चुकी है। इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-एम विमानों का सौदा भी हो चुका है। इस तरह 62 राफेल विमानों का ऑर्डर पहले से दिया जा चुका है।

यह भी पढ़ें:  HAL का बड़ा खुलासा; 5 तेजस Mk-1A पूरी तरह तैयार, 9 अमेरिका से इंजन के इंतजार में, क्या IAF रिव्यू से बढ़ी टेंशन?

यदि 114 नए राफेल विमानों का यह सौदा पूरा होता है तो भारत के पास कुल राफेल विमानों की संख्या 176 हो जाएगी। नौसेना ने भविष्य में अतिरिक्त राफेल-एम विमानों की जरूरत भी जताई है, जिससे यह संख्या और बढ़ सकती है।

राफेल क्यों माना जाता है खास

राफेल को दुनिया के सबसे आधुनिक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। यह एक ऐसा विमान है जो हवाई युद्ध, जमीनी हमले, समुद्री मिशन और लंबी दूरी की स्ट्राइक जैसे कई कार्य एक साथ कर सकता है।

इस विमान में आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और उन्नत सेंसर लगे होते हैं। इसके साथ मीटिओर, माइका और स्कैल्प जैसी आधुनिक मिसाइलों का उपयोग किया जा सकता है।

भारतीय वायुसेना के पास मौजूद राफेल विमानों में भारत की जरूरतों के अनुसार कई विशेष सुधार भी किए गए हैं।

एलओआर से लेकर अनुबंध तक क्या होगी प्रक्रिया

रक्षा खरीद प्रक्रिया में लेटर ऑफ रिक्वेस्ट एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इसके जरिए भारत आधिकारिक रूप से फ्रांस को अपनी आवश्यकता और शर्तों की जानकारी देगा।

फ्रांस की ओर से जवाब मिलने के बाद कीमत, उपलब्धता, उत्पादन व्यवस्था और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत शुरू होगी।

इसके बाद औपचारिक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया जाएगा। दोनों पक्षों के बीच कई दौर की वार्ता होगी। अंत में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की मंजूरी मिलने के बाद अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular