📍नई दिल्ली | 27 May, 2026, 1:22 PM
Zen Technologies RCWS Tender: हैदराबाद की डिफेंस कंपनी जेन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) के एक बड़े टेंडर में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी एल-1 बिडर बनी है। यह टेंडर आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के लिए रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम (RCWS) का है, जिसकी कुल कीमत करीब 85.21 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय सेना के आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स पर आधुनिक रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम लगाए जाएंगे। इन सिस्टम्स की मदद से सैनिक वाहन के अंदर सुरक्षित रहते हुए मशीन गन चला सकेंगे। इससे युद्ध के दौरान सैनिकों की सुरक्षा और फायरपावर दोनों बढ़ेंगी।
यह टेंडर अप्रैल में एवीएनएल की अवाडी स्थित हेवी व्हीकल फैक्ट्री की ओर से जारी किया गया था। इस प्रोजेक्ट के तहत 81 रिमोट कंट्रोल वेपन स्टेशन सप्लाई किए जाने हैं। (Zen Technologies RCWS Tender)
Zen Technologies RCWS Tender: क्या होता है आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल
आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल (ARV) सेना के लिए बेहद अहम सपोर्ट प्लेटफॉर्म माना जाता है। इसका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में खराब हो चुके टैंक या दूसरे भारी सैन्य वाहनों को खींचने, हटाने और रिपेयर करने के लिए किया जाता है।
भारतीय सेना के पास टी-72 और टी-90 जैसे मुख्य युद्धक टैंक मौजूद हैं। अगर किसी ऑपरेशन के दौरान इनमें तकनीकी खराबी आ जाए या दुश्मन की फायरिंग में नुकसान पहुंचे, तो एआरवी उन्हें सुरक्षित जगह तक पहुंचाने का काम करता है।
इन वाहनों में भारी शील्ड, क्रेन, विंच और रिपेयर उपकरण लगे होते हैं। लेकिन अब आधुनिक युद्ध में केवल रिकवरी क्षमता काफी नहीं मानी जाती। ड्रोन हमले, स्नाइपर और घात लगाकर किए जाने वाले हमलों के खतरे को देखते हुए इन वाहनों को भी हथियारों से लैस करना जरूरी माना जा रहा है।
इसी वजह से भारतीय सेना अब एआरवी पर रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम लगाने जा रही है।
क्या है रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम
रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम यानी आरसीडब्ल्यूएस एक ऐसा हथियार प्लेटफॉर्म होता है, जिसे वाहन के अंदर बैठकर ऑपरेट किया जा सकता है।
पहले सैनिकों को मशीन गन चलाने के लिए वाहन के ऊपर निकलना पड़ता था। इससे वे दुश्मन की गोलीबारी और ड्रोन हमलों की जद में आ जाते थे। लेकिन नए सिस्टम में सैनिक पूरी तरह कवच के अंदर रहकर फायरिंग कर सकेंगे।
इस सिस्टम में कैमरा, थर्मल इमेजर, डे-नाइट विजन, ऑटो ट्रैकिंग और स्टेबलाइजेशन जैसी तकनीकें होती हैं। इससे चलते वाहन से भी सटीक निशाना लगाया जा सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आधुनिक युद्ध में ऐसे सिस्टम तेजी से जरूरी होते जा रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों में भी रिमोट वेपन सिस्टम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर देखा गया है।
जेन टेक्नोलॉजीज को क्यों मिली बढ़त
जेन टेक्नोलॉजीज पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रक्षा सेक्टर की तेजी से उभरती कंपनियों में शामिल हो चुकी है। कंपनी का मुख्यालय हैदराबाद में है और यह डिफेंस ट्रेनिंग सिमुलेटर, एंटी-ड्रोन सिस्टम और कॉम्बैट टेक्नोलॉजी डेवलप करती है।
जेन टेक्नोलॉजीज को पहले भी रक्षा मंत्रालय से कई बड़े ऑर्डर मिल चुके हैं। कंपनी को करीब 404 करोड़ रुपये का एंटी-ड्रोन सिस्टम और सिमुलेटर कॉन्ट्रैक्ट मिला था। इसके अलावा 289 करोड़ रुपये का एक बड़ा अपग्रेडेशन ऑर्डर भी कंपनी को मिला था।
एयरो इंडिया 2025 के दौरान जेन टेक्नोलॉजीज ने अपने नए रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम यानी आरसीडब्ल्यूएस मॉडल भी पेश किए थे। इन सिस्टम्स को खासतौर पर आर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल्स के लिए डिजाइन किया गया था।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक एवीएनएल के इस टेंडर में कंपनी की तकनीकी क्षमता और प्रतिस्पर्धी कीमत दोनों ने अहम भूमिका निभाई।
जेन टेक्नोलॉजीज पहले ही अपने कई रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम मॉडल्स पेश कर चुकी है। इनमें “परशु” और “फणिश” जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। (Zen Technologies RCWS Tender)
कौन सा सिस्टम लगाया जा सकता है
हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह साफ नहीं किया गया है कि एआरवी पर कंपनी का कौन सा आरसीडब्ल्यूएस लगाया जाएगा, लेकिन सूत्रों का कहना है कि “फणिश” सिस्टम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
फणिश को खासतौर पर टैंक और भारी बख्तरबंद वाहनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें 12.7 मिमी हैवी मशीन गन लगाने की क्षमता है।
यह सिस्टम वाहन के अंदर बैठे ऑपरेटर द्वारा कंट्रोल किया जाता है। इसमें कूल्ड थर्मल कैमरा, डे कैमरा और ऑटो ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
बताया जाता है कि यह सिस्टम 14 किलोमीटर तक टारगेट पहचानने की क्षमता रखता है। इसके अलावा यह दिन और रात दोनों समय काम कर सकता है। (Zen Technologies RCWS Tender)
सेना को क्या मिलेगा फायदा
इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा सैनिकों की सुरक्षा माना जा रहा है। युद्ध के दौरान रिकवरी वाहन अक्सर दुश्मन की नजर में रहते हैं क्योंकि वे युद्ध क्षेत्र के बीच जाकर खराब टैंकों को निकालते हैं।
अगर ऐसे समय पर दुश्मन की गोलीबारी या ड्रोन हमला हो जाए, तो वाहन के ऊपर मौजूद सैनिक सबसे पहले निशाने पर आते हैं। लेकिन आरसीडब्ल्यूएस लगने के बाद सैनिक कवच के अंदर रहकर ही जवाबी कार्रवाई कर सकेंगे।
इसके अलावा वाहन की फायरपावर भी बढ़ जाएगी। अगर किसी इलाके में घात लगाकर हमला हो या ड्रोन दिखाई दें, तो वाहन तुरंत जवाब दे सकेगा।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में सपोर्ट व्हीकल्स को भी “कॉम्बैट रेडी” बनाना जरूरी हो चुका है। (Zen Technologies RCWS Tender)
एआई और ऑटो ट्रैकिंग जैसी तकनीक
जेन टेक्नोलॉजीज के वेपन सिस्टम में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इनमें एआई आधारित टारगेट पहचान, ऑटो ट्रैकिंग और फाइबर ऑप्टिक जायरो स्टेबलाइजेशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इन तकनीकों की मदद से सिस्टम चलते वाहन पर भी लक्ष्य को लॉक कर सकता है। इससे निशाना ज्यादा सटीक होता है।
थर्मल कैमरे की वजह से रात या खराब मौसम में भी लक्ष्य दिखाई देता है। यही वजह है कि सेना अब पुराने मैनुअल सिस्टम की जगह स्मार्ट हथियार प्लेटफॉर्म पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
बता दें कि आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड भारत सरकार की डिफेंस पब्लिक सेक्टर की कंपनी है। इसका गठन 2021 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के पुनर्गठन के बाद किया गया था।
एवीएनएल मुख्य रूप से भारतीय सेना के लिए आर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल्स बनाता है। इसमें अर्जुन मेन बैटल टैंक, टी-90 टैंक, सारथ आईसीवी और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल जैसे कई महत्वपूर्ण सैन्य प्लेटफॉर्म शामिल हैं। भारतीय सेना के कई आर्मर्ड सिस्टम की मरम्मत और अपग्रेडेशन का काम भी इसी नेटवर्क के जरिए होता है।
सूत्रों के मुताबिक आधुनिक युद्ध में केवल टैंक ही नहीं, बल्कि उन्हें सपोर्ट करने वाले रिकवरी सिस्टम भी बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। इसी वजह से एवीएनएल अब आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स को आधुनिक तकनीक से लैस करने पर जोर दे रहा है। (Zen Technologies RCWS Tender)
एआरवी पर आरसीडब्ल्यूएस लगाने का फैसला उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आरसीडब्ल्यूएस यानी रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम लगने के बाद एआरवी की सुरक्षा और फायरपावर दोनों बढ़ जाएंगी। खासकर ऐसे इलाकों में जहां दुश्मन ड्रोन, स्नाइपर या घात लगाकर हमला कर सकता है, वहां यह सिस्टम काफी मददगार माना जा रहा है। (Zen Technologies RCWS Tender)
टेंडर की प्रक्रिया अब किस चरण में
जेन टेक्नोलॉजीज को फिलहाल एल-1 बिडर घोषित किया गया है। इसका मतलब यह है कि कंपनी ने सबसे कम बोली लगाई है और तकनीकी रूप से भी शर्तों को पूरा किया है।
अब आगे कॉन्ट्रैक्ट फाइनलाइजेशन, प्रोटोटाइप टेस्टिंग और सेना के ट्रायल की प्रक्रिया होगी। इसके बाद सप्लाई शुरू की जाएगी।
टेंडर दस्तावेजों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में डिजाइन, डेवलपमेंट, प्रोटोटाइप, टेस्टिंग और सप्लाई सभी शामिल हैं।
सूत्रों का कहना है कि सेना अब ऐसे सिस्टम चाहती है जो पूरी तरह भारतीय जरूरतों के हिसाब से तैयार किए जाएं और भविष्य में आसानी से अपग्रेड भी किए जा सकें। (Zen Technologies RCWS Tender)




