📍नई दिल्ली/कीव | 24 Apr, 2026, 6:39 PM
Ukraine drone warfare Innovation: अक्सर कहा जाता है कि युद्ध केवल तबाही लाता है, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि युद्ध के दौरान तकनीक बहुत तेजी से बदलती है और नए इनोवेशन भी होते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष सैनिकों के साथ-साथ ड्रोन और रोबोट भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि युद्ध के दौरान मिलिट्री टेक्नोलॉजी में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।
Ukraine drone warfare Innovation: छोटे रोबोट, बड़ा काम
यूक्रेन में एक खास तरह का अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल यानी यूजीवी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे ‘रैटल एच’ कहा जाता है। यह देखने में साधारण लगता है और इसकी रफ्तार भी ज्यादा नहीं है, करीब 8 किलोमीटर प्रति घंटा है। लेकिन इसका काम बेहद अहम है। यह ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर आसानी से चल सकता है और जब इसे ऊपर से खतरा दिखाई देता है, तो यह रुककर एक जाल फेंकता है और दुश्मन के ड्रोन को गिरा देता है।
इस रोबोट को बनाने वाली कंपनी पहले स्ट्रीट लाइटिंग का काम करती थी, लेकिन 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद कंपनी ने अपना काम बदल दिया और अब यह यूक्रेन की प्रमुख डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल हो गई है। अब यह कंपनी यूक्रेन की सेना के लिए अलग-अलग तरह के रोबोट तैयार कर रही है।
छह महीने में तैयार हो जाता है नया सिस्टम
यूक्रेन में टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट की रफ्तार काफी तेज हो गई है। कंपनी के संस्थापक तारास ओस्तापचुक के मुताबिक, अब कोई नया डिजाइन बनने के बाद उसे करीब छह महीने के भीतर बैटलफील्ड में भेज दिया जाता है।
तारास ओस्तापचुक ने बताया कि उनकी टीम लगातार नए तरह के रोबोट बना रही है। कुछ ऐसे हैं जो ड्रोन लॉन्च कर सकते हैं, कुछ में मशीनगन लगाने की तैयारी है। पानी में चलने वाले यानी एंफीबियस मॉडल पर भी काम हो रहा है।
सेना में बढ़ रहा है रोबोट और ड्रोन का इस्तेमाल
यूक्रेन की सेना अब इन यूजीवी और ड्रोन का इस्तेमाल कई कामों में कर रही है। ये मशीनें सैनिकों तक हथियार और जरूरी सामान पहुंचाती हैं, घायल जवानों को सुरक्षित निकालती हैं और जरूरत पड़ने पर दुश्मन पर हमला भी करती हैं।
13 अप्रैल को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि सेना ने पहली बार केवल ड्रोन और रोबोट की मदद से रूस की एक पोजीशन पर कब्जा किया, जिसमें किसी सैनिक को सीधे मोर्चे पर नहीं भेजा गया।
ड्रोन बन गए सबसे बड़ा हथियार
वोलोदिमिर जेलेंस्की के अनुसार, इस साल के शुरुआती तीन महीनों में यूक्रेन ने 22 हजार से ज्यादा मिशन ड्रोन और रोबोट के जरिए पूरे किए। उन्होंने बताया कि मार्च महीने में रूस को भारी नुकसान हुआ, जिसमें ज्यादातर हमले ड्रोन के जरिए किए गए थे।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कुल नुकसान का बड़ा हिस्सा ड्रोन हमलों की वजह से हुआ है, जिससे युद्ध का तरीका बदलता दिख रहा है।।
रूस ने बदली रणनीति
ड्रोन के बढ़ते असर के कारण रूस को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। अब बड़े टैंक हमलों की जगह छोटे-छोटे समूहों में सैनिकों को आगे भेजा जा रहा है। ये सैनिक पेड़ों और झाड़ियों का सहारा लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं।
इसके बावजूद जमीन पर ज्यादा बढ़त नहीं मिल पा रही है। ऐसे में रूस ने शहरों पर हवाई हमले बढ़ा दिए हैं, जिनमें मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
यूक्रेन में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा
यूक्रेन में डिफेंस टेक्नोलॉजी का एक बड़ा नेटवर्क बन गया है। यहां करीब 2300 कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। इनमें आपस में प्रतिस्पर्धा भी है, जिससे नए आइडिया तेजी से सामने आ रहे हैं।
यूक्रेन की डिफेंस कंपनी यूफोर्स के सह-संस्थापक ओलेक्सी होंचारुक के अनुसार, यह प्रतिस्पर्धा ही तकनीक को बेहतर बना रही है। इस प्रतिस्पर्धा का असर यह हुआ है कि उपकरण सस्ते होते जा रहे हैं और उनकी गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। साथ ही उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है।
ड्रोन उत्पादन में भारी बढ़ोतरी
यूक्रेन में ड्रोन का उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। जहां पहले लाखों ड्रोन बनते थे, अब यह संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। कुछ ड्रोन अब 1500 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं।
इसके अलावा इंटरसेप्टर ड्रोन भी बनाए जा रहे हैं, जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही रोक सकते हैं। यह पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम की तुलना में सस्ते विकल्प माने जाते हैं। हालांकि रूस के पास अब भी बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हथियारों में बढ़त बनी हुई है।
टेक्नोलॉजी के साथ डेटा का इस्तेमाल
यूक्रेन ने अपने सिस्टम में डेटा का भी बड़ा इस्तेमाल किया है। हर ऑपरेशन को वीडियो के जरिए रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सी रणनीति काम कर रही है।
इस डेटा के आधार पर सेना और कंपनियां अपने सिस्टम में सुधार करती हैं। इससे टेक्नोलॉजी और रणनीति दोनों बेहतर होती हैं।
मौसम खराब तो ड्रोन बेकार
यूक्रेन की 128वीं ब्रिगेड के एक अधिकारी “बोटानिक” के अनुसार, जब मौसम साफ होता है तो ड्रोन और रोबोट ज्यादा असरदार होते हैं। लेकिन जैसे ही मौसम खराब होता है, सैनिकों को आगे आना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि घने जंगलों में यूजीवी सही तरीके से काम नहीं कर पाते, इसलिए जमीन पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सैनिक जरूरी होते हैं।
बढ़ रहा है भ्रष्टाचार
वहीं, तेजी से हो रहे इस विकास के बावजूद कुछ दिक्कतें भी सामने आई हैं। सरकारी प्रक्रियाएं अभी भी धीमी हैं, जिससे कंपनियों को लंबी अवधि की योजना बनाने में परेशानी होती है। कई बार भुगतान में देरी भी होती है।
इसके अलावा उपकरणों की जांच और मंजूरी की प्रक्रिया भी समय लेती है, जो युद्ध जैसी स्थिति में चुनौती बन सकती है।
कुछ मामलों में भ्रष्टाचार और पक्षपात की शिकायतें भी सामने आई हैं। यूक्रेन की एक कंपनी के तकनीकी प्रमुख आर्तेम कोलेसनिक ने कहा कि कुछ जगहों पर नियमों को खास कंपनियों के पक्ष में बदला जाता है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर एजेंसियां सही तरीके से काम कर रही हैं और बेहतर तकनीक सेना तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।


