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यूक्रेन का नया वॉर फॉर्मूला, ड्रोन-रोबोट असॉल्ट मॉडल कैसे बदलेगा भविष्य के युद्धों की तस्वीर

यूक्रेन ने जिस नए मॉडल की घोषणा की है, उसमें “ड्रोन-असॉल्ट यूनिट्स” बनाई जा रही हैं। इन यूनिट्स में हवाई ड्रोन, जमीन पर चलने वाले अनमैन्ड सिस्टम यानी रोबोट और पारंपरिक इन्फैंट्री को एक साथ जोड़ा गया है...

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📍नई दिल्ली | 18 Apr, 2026, 6:01 PM

Ukraine Drone War Model: 2022 से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध नई तकनीक के इस्तेमाल के मामले में बहुत अलग और खास माना जा रहा है। इसे “आधुनिक युद्ध की प्रयोगशाला” भी कहा जा रहा है। इस युद्ध की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसमें नई तकनीक को बहुत तेजी से अपनाया गया है। खासकर यूक्रेन ने सस्ती और आसानी से बनने वाली तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। वहीं ड्रोन वॉर के बाद यह युद्ध अगले स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।

हाल ही में यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने एक नए युद्ध मॉडल को लागू करने की बात कही है, जिसमें ड्रोन और जमीन पर चलने वाले रोबोट्स को सैनिकों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब युद्ध के मैदान में लगातार ड्रोन हमले हो रहे हैं और दोनों देशों की सेनाएं नई रणनीतियों की तलाश में हैं।

Ukraine Drone War Model: 2022 में ड्रोन युद्ध की शुरुआत

साल 2022 में जब युद्ध शुरू हुआ, तब यूक्रेन ने छोटे-छोटे ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया। ये ड्रोन ऊपर उड़कर दुश्मन की लोकेशन बताते थे या सीधे हमला करते थे। इन्हें एफपीवी ड्रोन कहा जाता है। उस समय ये सिर्फ मदद के लिए इस्तेमाल हो रहे थे, लेकिन जल्दी ही ये बहुत जरूरी हथियार बन गए। इन ड्रोन की मदद से यूक्रेन ने रूसी टैंकों और गाड़ियों को काफी नुकसान पहुंचाया। अब हालात यह हैं कि युद्ध में होने वाले नुकसान का बड़ा हिस्सा ड्रोन की वजह से हो रहा है।

2023 और 2024 तक आते-आते युद्ध लंबा हो चला। अब सबसे बड़ी समस्या सैनिकों की कमी बन गई। यूक्रेन की आबादी रूस से कम है, इसलिए नए सैनिक जुटाना मुश्किल होने लगा। दूसरी तरफ, हर बार सीधे हमले में सैनिकों को आगे भेजना खतरनाक साबित हो रहा था और नुकसान भी ज्यादा हो रहा था। इसी वजह से यूक्रेन ने ड्रोन और मशीनों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। (Ukraine Drone War Model)

क्या है यूक्रेन का नया वॉर मॉडल

यूक्रेन ने जिस नए मॉडल की घोषणा की है, उसमें “ड्रोन-असॉल्ट यूनिट्स” बनाई जा रही हैं। इन यूनिट्स में एरियल ड्रोन, जमीन पर चलने वाले ग्राउंड अनमैन्ड सिस्टम यानी रोबोट और पारंपरिक इन्फैंट्री को एक साथ जोड़ा गया है।

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इसके तहत अब किसी भी ऑपरेशन में पहले ड्रोन इलाके की निगरानी करेंगे, फिर ग्राउंड रोबोट्स आगे बढ़कर हमला करेंगे और आखिर में जरूरत पड़ने पर सैनिक वहां पहुंचेंगे। इससे सीधे टकराव की स्थिति कम हो जाती है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस सिस्टम को एक इंटीग्रेटेड नेटवर्क की तरह तैयार किया गया है, जहां सभी मशीनें और सैनिक एक साथ काम करते हैं। (Ukraine Drone War Model)

Ukraine Drone War Model

ग्राउंड रोबोट्स का बढ़ता इस्तेमाल

इस नए मॉडल में सबसे ज्यादा ध्यान ग्राउंड रोबोट्स पर दिया गया है। ये ऐसे छोटे या बड़े वाहन होते हैं, जिन्हें दूर से कंट्रोल किया जाता है। इनमें कैमरे, सेंसर और कई बार हथियार या विस्फोटक भी लगाए जाते हैं।

यूक्रेन की एक थर्ड असाल्ट ब्रिगेड (थर्ड आर्मी कॉर्प्स), जिसे एनसी-13 कंपनी कहा जाता है, ने ऐसे 100 से ज्यादा ऑपरेशन किए हैं। इस यूनिट का काम ही इन रोबोट्स के जरिए दुश्मन की पोजीशन पर हमला करना है।

इन ऑपरेशंस में दुश्मन के बंकर, कमांड पोस्ट और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। साथ ही इन रोबोट्स की मदद से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और घुसपैठ रोकने का काम भी किया गया।

एनसी-13 का कहना है कि अब 5-6 ग्राउंड कमिकाजे रोबोट्स और कॉम्बैट मॉड्यूल वाले रोबोट्स को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है। इससे इन्फैंट्री असॉल्ट ग्रुप की जगह पूरी तरह रोबोट्स ले लेते हैं। दुश्मन अक्सर इसे इन्फैंट्री अटैक समझकर पोजीशन छोड़ देता है। वहीं, एक रोबोट ने तो बिना सैनिकों के 45 दिनों तक फ्रंटलाइन पर ड्यूटी भी की। (Ukraine Drone War Model)

कैसे हुआ पहला बड़ा रोबोटिक हमला

इस नई रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण साल 2025 में देखने को मिला। एक जगह पर यूक्रेनी सैनिकों ने दो बार हमला किया, लेकिन हर बार उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद ग्राउंड रोबोट्स का इस्तेमाल किया गया। चार रोबोट्स को दुश्मन की पोजीशन की तरफ भेजा गया, जिनमें भारी मात्रा में विस्फोटक लगे थे।

पहले रोबोट ने बंकर की एंट्री पर धमाका किया। दूसरे रोबोट ने वहां जाकर रास्ता बंद कर दिया। इसके बाद अंदर मौजूद सैनिकों ने हालात को समझते हुए सरेंडर कर दिया।

इस पूरी कार्रवाई में किसी भी सैनिक को सीधे लड़ाई में शामिल नहीं होना पड़ा। बाद में जब सैनिक वहां पहुंचे, तो बिना किसी गोलीबारी के इलाके पर कब्जा कर लिया गया।

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इस मॉडल ने दक्षिणी मोर्चे पर फरवरी 2026 से अब तक बड़े क्षेत्र को आजाद कराया है। मंत्रालय के अनुसार, अब तक दसियों हजार अनमैन्ड ग्राउंड सिस्टम्स (UGVs) तैयार हो चुके हैं, जो सैनिकों की जगह ले सकते हैं।

ब्रिगेड ने इसे “दुनिया का पहला रोबोटिक असॉल्ट बताया, जिसमें कैदियों को बिना इन्फैंट्री के अरेस्ट किया गया।” वहीं, जेलेंस्की ने इसे एतिहासिक बताया था। (Ukraine Drone War Model)

हवाई ड्रोन और रोबोट्स का टीमवर्क

इस नए मॉडल में सिर्फ ग्राउंड रोबोट्स ही नहीं, बल्कि हवाई ड्रोन भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। ड्रोन पहले इलाके की तस्वीरें और वीडियो भेजते हैं, जिससे यह पता चलता है कि दुश्मन कहां है।

इसके बाद रोबोट्स को उसी दिशा में भेजा जाता है। ड्रोन लगातार ऊपर से नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत जानकारी देते रहते हैं।

इस तरह से जमीन और आसमान दोनों से एक साथ ऑपरेशन चलता है, जिससे सटीक हमला करना आसान हो जाता है। (Ukraine Drone War Model)

सैनिकों की भूमिका में बदलाव

इस सिस्टम के आने के बाद सैनिकों की भूमिका भी बदल रही है। अब उन्हें सीधे आगे बढ़कर हमला करने की जरूरत कम पड़ रही है। रोबोट्स पहले दुश्मन की पोजीशन को कमजोर करते हैं। उसके बाद सैनिक वहां पहुंचकर इलाके को सुरक्षित करते हैं। इससे जान का खतरा कम होता है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने 13 अप्रैल को डिफेंस इंडस्ट्री वर्कर्स डे पर कहा है कि कई जगहों पर रोबोट्स और ड्रोन की मदद से बिना किसी सैनिक नुकसान के दुश्मन की पोजिशंस पर कब्जा किया गया। वो भी बिना किसी इन्फैंट्री के और बिना किसी नुकसान के। उन्होंने 3 महीनों में 22,000 से ज्यादा फ्रंटलाइन ड्रोन मिशन्स का भी जिक्र किया। (Ukraine Drone War Model)

बड़े स्तर पर तैयार हो रहे रोबोट्स

यूक्रेन अब बड़ी संख्या में ऐसे रोबोट्स और ड्रोन तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि हजारों की संख्या में ये सिस्टम बनाए जा चुके हैं और लगातार उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। यूक्रेन में 280 से ज्यादा कंपनियां रोबोट/ड्रोन बना रही हैं। वहीं, इस साल 20,000 से ज्यादा UGVs का टारगेट है। इसके अलावा नॉर्वे-जर्मनी जैसे देशों से भी जॉइंट प्रोडक्शन हो रहा है।

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इनमें अलग-अलग तरह के रोबोट शामिल हैं। कुछ केवल निगरानी के लिए हैं, कुछ सामान पहुंचाने के लिए और कुछ हमले के लिए बनाए गए हैं।

कुछ रोबोट्स में मशीन गन जैसे हथियार भी लगाए गए हैं, जिससे वे दुश्मन पर सीधा हमला कर सकते हैं।

तकनीक कैसे कर रही मदद

इन रोबोट्स और ड्रोन में एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें थर्मल कैमरे लगे होते हैं, जिससे रात में भी साफ नजर आता है।

इसके अलावा कई सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से काम करते हैं, जिससे वे टारगेट को पहचान सकते हैं। इन्हें सैटेलाइट इंटरनेट और रेडियो सिस्टम के जरिए दूर से कंट्रोल किया जाता है। कई मामलों में एक ही ऑपरेटर कई रोबोट्स और ड्रोन को एक साथ कंट्रोल कर सकता है।

NC-13 कमांडर माइकोला “माकर” जिन्केविच कहते हैं कि रोबोट्स युद्ध का रुख बदल देंगे। मंत्रालय का मानना है कि ये यूनिट्स “लोगों को रिप्लेस” कर रही हैं।

यूक्रेन के इस नए मॉडल से यह साफ हो रहा है कि युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब सीधे आमने-सामने लड़ाई की जगह मशीनों और ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

ड्रोन और रोबोट्स के जरिए पहले जानकारी जुटाई जाती है, फिर हमला किया जाता है और आखिर में सैनिक आगे बढ़ते हैं। इस पूरे सिस्टम को एक साथ जोड़कर ऑपरेशन किया जा रहा है। इस बदलाव ने युद्ध के मैदान में नई तरह की रणनीति को जन्म दिया है, जहां टेक्नोलॉजी और सैनिक दोनों मिलकर काम कर रहे हैं। (Ukraine Drone War Model)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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