📍जम्मू | 18 Apr, 2026, 6:44 PM
JK Police Anti Terror Training: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने की तैयारियों को और मजबूत करने के लिए भारतीय सेना अब सीधे पुलिस बल को ट्रेनिंग दे रही है। टाइगर डिविजन के तहत आयोजित खास काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म रिफ्रेशर कोर्स की ट्रेनिंग जम्मू-कश्मीर पुलिस को दी गई, जिसमें जवानों को जमीनी ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया।
यह कोर्स 7 अप्रैल से 18 अप्रैल तक आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस के जवानों को अलग-अलग ऑपरेशनल हालात से निपटने की ट्रेनिंग दी गई।
यह ट्रेनिंग भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मिलकर तैयार की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, ऑपरेशन के दौरान एक जैसी प्रक्रिया अपनाना और जमीनी स्तर पर काम करने वाले जवानों की क्षमता को मजबूत करना था। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में यह समन्वय बेहद जरूरी माना जाता है।
JK Police Anti Terror Training: 108 जवानों ने लिया हिस्सा
इस कोर्स में कुल 108 पुलिसकर्मियों ने भाग लिया। ट्रेनिंग मिरान साहिब ब्रिगेड की ओर से कराई गई। खास ध्यान जूनियर लीडरशिप पर रखा गया, क्योंकि छोटे-छोटे टीम ऑपरेशन में यही अधिकारी सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। इनकी बेहतर तैयारी से पूरे ऑपरेशन की सफलता तय होती है।
ट्रेनिंग के दौरान जवानों को कई तरह के हालात के लिए तैयार किया गया। इसमें स्मॉल टीम ऑपरेशंस और पेट्रोलिंग की बारीकियां सिखाई गईं। क्विक रिएक्शन टीम और मोबाइल व्हीकल चेक पोस्ट ड्रिल्स पर भी अभ्यास कराया गया, ताकि अचानक आने वाले खतरे का तुरंत जवाब दिया जा सके।
इसके अलावा एम्बुश और काउंटर एम्बुश तकनीक, कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन और रूम इंटरवेंशन जैसी प्रक्रियाओं पर भी विस्तार से अभ्यास कराया गया। इन सभी का इस्तेमाल आतंकवाद विरोधी अभियानों में किया जाता है।
आधुनिक तकनीक और हथियारों पर फोकस
कोर्स में सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक पर भी खास ध्यान दिया गया। जवानों को हथियारों के इस्तेमाल और फायरिंग की ट्रेनिंग दी गई। साथ ही नए इक्विपमेंट्स के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई।
ड्रोन की पहचान और काउंटर ड्रोन उपायों की भी ट्रेनिंग दी गई, क्योंकि हाल के समय में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके अलावा फर्स्ट एड, कैजुअल्टी एवैकुएशन और इंटेलिजेंस कलेक्शन जैसे विषयों को भी शामिल किया गया।
प्रैक्टिकल एक्सरसाइज से बढ़ी समझ
ट्रेनिंग के दौरान सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल एक्सरसाइज पर ज्यादा जोर दिया गया। जवानों ने अलग-अलग ऑपरेशनल सिचुएशन में रिहर्सल किए, जिससे उन्हें वास्तविक हालात का अनुभव मिला। हाई-टेक सर्विलांस इक्विपमेंट, ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम्स से भी उन्हें परिचित कराया गया।
बेहतर तालमेल पर जोर
इस पूरे कोर्स का मकसद सेना और पुलिस के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन बनाना था। साझा ऑपरेशन के दौरान एक जैसी समझ और भरोसा होना जरूरी होता है। इस तरह की ट्रेनिंग से दोनों के बीच तालमेल और मजबूत होता है, जिससे किसी भी सुरक्षा चुनौती का जवाब बेहतर तरीके से दिया जा सकता है।



