📍नई दिल्ली | 15 Apr, 2026, 1:12 PM
Ajeet Drone: भारतीय सेना की निगरानी और ऑपरेशन क्षमता को मजबूत करने के लिए चेन्नई की कंपनी जुप्पा जियो नेविगेशन टेक्नोलॉजीज ने पिछले तीन महीनों में सेना को 500 से ज्यादा साइबर-सिक्योर “अजीत” सीरीज के ड्रोन सौंपे हैं। यह डिलीवरी जनवरी से अप्रैल के बीच पूरी की गई है और इन ड्रोन को खास तौर पर फ्रंटलाइन यूनिट्स के लिए तैयार किया गया है।
क्या है Ajeet Drone सीरीज
अजीत सीरीज छोटे और हल्के ड्रोन का एक परिवार है, जिसे निगरानी और जानकारी जुटाने के काम के लिए बनाया गया है। सेना इन्हें दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, इलाके की तस्वीरें लेने और रियल टाइम जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल करती है।
इन ड्रोन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सैनिक इन्हें आसानी से अपने साथ ले जा सकें। कुछ मॉडल इतने छोटे हैं कि बैकपैक में रखकर भी ले जाए जा सकते हैं।
साइबर सिक्योरिटी पर फोकस
इन ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत उनकी साइबर सुरक्षा मानी जा रही है। आज के समय में ड्रोन सिर्फ उड़ने वाली मशीन नहीं रहे, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में हैकिंग, जैमिंग और स्पूफिंग जैसे खतरे बढ़ गए हैं।
अजीत ड्रोन को इन खतरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनमें इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और सॉफ्टवेयर ज्यादातर देश में ही तैयार किए गए हैं। इससे बाहरी सिस्टम पर निर्भरता कम होती है और सुरक्षा बेहतर रहती है।
इनमें कंपनी का अपना ऑटो पायलट सिस्टम “नवगति” लगाया गया है, जो ऐसे इलाकों में भी काम कर सकता है जहां जीपीएस सिग्नल उपलब्ध नहीं होते।
ये ड्रोन खास तौर पर ऐसे इलाकों के लिए बनाए गए हैं जहां इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का खतरा ज्यादा होता है। यानी दुश्मन रेडियो सिग्नल को जैम करने या सिस्टम को भ्रमित करने की कोशिश कर सकता है।
अजीत ड्रोन इन हालात में भी अपनी दिशा और काम को बनाए रखने में सक्षम हैं। कुछ बड़े मॉडल लगभग एक घंटे तक उड़ान भर सकते हैं और कई किलोमीटर तक की दूरी कवर कर सकते हैं।
इनमें डे और नाइट कैमरा लगे होते हैं, जिससे दिन और रात दोनों समय निगरानी की जा सकती है।
कंपनी ने सेना के जवानों को इन ड्रोन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी है। इस ट्रेनिंग में ड्रोन उड़ाना, उनकी देखभाल करना और एक साथ कई ड्रोन चलाने की तकनीक शामिल है। इसका मकसद यह है कि सेना की यूनिट्स खुद ही अलग-अलग ऑपरेशन में इनका इस्तेमाल कर सकें।
स्वॉर्म ऑपरेशन की क्षमता
इन ड्रोन की एक खास क्षमता यह भी है कि इन्हें एक साथ समूह में उड़ाया जा सकता है। इसे स्वॉर्म ऑपरेशन कहा जाता है। इस तकनीक में कई ड्रोन मिलकर एक साथ काम करते हैं, जिससे निगरानी का दायरा बढ़ जाता है और ज्यादा जानकारी एक साथ मिल सकती है।
बता दें कि भारत लंबे समय तक विदेशी ड्रोन, खासकर चीनी कंपनियों के सिस्टम पर निर्भर रहा है। लेकिन अब सरकार और सेना दोनों ही इस निर्भरता को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। अजीत सीरीज को इसी लक्ष्य के तहत विकसित किया गया है। इसमें हार्डवेयर से लेकर सॉफ्टवेयर तक अधिकतर चीजें देश में ही बनाई गई हैं।
यह पहली बार नहीं है जब इस कंपनी ने सेना को ड्रोन दिए हों। इससे पहले भी अलग-अलग ऑपरेशन के दौरान इनके ड्रोन इस्तेमाल में लाए जा चुके हैं। कंपनी ने पहले भी कई ड्रोन सिस्टम और स्वॉर्म टेक्नोलॉजी सेना को उपलब्ध कराई है।
कंपनी का फोकस सिर्फ ड्रोन बनाने पर नहीं, बल्कि पूरी अनमैन्ड सिस्टम टेक्नोलॉजी को विकसित करने पर है। इसमें नेविगेशन, ऑटो पायलट और डेटा प्रोसेसिंग जैसे हिस्से शामिल हैं।
इन ड्रोन के शामिल होने से सेना की निगरानी क्षमता को सीधा फायदा मिलेगा। खास तौर पर सीमावर्ती इलाकों और संवेदनशील क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल बढ़ेगा, जहां लगातार नजर बनाए रखना जरूरी होता है।

