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भारत के NOTAM ट्रैप में फिर फंसा चीनी जासूसी जहाज, आया था मिसाइल डेटा लेने, लौटा खाली हाथ

सात अप्रैल को भारत ने 1780 किमी की रेंज का NOTAM यानी “नोटिस टू एयरमेन” जारी किया था। मना जा रहा था कि यह कोई लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण हो सकता है। इसी दौरान चीन का युआन वांग-07 जहाज सुंडा स्ट्रेट के रास्ते हिंद महासागर में दाखिल होने लगा...

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📍नई दिल्ली | 14 Apr, 2026, 6:57 PM

NOTAM India Missile Test: भारत ने एक बार फिर बंगाल की खाड़ी में चीन के साथ कैट एंड माउस गेम खेला है। जिसमें चीनी शिप की एख बार फिर फजीहत हुई है। भारत ने सात अप्रैल को NOTAM यानी “नोटिस टू एयरमेन” जारी किया था। इसी दौरान चीन का मिसाइल ट्रैकिंग शिप हिंद महासागर क्षेत्र में पहुंच गया। वहीं भारत ने चीन के खेल को समझते हुए नोटम कैंसिल कर दिया।

NOTAM India Missile Test: क्या होता है NOTAM और क्यों जारी किया जाता है

जब भी भारत कोई मिसाइल टेस्ट करने की तैयारी करता है, तो पहले से एक बड़ा इलाका खाली कराया जाता है। इसके लिए NOTAM जारी किया जाता है। इसका मतलब होता है कि उस क्षेत्र में कुछ समय के लिए हवाई और समुद्री गतिविधियां सीमित रहेंगी। आमतौर पर यह इलाका सैकड़ों से लेकर हजारों किलोमीटर तक फैला होता है।

इसका सीधा उद्देश्य सुरक्षा होता है, ताकि टेस्ट के दौरान कोई सिविल एयरक्राफ्ट या जहाज उस इलाके में न पहुंचे। लेकिन यही NOTAM अब एक तरह का संकेत भी बन गया है, जिसे दूसरे देश, खासकर चीन, बहुत ध्यान से देखता है।

कैसे काम करते हैं चीनी ट्रैकिंग शिप

चीन के पास “युआन वांग” सीरीज के खास जहाज हैं, जिन्हें मिसाइल और सैटेलाइट ट्रैक करने के लिए बनाया गया है। ये जहाज बेहद एडवांस रडार और एंटीना सिस्टम से लैस होते हैं। इनका काम किसी भी मिसाइल टेस्ट के दौरान उसकी स्पीड, रास्ता और बाकी तकनीकी जानकारी जुटाना होता है।

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जैसे ही भारत NOTAM जारी करता है, ये जहाज उस इलाके के पास पहुंचने की कोशिश करते हैं। इसका मकसद टेस्ट के दौरान ज्यादा से ज्यादा डेटा इकट्ठा करना होता है।

सात अप्रैल को भी भारत ने 12 से 14 अप्रैल के लिए 1780 किमी की रेंज का NOTAM यानी “नोटिस टू एयरमेन” जारी किया था। मना जा रहा था कि यह कोई लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण हो सकता है। इसी दौरान चीन का युआन वांग-07 जहाज सुंडा स्ट्रेट के रास्ते हिंद महासागर में दाखिल होने लगा।

लेकिन 13 अप्रैल को अचानक NOTAM कैंसल कर दिया गया। नतीजा यह रहा कि चीनी जहाज, जो खास तौर पर डेटा इकट्ठा करने आया था, उसे कुछ हासिल नहीं हुआ।

हालांकि भारत ने 14 अप्रैल को बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में फिर एक नया NOTAM यानी “नोटिस टू एयरमेन” जारी किया है। यह नोटिस 20 अप्रैल सुबह 10 बजे से 24 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान 170 किमी के इलाके में हवाई गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

पहले भी कई बार हो चुका है ऐसा

यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो। पिछले कुछ सालों में कई बार इसी तरह की स्थिति बनी है। कई बार NOTAM जारी हुआ और फिर अचानक रद्द कर दिया गया।

भारत ने पिछले साल दिसंबर के दौरान कई बार अलग-अलग तारीखों पर NOTAM जारी किए थे, जैसे 1 से 4 दिसंबर, 17 से 20 दिसंबर और 22 से 24 दिसंबर। इन NOTAM की रेंज 3500 किलोमीटर तक रखी गई थी। जैसे ही ये NOTAM जारी होते, चीन के 4 से 5 रिसर्च वैसल तुरंत उस इलाके के आसपास पहुंच जाते। इनमें शी यान-6, शेन हाय यी हाओ, लान हाई 101 और द यांग यी हाओ जैसे जहाज शामिल थे।

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इसी दौरान चीन के कुछ युद्धपोत भी वहां मौजूद थे। ये सभी जहाज चीन के 48वें एंटी-पायरेसी एस्कॉर्ट फोर्स का हिस्सा थे, जो उस समय गल्फ ऑफ एडन के आसपास तैनात थे। ये जहाज मिसाइल की दिशा, उसकी गति, टेलीमेट्री डेटा, ध्वनि संकेत और गिरने वाले हिस्सों तक की जानकारी जुटाने में सक्षम होते हैं।

भारत ने भी इस पैटर्न को समझ लिया था। जैसे ही चीनी जहाज उस इलाके में पहुंचते, भारत NOTAM रद्द कर देता था। इससे चीन के जहाजों को कोई फायदा नहीं मिलता, उनका समय और ईंधन खर्च होता और उनकी लोकेशन भी सामने आ जाती। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी कहा था कि ऐसी स्थिति में टेस्ट को “रीकैलिब्रेट” करना अब एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है।

क्या यह सिर्फ संयोग है या रणनीति

सोशल मीडिया पर इसे मजाक के तौर पर भी देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर रणनीति मानी जा रही है। क्योंकि NOTAM एक पब्लिक डॉक्यूमेंट होता है, जिसे कोई भी देख सकता है। चीन भी इसी जानकारी के आधार पर अपने जहाज भेजता है।

लेकिन भारत अब इस प्रक्रिया का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहा है। जब चीनी जहाज तय जगह पर पहुंच जाते हैं, तो टेस्ट को आगे खिसका दिया जाता है या उनका समय बदल दिया जाता है।

इस पूरे खेल में भारत को कई तरह के फायदे मिलते हैं। सबसे पहला फायदा यह है कि चीन को मिसाइल से जुड़ा कोई डेटा नहीं मिल पाता। दूसरा, चीन के जहाजों को बार-बार लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनका समय और संसाधन खर्च होता है।

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तीसरा, भारत को यह समझने में मदद मिलती है कि चीन कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देता है और उसकी निगरानी क्षमता कैसी है। चौथा, भारतीय नौसेना को भी इन जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने का मौका मिलता है।

भारत की तैयारी भी है मजबूत

भारत के पास भी अब अपना मिसाइल ट्रैकिंग जहाज है, जिसे आईएनएस ध्रुव कहा जाता है। यह जहाज इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और मिसाइल ट्रैकिंग में सक्षम है। इसके जरिए भारत खुद भी समुद्र में होने वाली गतिविधियों पर नजर रख सकता है।

इसके अलावा अंडमान-निकोबार और बंगाल की खाड़ी जैसे इलाके भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं। यहां से गुजरने वाले समुद्री रास्तों पर नजर रखना जरूरी माना जाता है।

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