HomeIndian Armyभारतीय सेना को चाहिए नया ‘ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम’, स्वॉर्म अटैक से निपटने...

भारतीय सेना को चाहिए नया ‘ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम’, स्वॉर्म अटैक से निपटने की है तैयारी, जारी की RFI

इस प्रस्तावित सिस्टम को ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम यानी डीआईएस कहा गया है। यह एक ऐसा सिस्टम होगा जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही रोक सके और उन्हें नष्ट कर सके...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 25 Feb, 2026, 3:01 PM

Drone Interception System RFI: भारतीय सेना अब ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रही है। रूस-यूक्रेन जंग से सबक लेते हुए आर्मी एयर डिफेंस विंग एक अहम रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन यानी आरएफआई जारी किया है। जिसमें ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम की खरीद के लिए कंपनियों से जानकारी मांगी गई है। यह सिस्टम खास तौर पर छोटे और कम रडार सिग्नेचर वाले ड्रोन और यूएएस यानी अनमैन्ड एरियल सिस्टम से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। हाल के समय में ड्रोन और स्वॉर्म अटैक का खतरा तेजी से बढ़ा है, इसलिए सेना अब ऐसे सिस्टम की तलाश में है जो इन खतरों का सीधे मुकाबला कर सके। (Drone Interception System RFI)

Drone Interception System RFI: क्या है यह RFI और क्यों जारी हुआ?

यह आरएफआई सेना के एयर डिफेंस निदेशालय द्वारा जारी किया गया है और इसका मकसद कंपनियों से तकनीकी और ऑपरेशनल जानकारी जुटाना है। यह कोई फाइनल खरीद प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आगे आने वाले टेंडर और ट्रायल की तैयारी का पहला चरण माना जाता है। इसमें साफ किया गया है कि सरकार इस प्रक्रिया को कभी भी बदल या रद्द कर सकती है और यह पूरी प्रक्रिया डीएपी 2020 के नियमों के तहत आगे बढ़ेगी। (Drone Interception System RFI)

तीन हिस्सों में पूरा नेटवर्क

इस प्रस्तावित सिस्टम को ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम यानी डीआईएस कहा गया है। यह एक ऐसा सिस्टम होगा जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही रोक सके और उन्हें नष्ट कर सके। इसमें तीन मुख्य हिस्से होंगे, जिनमें एक ड्रोन सेंसर, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और चार ड्रोन इंटरसेप्टर शामिल होंगे। इन तीनों हिस्सों के जरिए पूरा सिस्टम मिलकर काम करेगा और दुश्मन के ड्रोन पर नजर रखने से लेकर उसे खत्म करने तक का पूरा काम करेगा। (Drone Interception System RFI)

ड्रोन सेंसर: आसमान पर 360 डिग्री नजर

ड्रोन सेंसर इस सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा होगा। यह सेंसर इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे तकनीक पर आधारित होगा। इसका काम आसमान में हर दिशा में नजर रखना होगा और एक साथ कम से कम 20 ड्रोन को पहचानना, ट्रैक करना और उनकी प्राथमिकता तय करना होगा। यह सेंसर बहुत छोटे ड्रोन को भी कई किलोमीटर दूर से पकड़ सकेगा और उनकी लोकेशन, दिशा और ऊंचाई की जानकारी देगा। (Drone Interception System RFI)

यह भी पढ़ें:  SC Slams Centre and Army: सेना और केंद्र पर क्यों भड़का सुप्रीम कोर्ट? शहीद की विधवा की पेंशन पर सरकार की अपील को बताया ‘अनुचित’

ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन: पूरा ऑपरेशन यहीं से कंट्रोल

इसके बाद यह जानकारी ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक पहुंचेगी। यह स्टेशन एक तरह का कंट्रोल सेंटर होगा, जिसमें लैपटॉप या टैबलेट आधारित सिस्टम होगा। इसमें ऑपरेटर को सभी जरूरी जानकारी रियल टाइम में दिखाई देगी। यह स्टेशन ड्रोन इंटरसेप्टर को कमांड देगा और उसे टारगेट तक पहुंचाएगा। इसमें डेटा रिकॉर्डिंग की सुविधा भी होगी, जिससे मिशन के बाद पूरा विश्लेषण किया जा सकेगा। यह स्टेशन आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकेगा और फील्ड में जल्दी तैनात किया जा सकेगा। (Drone Interception System RFI)

ड्रोन इंटरसेप्टर: हवा में ही दुश्मन का खात्मा

ड्रोन इंटरसेप्टर इस पूरे सिस्टम का सबसे एक्टिव पार्ट होगा। यह एक खास तरह का ड्रोन होगा जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही खत्म करेगा। इसमें दो तरह की क्षमता होगी, एक काइनेटिक यानी सीधे टक्कर मारकर दुश्मन ड्रोन को गिराना और दूसरा हाई एक्सप्लोसिव यानी विस्फोट के जरिए उसे नष्ट करना। यह इंटरसेप्टर पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा और फायर एंड फॉरगेट तकनीक पर काम करेगा। यानी एक बार लॉन्च होने के बाद यह खुद ही लक्ष्य तक पहुंचकर हमला करेगा।

हर इलाके में तैनाती के लिए तैयार

इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह हर तरह के भारतीय इलाके में काम कर सके। चाहे रेगिस्तान हो, पहाड़ी इलाका हो, समुद्र के पास का क्षेत्र हो या फिर ऊंचाई वाले इलाके, हर जगह यह सिस्टम काम करने में सक्षम होगा। इसे माइनस 20 डिग्री से लेकर प्लस 45 डिग्री तापमान तक चलाने की क्षमता रखनी होगी और नमी वाले वातावरण में भी यह काम कर सकेगा। (Drone Interception System RFI)

यह भी पढ़ें:  स्वदेशी सब-मशीन गन ‘अस्मी’ के डिजाइनर कर्नल प्रसाद बंसोड़ को मिला बड़ा सम्मान, SMG की सेनाओं में लगातार बढ़ रही डिमांड

आकाशतीर से इंटीग्रेशन

इस सिस्टम की एक खास बात यह भी है कि इसे मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम और आकाशतीर जैसे नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा। इससे सेना को एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल मिलेगा और सभी सिस्टम आपस में जुड़कर तेजी से काम कर सकेंगे। इसमें एंटी-जैमिंग क्षमता भी होगी, जिससे दुश्मन अगर इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग की कोशिश करे तो भी सिस्टम सही तरीके से काम करता रहेगा।

सॉफ्टवेयर और AI की भूमिका

इसमें इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर पूरी तरह स्वदेशी होगा और भविष्य में इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक को इंटीग्रेट करने की भी संभावना रखी गई है। सिस्टम में डेटा स्टोरेज की सुविधा भी होगी, जिससे एक महीने तक का डेटा सुरक्षित रखा जा सकेगा और बाद में उसे ट्रेनिंग या विश्लेषण के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

स्वदेशी तकनीक पर जोर

सेना ने इस आरएफआई में कंपनियों के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं। इसमें कहा गया है कि कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा स्वदेशी होना चाहिए। यानी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट भारत में बने होने चाहिए। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कंपनियों को अपनी जानकारी 25 मार्च तक जमा करनी होगी। इसके बाद सेना इन प्रस्तावों का अध्ययन करेगी और आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें ट्रायल, टेक्निकल इवैल्यूएशन और कॉन्ट्रैक्ट नेगोशिएशन जैसे कई चरण शामिल होंगे।

इस पूरी प्रक्रिया में स्टार्टअप और एमएसएमई कंपनियों को भी मौका दिया जा रहा है। छोटे उद्यमों के लिए कुछ वित्तीय शर्तों में छूट भी दी गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा भारतीय कंपनियां इसमें भाग ले सकें। (Drone Interception System RFI)

यह भी पढ़ें:  Ran Samwad 2025 Training Reforms: भारतीय सेना में बड़े बदलाव की तैयारी, अब ट्रेनिंग में ड्रोन और साइबर वॉरफेयर होंगे शामिल

बढ़ते ड्रोन खतरे के बीच अहम पहल

इस सिस्टम की जरूरत इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि आधुनिक युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। छोटे ड्रोन भी अब बड़े नुकसान पहुंचा सकते हैं और स्वॉर्म अटैक यानी एक साथ कई ड्रोन के हमले को रोकना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में यह ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम सेना की सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। (Drone Interception System RFI)

Author

  • Herry Photo

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular