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भारत आएगी मिड-एयर एडवांस्ड रिफ्यूलिंग तकनीक, पारस डिफेंस ने किया नॉर्थस्टार के साथ समझौता

मिड-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम से किसी भी एयरक्राफ्ट की रेंज और एंड्योरेंस बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि वह ज्यादा दूरी तक जा सकता है और लंबे समय तक ऑपरेशन कर सकता है...

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📍नई दिल्ली | 18 Apr, 2026, 8:04 PM

Air to Air Refuelling India: भारतीय डिफेंस कंपनी पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने अमेरिका की कंपनी बंडाक एविएशन (डीबीए नॉर्थस्टार) के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत भारत में एडवांस्ड एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम लाए जाएंगे।

यह करार भारतीय कंपनी पारस डिफेंस और अमेरिकी कंपनी नॉर्थस्टार के बीच हुआ है। इसका मकसद भारतीय सेना, खासकर वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मिड-एयर फ्यूलिंग सिस्टम और उससे जुड़े सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराना है। इस सहयोग के जरिए भारत में ऐसी तकनीक लाई जाएगी, जो पहले से कई देशों में इस्तेमाल हो रही है।

मुंबई स्थित पारस डिफेंस के अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता कंपनी की एयरोस्पेस क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं नॉर्थस्टार ने भी इस साझेदारी को भरोसेमंद और हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम उपलब्ध कराने की दिशा में अहम बताया है। (Air to Air Refuelling India)

Air to Air Refuelling India: क्या होती है एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग

एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, जिसे एरियल रिफ्यूलिंग भी कहा जाता है, एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक विमान हवा में उड़ते हुए दूसरे विमान को ईंधन देता है। इसमें एक टैंकर एयरक्राफ्ट होता है, जो दूसरे फाइटर या ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को बीच आसमान में ही फ्यूल सप्लाई करता है।

इस प्रक्रिया से विमान को जमीन पर उतरकर ईंधन भरवाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मिशन के दौरान समय बचता है और विमान ज्यादा देर तक हवा में रह सकता है। (Air to Air Refuelling India)

क्यों है यह तकनीक अहम

मिड-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम से किसी भी एयरक्राफ्ट की रेंज और एंड्योरेंस बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि वह ज्यादा दूरी तक जा सकता है और लंबे समय तक ऑपरेशन कर सकता है।

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इसका इस्तेमाल लंबी दूरी के मिशन, मैरिटाइम पेट्रोलिंग और रिकॉनिसेंस ऑपरेशन में किया जाता है। इसके अलावा अचानक किसी क्षेत्र में तेजी से पहुंचने के लिए भी यह तकनीक मददगार होती है।

भारतीय वायुसेना पहले से इस तरह की क्षमता का इस्तेमाल करती है, लेकिन बढ़ती जरूरतों के चलते अब नई और एडवांस तकनीक की मांग बढ़ी है। (Air to Air Refuelling India)

इस समझौते के बाद भारत में एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम से जुड़े उपकरण और सर्विस उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही देश में ही मेंटेनेंस और रिपेयर से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना भी है।

इससे विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है और सिस्टम की देखभाल में तेजी आएगी। साथ ही भारतीय कंपनियों को नई तकनीक के साथ काम करने का मौका मिलेगा।

भारत फिलहाल आईएल-78 टैंकर एयरक्राफ्ट के जरिए मिड-एयर फ्यूलिंग की सुविधा इस्तेमाल करता है, लेकिन बदलती जरूरतों और नए एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म्स को देखते हुए ज्यादा एडवांस और स्वदेशी एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम की मांग बढ़ रही है। खास तौर पर एएमसीए और ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर जैसे भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए यह क्षमता और जरूरी मानी जा रही है।

नॉर्थस्टार की तकनीक पहले से कई प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल हो रही है और इसे भरोसेमंद माना जाता है। इसी वजह से इसके सिस्टम्स को अलग-अलग एयरक्राफ्ट के साथ जोड़ा जा सकता है। इसमें सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, तेजस एमके-2 जैसे फाइटर जेट और सी-17 या आईएल-78 जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल हैं। (Air to Air Refuelling India)

पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड एक भारतीय कंपनी है, जो डिफेंस और स्पेस सेक्टर में काम करती है। यह कंपनी अलग-अलग तरह के डिफेंस इक्विपमेंट और सिस्टम डिजाइन और तैयार करती है।

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कंपनी ऑप्ट्रॉनिक्स, सर्विलांस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। यह एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में पनडुब्बियों के लिए ऑप्ट्रॉनिक पेरिस्कोप बनाने वाली एकमात्र भारतीय कंपनी मानी जाती है।

वहीं, नॉर्थस्टार एक अमेरिकी कंपनी है, जिसे एरियल रिफ्यूलिंग सिस्टम के क्षेत्र में विशेषज्ञ माना जाता है। यह कंपनी डिजाइन, डेवलपमेंट और सप्लाई से लेकर इन सिस्टम्स को अपग्रेड करने तक का काम करती है। इसके सिस्टम दुनिया के कई एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल किए जाते हैं। (Air to Air Refuelling India)

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