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भारत में बनेगा 5 टन का ताकतवर ड्रोन, भारत-जर्मनी मिलकर बनाएंगे 40 घंटे उड़ान भरने वाला AeroForce X

इस समझौते का मकसद भारत में ही बड़े और आधुनिक अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी यूएवी तैयार करना है। यह ड्रोन सिस्टम मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस और हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस कैटेगरी में आएगा, जिन्हें शॉर्ट में MALE और HALE कहा जाता है...

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📍नई दिल्ली/म्यूनिख | 24 Apr, 2026, 1:14 PM

AeroForce X UAV India Germany Deal: भारत और जर्मनी अब डिफेंस सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जर्मनी की एयरोडेटा एजी और भारत की डायनॉटन सिस्टम्स ने एक समझौते पर दस्तखत किए हैं। इस समझौते के तहत भारत में एक नए तरह के एडवांस्ड ड्रोन यानी यूएवी प्लेटफॉर्म “एयरोफोर्स एक्स” का को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म खासतौर पर निगरानी और खुफिया मिशनों के लिए तैयार किया जाएगा। बता दें कि रक्षा मंत्री ने भी अपने जमर्नी दौरे में को-डेवलप और को-प्रोड्यूस करने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि आज के समय में भरोसेमंद साझेदारी कोई विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है। भारत जर्मन इंडस्ट्री को एडवांस टेक्नोलॉजी में हमारे साथ मिलकर को-डेवलप और को-प्रोड्यूस करने के लिए आमंत्रित करता है।

AeroForce X UAV India Germany Deal: भारत में बनेगा एडवांस्ड यूएवी प्लेटफॉर्म

डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के प्रमुख डॉ. उदयंत टोबी मल्होत्रा ने कहा कि जर्मनी की कंपनी एयरोडेटा एजी और डायनॉटन सिस्टम्स, जो डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज का हिस्सा है, ने मिलकर एक नया ड्रोन सिस्टम बनाने का फैसला किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत “एयरोफोर्स एक्स” नाम का एडवांस्ड यूएवी भारत में बनाया जाएगा।

22 अप्रैल को हुए इस समझौते का मकसद भारत में ही बड़े और आधुनिक अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी यूएवी तैयार करना है। यह ड्रोन सिस्टम मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस और हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस कैटेगरी में आएगा, जिन्हें शॉर्ट में MALE और HALE कहा जाता है।

यह प्लेटफॉर्म करीब 5 टन वेट कैटेगरी का होगा और लंबे समय तक लगातार उड़ान भर सकेगा। इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह पहाड़ी इलाकों और समुद्री क्षेत्रों दोनों में काम कर सके। (AeroForce X UAV India Germany Deal)

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AeroForce X UAV India Germany Deal

लंबी उड़ान और ऊंचाई इसकी खासियत

एयरोफोर्स एक्स एक नया और एडवांस्ड ड्रोन सिस्टम है, जिसे एमएएलई यूएएस कहा जाता है। इसका वजन लगभग 5 टन है, यानी यह काफी बड़ा और ताकतवर प्लेटफॉर्म है। इसमें करीब सेंसर और कैमरे समेत 1300 किलो तक के उपकरण लगाए जा सकते हैं।

यह ड्रोन एक बार में करीब 40 घंटे तक लगातार उड़ सकता है, इसलिए लंबे समय तक निगरानी करने के लिए यह बहुत उपयोगी है। इसका एक वर्जन 30 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ सकता है, जबकि दूसरा वर्जन 50 हजार फीट से भी ऊपर उड़ान भर सकता है।

इसकी एक खास बात यह भी है कि यह ITAR-फ्री प्लेटफॉर्म है, यानी इस पर अमेरिकी एक्सपोर्ट नियमों की पाबंदी नहीं होगी। इससे दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करना आसान हो जाता है। (AeroForce X UAV India Germany Deal)

हिमालय और समुद्र दोनों पर नजर

इस प्लेटफॉर्म को खास तौर पर हिमालय क्षेत्र और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए तैयार किया जा रहा है। हिमालय में ऊंचाई और मौसम बड़ी चुनौती होती है, जहां लंबे समय तक निगरानी रखना आसान नहीं होता। ऐसे में यह ड्रोन लगातार उड़ान भरकर इलाके पर नजर रख सकेगा।

वहीं समुद्री क्षेत्र में इसका इस्तेमाल समुद्री निगरानी, गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षा से जुड़े कामों में किया जा सकेगा। यह प्लेटफॉर्म इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर मिशनों के लिए उपयोगी होगा।

इस प्रोजेक्ट में भारतीय कंपनी डायनॉटन सिस्टम्स की अहम भूमिका होगी। कंपनी अपने खुद के विकसित सॉफ्टवेयर, कस्टम हार्डवेयर और सेंसर सिस्टम इस प्लेटफॉर्म में लगाएगी। बताया गया है कि इसमें 50 लाख लाइनों का कोड इस्तेमाल किया जाएगा, जो पूरे सिस्टम को कंट्रोल करेगा।

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इसे प्लेटफॉर्म का “नर्वस सिस्टम” कहा जा रहा है, जो सभी हिस्सों को आपस में जोड़कर काम करने में मदद करेगा। इस तरह यह सिर्फ एक ड्रोन नहीं, बल्कि एक पूरा इंटीग्रेटेड सिस्टम होगा। (AeroForce X UAV India Germany Deal)

AeroForce X UAV India Germany Deal

दोनों कंपनियां मिलकर करेंगी काम

डॉ. मल्होत्रा के अनुसार, यह सिर्फ एक सामान्य साझेदारी नहीं है, बल्कि दोनों कंपनियां मिलकर इस तकनीक को विकसित करेंगी। यानी डिजाइन, डेवलपमेंट और प्रोडक्शन सब कुछ साथ में होगा। इस प्रोजेक्ट में बनने वाली टेक्नोलॉजी पर दोनों कंपनियों का साझा अधिकार होगा।

इस समझौते के तहत दोनों कंपनियां मिलकर इस प्लेटफॉर्म को विकसित करेंगी। इसमें डिजाइन से लेकर निर्माण तक का काम शामिल होगा। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ी टेक्नोलॉजी और आईपी यानी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का स्वामित्व दोनों कंपनियों के पास रहेगा।

इसका मतलब है कि भारत को इस टेक्नोलॉजी पर सीधा नियंत्रण मिलेगा और भविष्य में इसमें बदलाव या सुधार करना आसान होगा। (AeroForce X UAV India Germany Deal)

जर्मनी के दौरे पर थे रक्षा मंत्री

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जर्मनी के दौरे पर थे। उन्होंने म्यूनिख में डिफेंस इन्वेस्टर समिट के दौरान जर्मन उद्योग जगत को भारत के साथ मिलकर काम करने का न्योता दिया था।

उन्होंने कहा था कि आज के समय में भरोसेमंद साझेदारी बहुत जरूरी हो गई है और भारत ऐसे सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने साफ किया कि भारत अब सिर्फ रक्षा उपकरण खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि डिजाइन, डेवलपमेंट और प्रोडक्शन में भागीदार बनना चाहता है।

इस प्रोजेक्ट को “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा है। ऐसे में इस तरह का प्लेटफॉर्म देश में विकसित होने से घरेलू क्षमता मजबूत होगी। वहीं, भारतीय कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी पर काम करने का मौका मिलेगा और रक्षा क्षेत्र में उनका अनुभव भी बढ़ेगा। (AeroForce X UAV India Germany Deal)

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बता दें कि एयरोडेटा एजी जर्मनी की एक कंपनी है, जो एयरबोर्न सर्विलांस और मिशन सिस्टम्स के क्षेत्र में काम करती है। वहीं डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज भारत की एक जानी-मानी इंजीनियरिंग कंपनी है, जो एयरोस्पेस और अन्य क्षेत्रों में काम करती है। उसकी डायनॉटन सिस्टम्स यूनिट खास तौर पर ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम्स पर काम कर रही है।

AeroForce X UAV India Germany Deal

डॉ. मल्होत्रा ने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है और शुरुआती चरण की तस्वीरें भी सामने आई हैं। इसमें डिजाइन, सिस्टम इंटीग्रेशन और अलग-अलग तकनीकों को जोड़ने का काम चल रहा है। यह पूरा प्रोजेक्ट चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा, जिसमें पहले डिजाइन और टेस्टिंग होगी, उसके बाद उत्पादन की दिशा में काम किया जाएगा। (AeroForce X UAV India Germany Deal)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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