📍नई दिल्ली/थिम्पू | 24 Apr, 2026, 11:38 AM
Project Dantak Raising Day: भूटान में चल रहे प्रोजेक्ट दंतक के 65 साल पूरे हो चुके हैं। शुक्रवार को राजधानी थिम्पू में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी बीआरओ ने अपना 66वां रेजिंग डे मनाया। प्रोजेक्ट दंतक भूटान में पिछले 65 वर्षों से चल रही उस साझेदारी का प्रतीक है, जिसने इस छोटे हिमालयी देश की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।
Project Dantak Raising Day: भूटान में 65 साल की लगातार सेवा
प्रोजेक्ट दंतक की शुरुआत 24 अप्रैल 1961 को हुई थी। तब भूटान में सड़कें बहुत कम थीं और ज्यादातर इलाकों तक पहुंचने के लिए खच्चरों या पैदल रास्तों का सहारा लेना पड़ता था। ऐसे समय में भारत की इस पहल ने भूटान में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी।
धीरे-धीरे यह प्रोजेक्ट सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाला एक मजबूत नेटवर्क बन गया। आज प्रोजेक्ट दंतक को भूटान के विकास और कनेक्टिविटी की रीढ़ माना जाता है।
सड़क से लेकर एयरफील्ड तक निर्माण
इन 65 वर्षों में प्रोजेक्ट दंतक ने 1500 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण किया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट हाईवे है, जो ट्राशीगांग से थिम्पू तक देश को जोड़ता है। इसके अलावा फुंटशोलिंग-थिम्पू हाईवे भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो व्यापार और यात्रा के लिए बेहद अहम माना जाता है।
प्रोजेक्ट दंतक ने भूटान के पारो एयरफील्ड का निर्माण भी किया, जो आज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रूप में काम करता है। इसके साथ ही योंगफुला एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड भी डेवलप किया गया, जो अब घरेलू हवाई सेवाओं के लिए इस्तेमाल होता है।
सिर्फ सड़क और एयरफील्ड ही नहीं, बल्कि पुल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क, अस्पताल, स्कूल और कई संस्थागत ढांचे भी इस प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए हैं।
हाल के सालों में तेजी से काम
पिछले कुछ सालों में प्रोजेक्ट दंतक के तहत कई महत्वपूर्ण सड़कों को डबल लेन में बदला गया है, जिससे यात्रा आसान और सुरक्षित हुई है। कॉन्फ्लुएंस से हा रोड के एक हिस्से का विस्तार इसका उदाहरण है, जिसका उद्घाटन अगस्त 2025 में हुआ था।
इसके अलावा करीब 168 किलोमीटर लंबे समद्रुप जोंगखर-ट्राशीगांग हाईवे पर भी काम किया गया, जिससे लोगों के आने-जाने में लगने वाला समय कम हुआ है। यह सड़क पूर्वी भूटान के लिए काफी अहम मानी जाती है।
प्रोजेक्ट दंतक ने प्राकृतिक आपदाओं के समय भी तेजी से काम किया है। भूस्खलन या सड़क टूटने की घटनाओं के बाद कम समय में कनेक्टिविटी बहाल करना इसकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
नए प्रोजेक्ट्स पर जारी काम
फिलहाल भूटान के कई हिस्सों में नए रोड प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इनमें दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के नंगलम-देवथांग, समरांग-जोमोटसांखा और खोटकापा-त्शोबाले जैसे मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा डामछू-छुखा हाईवे को मजबूत करने का काम भी जारी है।
कुछ जगहों पर वैकल्पिक रास्ते तैयार किए जा रहे हैं, ताकि हर मौसम में आवाजाही बनी रहे। पनबांग-नंगलम और देवथांग-समद्रुपचोलिंग जैसे रूट इसी योजना का हिस्सा हैं। इन प्रोजेक्ट्स में पर्यावरण का खास ध्यान रखा जा रहा है।
फुंटशोलिंग-थिम्पू रोड पर रिसर्फेसिंग का काम
प्रोजेक्ट दंतक के के तहत पूर्वी भूटान के मोटांगा इंडस्ट्रियल पार्क में नदी को नियंत्रित करने का काम किया जा रहा है, जिससे औद्योगिक क्षेत्र सुरक्षित रहे। वहीं फुंटशोलिंग-थिम्पू रोड पर रिसर्फेसिंग का काम चल रहा है, जिससे सड़क की गुणवत्ता बेहतर हो सके।
ऊंचाई वाले इलाकों में भी काम जारी है। हा-पारो रोड पर चाले ला पास में बर्फ हटाने का काम नियमित रूप से किया जाता है, ताकि रास्ता खुला रहे। इसके अलावा नंगलम-देवथांग रोड पर नई सड़क बनाने के लिए जमीन काटने का काम भी चल रहा है।
भारत-भूटान रिश्तों का अहम हिस्सा
प्रोजेक्ट दंतक ने भारत और भूटान के रिश्तों को मजबूत करने का भी काम किया है। दोनों देशों के बीच सहयोग और भरोसे की जो परंपरा है, यह प्रोजेक्ट उसी का हिस्सा माना जाता है।
इस साल का रेजिंग डे एक और वजह से खास रहा, क्योंकि भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक की 70वीं जयंती भी इसी समय मनाई जा रही है। उनके नेतृत्व में भूटान के विकास की दिशा तय हुई थी, जिसमें ऐसे प्रोजेक्ट्स का बड़ा योगदान रहा।
रेजिंग डे के मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। थिम्पू में 14 अप्रैल को इंटर-स्कूल क्विज प्रतियोगिता हुई, जिसमें छात्रों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा प्रोजेक्ट से जुड़े कर्मचारियों को सम्मानित किया गया और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई।
इन कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय लोगों और प्रोजेक्ट के बीच जुड़ाव भी देखने को मिला। भूटान के आम नागरिकों के साथ प्रोजेक्ट दंतक का रिश्ता लंबे समय से बना हुआ है।
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