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Pakistan Fake Propaganda: ऑपरेशन सिंदूर के महीनों बाद पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा, सोशल मीडिया पर शेयर कर रहा फर्जी सैटेलाइट इमेज, बेनकाब हुआ झूठ

Pakistan Fake Propaganda
Photo Credit: Damien Symon/X
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📍नई दिल्ली | 2 Jan, 2026, 9:45 PM

Pakistan Fake Propaganda: ऑपरेशन सिंदूर के महीनों बाद पाकिस्तान एक बार फिर सोशल मीडिया पर नया प्रोपेगेंडा फैलाने में जुट गया है। पाकिस्तान आधारित कुछ सोशल मीडिया अकाउंट और उनसे जुड़े हैंडल फेक सैटेलाइट तस्वीरें शेयर कर यह दावा कर रहे हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के पंजाब में, खासतौर पर अमृतसर के आसपास, भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए थे। लेकिन पाकिस्तान के ये दावे बिना किसी ठोस सबूत के हैं।

डिफेंस सूत्रों और ओपन सोर्स एनालिस्ट्स की जांच में यह साफ हो चुका है कि इन तस्वीरों में दिखाए जा रहे इलाकों में किसी भी तरह की तबाही या नुकसान के संकेत नहीं दिखे हैं। जिन सैन्य ठिकानों का नाम लेकर दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और वहां पर किसी भी हमले के निशान भी नहीं हैं। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: बिना सबूत के दावे, सैटेलाइट तस्वीरों का खेल

पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स जिन सैटेलाइट इमेजेस को शेयर कर रहे हैं, उनमें न तो तस्वीर खींचे जाने की तारीख दी गई है और न ही यह बताया गया है कि वे किस सैटेलाइट से ली गई हैं। किसी भी सैटेलाइट इमेज की विश्वसनीयता के लिए टाइमस्टैम्प, सैटेलाइट सोर्स और रेजोल्यूशन जैसी जानकारियां बेहद जरूरी होती हैं, लेकिन यहां यह सब गायब हैं।

फैक्ट चेक में यह भी सामने आया है कि जिन जगहों को “टारगेट” बताया जा रहा है, वहां न तो विस्फोट के गड्ढे हैं, न मलबा, न जले हुए निशान और न ही किसी तरह का स्ट्रक्चरल डैमेज दिखाई दिया। अगर वाकई किसी सैन्य ठिकाने पर ऐसे हमले होते हैं, तो ऐसे संकेत साफ तौर पर दिखाई देते हैं। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: गलत जानकारी फैलाने की कोशिश

सैटेलाइट इमेजरी एक्सपर्ट डेमियन सिमोन कहते हैं, “सोशल मीडिया पर जानबूझकर भ्रामक तस्वीरें फैलाकर यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने भारत के पंजाब के अमृतसर में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। लेकिन इन तस्वीरों की स्वतंत्र जांच में साफ हो गया है कि जिन जगहों को निशाना बताए जा रहे हैं, वहां किसी भी तरह की तबाही या नुकसान के कोई निशान नहीं हैं। न तो विस्फोट के संकेत दिखते हैं और न ही किसी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। यह पूरी कोशिश गलत जानकारी फैलाने की है। ऐसे और भी कमजोर दावों वाली तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं, जिनकी पड़ताल कर उन्हें एक-एक करके बेनकाब किया जा रहा है। छुट्टियों के बावजूद यह प्रक्रिया जारी रहेगी।” (Pakistan Fake Propaganda)

सात महीने बाद अचानक क्यों सामने आईं तस्वीरें

सबसे बड़ा सवाल इन दावों के समय को लेकर उठ रहा है। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तान अपने दावों के समर्थन में एक भी भरोसेमंद सैटेलाइट इमेज नहीं दिखा सका था। अब करीब सात महीने बाद अचानक ऐसी तस्वीरों का सामने आना इशारा करता है कि यह सब बाद में गढ़ी गई कहानी है।

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डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह “पोस्ट-फैक्टो प्रोपेगैंडा” की एक क्लासिक मिसाल है, जहां पहले बुरी तरह मार खाने के बाद डिजिटल कंटेंट के जरिए जीत की कहानी गढ़ने की कोशिश की जाती है। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: पहले भी फैल चुकी हैं ऐसी झूठी कहानियां

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क ने इस तरह के बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए हों। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके तुरंत बाद भी तथाकथित “विक्ट्री रेशियो”, भारत के “स्ट्रैटेजिक सेंटर ऑफ ग्रैविटी” पर हमले और बड़े नुकसान के दावे किए गए थे। लेकिन इन सभी बातों को न तो किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने स्वीकार किया और न ही कोई स्वतंत्र जांच उन्हें सही साबित कर पाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन दावों को गंभीरता से नहीं लिया गया, क्योंकि उनके साथ कोई भरोसेमंद डेटा या सबूत मौजूद नहीं थे। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: ओपन सोर्स एनालिस्ट्स ने बताया झूठा

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस यानी ओएसआईएनटी पर काम करने वाले कई एक्सपर्ट्स ने इन नई सैटेलाइट तस्वीरों का बारीकी से अध्ययन किया। उनके मुताबिक, तस्वीरों में जानबूझकर बहुत सीमित एंगल दिखाए गए हैं। इनमें हमले के बाद दिखने वाले आम संकेत पूरी तरह गायब हैं।

आमतौर पर किसी एयर स्ट्राइक या मिसाइल हमले के बाद गड्ढे, आसपास का मलबा, जलने के निशान, टूटी हुई इमारतें या सेकेंडरी एक्सप्लोजन के संकेत दिखते हैं। लेकिन यहां ऐसी कोई बात नजर नहीं आती। उन्हीं लोकेशंस की पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करने पर भी कोई फर्क नहीं दिखाई दिया। (Pakistan Fake Propaganda)

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Pakistan Fake Propaganda: फिर भी क्यों जारी है प्रचार

पाकिस्तान की तरफ से ऐसी झूठी तस्वीरों का लगातार प्रचार किया जाना इस ओर इशारा करता है कि यह कोई सामान्य गलती या गलतफहमी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी डिसइन्फॉर्मेशन मुहिम है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की कोशिशें अक्सर घरेलू ऑडियंस को यह दिखाने के लिए किए जाते हैं कि “कुछ हासिल हुआ”, भले ही हकीकत कुछ और हो।

इसके साथ ही, अंतररष्ट्रीय स्तर पर भी भ्रम पैदा करने की कोशिश की जाती है, ताकि असल हालात पर सवाल खड़े किए जा सकें। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: राफेल से लेकर नौसेना तक, एक जैसा पैटर्न

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान का यह रवैया कोई नया नहीं है। जब भारत ने राफेल फाइटर जेट्स को वायुसेना में शामिल किया था, तब भी सोशल मीडिया पर राफेल के क्रैश, टेक्निकल फेल्योर और कमजोर होने के झूठे वीडियो फैलाए गए थे। बाद में जांच में पता चला कि वे वीडियो या तो पुराने थे, किसी और देश के थे या वीडियो गेम फुटेज थे।

अब वही तरीका नौसेना और जमीनी अभियानों को लेकर अपनाया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब पाकिस्तान को कुछ हासिल नहीं हुआ था, तो डिजिटल दुनिया में एक “विक्ट्री नैरेटिव” गढ़ने की कोशिश शुरू कर दी गई थी। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: AI डीपफेक्स का बढ़ता इस्तेमाल

हाल के सालों में इस तरह की टैक्टिक्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल भी बढ़ा है। डिफेंस सूत्र बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद कुछ वीडियो ऐसे भी सामने आए, जिनमें भारतीय सैन्य अधिकारियों को कथित तौर पर नुकसान स्वीकार करते या ऑपरेशन की आलोचना करते दिखाया गया। बाद में ये वीडियो डीपफेक साबित हुए।

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पीआईबी फैक्ट चेक और अन्य फैक्ट चेकिंग एजेंसियों ने ऐसे कई वीडियो को झूठा करार दिया है। शुरुआती जांच में इनमें से कई अकाउंट्स का लिंक पाकिस्तान से जुड़े डिजिटल नेटवर्क से मिला। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: इनफॉरमेशन वॉरफेयर की स्ट्रैटेजी

डिफेंस एनालिस्ट्स मानते हैं कि यह सब किसी एक घटना से जुड़ा नहीं है, बल्कि एक लंबी रणनीति का हिस्सा है। जब कुछ हासिल नहीं होता तो झूठी इनफॉरमेशन फैला कर जीत जैसा माहौल बनाया जाता है। इसका मकसद जमीनी सच्चाई को बदलना नहीं, बल्कि लोगों की सोच को प्रभावित करना होता है।

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी मौजूदा सोशल मीडिया मुहिम भी इसी रणनीति की अगली कड़ी मानी जा रही है।

डिफेंस सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की डिजिटल फेख खबरें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सही जानकारी, फैक्ट चेक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग की भूमिका और भी अहम हो जाती है।

कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की यह नई सोशल मीडिया मुहिम एक बार फिर यह दिखाती है कि जब जमीन पर कुछ दिखाने को नहीं होता, तो कहानियां इंटरनेट पर गढ़ी जाती है। लेकिन सच्चाई यही है कि बिना सबूतों के ऐसे दावे सिर्फ प्रोपेगेंडा बनकर रह जाते हैं, जिनकी उम्र बहुत लंबी नहीं होती। (Pakistan Fake Propaganda)

Author

  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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