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DRDO का मिशन ‘वन मिलिट्री नेटवर्क’, तीनों सेनाओं के रेडियो पहली बार होंगे पूरी तरह इंटरकनेक्टेड

आईआरएसए 2.0 के जरिए सेना, नौसेना और वायुसेना के अलग-अलग रेडियो सिस्टम एक साझा सुरक्षित नेटवर्क पर काम कर सकेंगे, जबकि भारतीय वायुसेना के लिए नया सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो भी विकसित किया जा रहा है...

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📍नई दिल्ली | 28 Sep, 2026, 12:41 PM

IRSA 2.0: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अब जल्द इंडियन रेडियो सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर (IRSA) 2.0 लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही साल 2026 के अंत तक भारतीय वायुसेना के लिए नया सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) भी डेवलप किया जा रहा है। जिससे सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच सिक्योर कम्युनिकेशन किया जा सकेगा।

IRSA 2.0: IRSA- भारत का पहला राष्ट्रीय मानक

इंडियन रेडियो सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर (IRSA) भारत का पहला राष्ट्रीय मानक है, जिसे सैन्य सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो के लिए तैयार किया गया है। इसका पहला संस्करण अक्टूबर 2025 में जारी किया गया था।

यह ऐसा साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो अलग-अलग कंपनियों और अलग-अलग सेनाओं के रेडियो को एक ही भाषा में बात करने की क्षमता देता है।

आज भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में कई तरह के रेडियो सिस्टम इस्तेमाल हो रहे हैं। इनमें से कई विदेशी कंपनियों के बनाए हुए हैं। इन रेडियो में इस्तेमाल होने वाले वेवफॉर्म यानी डेटा और आवाज भेजने के डिजिटल पैटर्न अलग-अलग होते हैं। इसी वजह से कई बार एक प्लेटफॉर्म का रेडियो दूसरे प्लेटफॉर्म से सीधे संपर्क नहीं कर पाता।

IRSA इसी समस्या का समाधान करने के लिए विकसित किया गया है।

IRSA 2.0 से क्या बदलेगा?

डीआरडीओ की डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लीकेशंस लेबोरेटरी (DEAL) ने तीनों सेनाओं के सहयोग से IRSA 2.0 तैयार किया है। नया संस्करण सशस्त्र बलों की नई जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। इसमें नए वेवफॉर्म, बेहतर ऑपरेशनल फीचर्स और अधिक इंटरऑपरेबिलिटी शामिल होगी।

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IRSA केवल सॉफ्टवेयर स्पेसिफिकेशन तय नहीं करता बल्कि यह एपीआई, इंटरफेस, एक्जीक्यूशन एनवायरनमेंट, वेवफॉर्म पोर्टेबिलिटी और सर्टिफिकेशन मानकों को भी निर्धारित करता है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग निर्माताओं के रेडियो भी एक-दूसरे के साथ आसानी से काम कर सकें।

युद्ध में एसडीआर जरूरी

सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) आधुनिक सैन्य संचार प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुराने रेडियो हार्डवेयर आधारित होते थे। यदि किसी नई तकनीक या नए वेवफॉर्म की जरूरत होती थी तो पूरा सिस्टम बदलना पड़ता था।

लेकिन एसडीआर में अधिकतर काम सॉफ्टवेयर के जरिए होता है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर रेडियो को नए मिशन, नए नेटवर्क या नए एन्क्रिप्शन के अनुसार अपडेट किया जा सकता है।

युद्ध के दौरान बदलती परिस्थितियों में यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है। (IRSA 2.0)

भारतीय वायुसेना को मिलेगा नया एसडीआर

डीआरडीओ इस साल के अंत तक भारतीय वायुसेना के लिए नया एसडीआर और नया वेवफॉर्म विकसित करने पर काम कर रहा है।

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के कई प्लेटफॉर्म, खासकर रूसी मूल के सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों में विदेशी एसडीआर लगे हुए हैं। वहीं, भविष्य में चाहे कोई भी रेडियो इस्तेमाल हो, उसे IRSA मानक के अनुरूप होना पड़ेगा।

इसका मतलब है कि आयातित रेडियो सिस्टम को भी भारतीय मानकों के अनुरूप इंटरऑपरेबल बनाया जाएगा।

तीनों सेनाओं में अलग-अलग एसडीआर

भारतीय नौसेना के पहले से ही डीआरडीओ और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित एसडीआर-Tac का उपयोग कर रही है। यह सिस्टम कई नौसैनिक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है।

थलसेना के लिए विकसित मैनपैक एसडीआर के फील्ड ट्रायल पूरे हो चुके हैं। बीईल द्वारा संचालित यह परियोजना अब इंडक्शन के अंतिम चरण में है।

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वहीं भारतीय वायुसेना अभी भी कई विदेशी रेडियो सिस्टम पर निर्भर है। इसलिए नया आईएएफ एसडीआर कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। (IRSA 2.0)

विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम करने की कोशिश

भारत लंबे समय से कई आयातित रेडियो सिस्टम का इस्तेमाल करता रहा है। विदेशी सिस्टम के साथ सबसे बड़ी समस्या वेंडर लॉक-इन होती है। स्पेयर पार्ट्स, सॉफ्टवेयर अपडेट, तकनीकी सहायता और एन्क्रिप्शन पर नियंत्रण मूल निर्माता के पास रहता है।

IRSA के जरिए भारत अपना वेवफॉर्म, अपना एन्क्रिप्शन और अपना सर्टिफिकेशन विकसित कर रहा है। इससे संचार प्रणाली पर राष्ट्रीय नियंत्रण मजबूत होगा। (IRSA 2.0)

अभी भी बाकी हैं कई चुनौतियां

हालांकि IRSA 2.0 महत्वपूRर्ण कदम है, लेकिन इसके सामने कई तकनीकी चुनौतियां भी हैं।

देश में बीईएल, अल्फा डिजाइन, कोरएल और अन्य कंपनियां अलग-अलग रेडियो प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं। सफलता तभी मानी जाएगी जब एक कंपनी का वेवफॉर्म दूसरी कंपनी के रेडियो पर बिना बड़े बदलाव के काम करे।

इसके अलावा मौजूदा रेडियो बेड़े को नए मानकों के अनुरूप अपग्रेड करना भी बड़ा काम होगा। इसके लिए सर्टिफिकेशन लैब, वेवफॉर्म लाइब्रेरी और टेस्टिंग फ्रेमवर्क की जरूरत पड़ेगी। (IRSA 2.0)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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