📍नई दिल्ली | 7 Sep, 2026, 10:38 AM
DAC Meeting: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को होने वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में भारतीय वायुसेना, नौसेना और थलसेना से जुड़े कई अहम रक्षा प्रस्तावों पर चर्चा होने वाली है। इनमें भारतीय वायुसेना के लगभग 40 सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के ओवरहॉल और अपग्रेड को हरी झंडी मिल सकती है।
सु-30एमकेआई भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाते हैं। मौजूदा समय में वायुसेना के पास 260 से अधिक सुखोई फाइटर जेट सर्विस में हैं। ये विमान रूस की मूल डिजाइन पर आधारित हैं और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा भारत में बनाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, 40 विमानों के ओवरहॉल का प्रस्ताव डीएसी के सामने रखा जा सकता है। ओवरहॉल के बाद इन विमानों की सर्विस लाइफ लगभग 15 से 20 साल तक बढ़ जाएगी।
DAC Meeting: सुखोई बेड़े को लंबे समय तक सक्रिय रखने की तैयारी
भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रनों की कमी का सामना कर रही है। जहां जरूरत करीब 40 से 42 स्क्वाड्रनों की है, जबकि मौजूदा संख्या लगभग 30 के आसपास है। ऐसे में सुखोई-30 आने वाले सालों में भी वायुसेना की मुख्य ताकत बने रहने वाले हैं।
पिछले साल 20 सुखोई विमानों के ओवरहॉल की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब दूसरे चरण में 40 अतिरिक्त विमानों के ओवरहॉलिंग की तैयारी है। ओवरहॉलिंग में विमान के AL-31 इंजन, एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, एयरफ्रेम और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच और मरम्मत की जाती है।
दिसंबर 2024 में रक्षा मंत्रालय ने एचएएल को 12 नए सुखोई-30 विमानों के निर्माण का 13,500 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट भी दिया था।
सु-30 को मिल सकती है रूसी RVV-BD की ताकत
इसके अलावा भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए सु-30 विमानों को रूसी RVV-BD एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस करने की योजना भी बना रही है। इस प्रस्ताव को भी डीएसी की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।
RVV-BD एक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल है, जो लगभग 300 किलोमीटर दूर तक एरियल टारगेट्स विशेष रूप से एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान, एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) प्लेटफॉर्म, निगरानी विमानों को निशाना बना सकती है। इसकी रफ्तार लगभग मैक-6 तक है, जिससे यह हाइपरसोनिक कैटेगरी के करीब पहुंच जाती है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आने वाले हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर चर्चा होने की संभावना है।
2,500 सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो खरीदने का प्रस्ताव
डीएसी की बैठक में लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत वाले 2,500 सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (SDR) खरीदने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। एसडीआर आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।
इन रेडियो सिस्टम्स को अक्सर “एयरबोर्न इंटरनेट” भी कहा जाता है। इनकी मदद से फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, रडार और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन एक-दूसरे से रियल टाइम में डेटा शेयर कर सकते हैं।
बैटलफील्ड में मौजूद विभिन्न सेंसरों और प्लेटफॉर्मों से मिलने वाली जानकारी को जोड़कर कमांडरों को इंटीग्रेटेड तस्वीर उपलब्ध कराई जाती है। इससे फैसले लेने में आसानी हो जाती है।
सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत इन सिस्टम्स को स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित किया जाना है। (DAC Meeting)
नौसेना के लिए नए रडार भी एजेंडे में
बैठक में भारतीय नौसेना की कई महत्वपूर्ण जरूरतों पर भी विचार किया जा सकता है। नौसेना अपनी तलवार क्लास की स्टील्थ फ्रिगेट्स के लिए नए फ्रेगाट एम2ईएम ई-बैंड थ्रीडी रडार चाहती है।
तलवार क्लास फ्रिगेट्स रूस में विकसित आधुनिक युद्धपोत हैं और भारतीय नौसेना के पास इस श्रेणी के 10 जहाज सेवा में हैं। नए रडार से इन जहाजों की हवाई और समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत होगी।
इसके अलावा देशभर के नौसैनिक स्टेशनों के लिए एयर रूट सर्विलांस रडार (ARSA) लगाने का प्रस्ताव भी पाइपलाइन में है। ये रडार सैन्य और नागरिक विमानों के साथ-साथ बड़े मानव रहित हवाई वाहनों यानी यूएवी की निगरानी में मदद करेंगे। (DAC Meeting)
नए डेस्ट्रॉयर और मरीन गैस टर्बाइन पर भी चर्चा
भारतीय नौसेना के भविष्य के युद्धपोत कार्यक्रम भी डीएसी के एजेंडे में शामिल हैं। नौसेना चार नए जनरेशन डेस्ट्रॉयर युद्धपोतों की योजना पर काम कर रही है। यह प्रस्ताव पहले ही डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मंजूरी प्राप्त कर चुका है और जल्द डीएसी के सामने लाया जा सकता है।
इसके अलावा 24 से 28 मेगावाट क्षमता वाली मरीन गैस टर्बाइन से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। ये गैस टर्बाइन भविष्य के नौसैनिक जहाजों के लिए महत्वपूर्ण प्रोपल्जन सिस्टम का हिस्सा होंगी।
इसके अलावा डीएसी की बैठक में एचएएल को एएलएच मार्क-3 हेलीकॉप्टरों का बड़ा ऑर्डर मिलने की भी संभावना है। (DAC Meeting)
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