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रक्षा मंत्रालय की नई ‘नो-इम्पोर्ट’ लिस्ट: अब भारत में ही बनेंगे सुखोई, तेजस, टी-90 टैंकों और मिसाइलों के 405 पुर्जे

पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट का मतलब है कि सरकार कुछ रक्षा उपकरणों, पुर्जों या सामग्रियों की पहचान करती है और तय करती है कि भविष्य में इन्हें विदेशों से नहीं खरीदा जाएगा...

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📍नई दिल्ली | 18 Aug, 2026, 9:33 PM

Positive Indigenisation List 2026: आत्मनिर्भर भारत अभियान को रक्षा क्षेत्र में और आगे बढ़ाते हुए रक्षा मंत्रालय ने 405 रणनीतिक रक्षा उपकरणों, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और कच्चे माल की नई पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट (पीआईएल) जारी कर दी है। इस सूची के जारी होने के बाद इन वस्तुओं का आयात नहीं किया जाएगा और इन्हें भारतीय उद्योगों से ही खरीदा जाएगा।

यह रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) द्वारा जारी की गई छठी पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट है। इस लिस्ट में ऐसे उपकरण और पुर्जे शामिल हैं जिनका इस्तेमाल भारतीय सेना, वायु सेना, नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म में होता है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस फैसले से भारतीय उद्योगों के लिए करीब 3,070 करोड़ रुपये का नए कारोबारी अवसर पैदा होंगे।

Positive Indigenisation List 2026: क्या होती है पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट?

पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट का मतलब है कि सरकार कुछ रक्षा उपकरणों, पुर्जों या सामग्रियों की पहचान करती है और तय करती है कि भविष्य में इन्हें विदेशों से नहीं खरीदा जाएगा।

इसके बजाय भारतीय कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्टअप और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों को इन्हें देश में विकसित और तैयार करना होगा।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य रक्षा उत्पादन में विदेशी निर्भरता कम करना और घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत बनाना है।

किन-किन प्लेटफॉर्म के पुर्जे शामिल हैं?

नई सूची में शामिल 405 वस्तुएं भारतीय सशस्त्र बलों के कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं।

इनमें एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच), सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस और सुखोई में इस्तेमाल होने वाला एएल-31एफपी इंजन शामिल हैं।

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इसके अलावा टी-72, टी-90 और बीएमपी-2 जैसे आर्मर्ड प्लेटफॉर्म से जुड़े उपकरण भी इस सूची में शामिल किए गए हैं।

नौसेना के युद्धपोतों, मिसाइल सिस्टम्स, रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स भी अब भारत में ही विकसित किए जाएंगे।

मिसाइल सिस्टम के लिए भी बड़ा कदम

लिस्ट में कई महत्वपूर्ण मिसाइल सिस्टम्स से जुड़े उपकरण भी शामिल हैं।

इनमें कोंकुर्स-एम, इनवार और एमआरएसएएम (मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल) कार्यक्रमों से जुड़े स्पेयर और कंपोनेंट्स शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय ने हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक गोला-बारूद से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण वस्तुओं को भी इस सूची में रखा है।

भविष्य में इन प्रणालियों के रखरखाव और उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री का निर्माण देश के भीतर ही किया जाएगा।

भारतीय तटरक्षक बल को भी मिलेगा फायदा

नई सूची में शामिल 405 वस्तुओं में से 16 आइटम भारतीय तटरक्षक बल से जुड़े हैं, जबकि बाकी 389 आइटम रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू) की आवश्यकताओं से संबंधित हैं।

तटरक्षक बल के जहाजों और निगरानी प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण उपकरण अब घरेलू उद्योग से लिए जाएंगे।

सृजन पोर्टल की अहम भूमिका

रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2020 में सृजन डिफेंस पोर्टल शुरू किया था। इसका उद्देश्य रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और सेना मुख्यालयों की जरूरतों को उद्योग जगत तक पहुंचाना था।

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इस पोर्टल पर ऐसे उत्पादों और पुर्जों की जानकारी दी जाती है जिन्हें भारत में विकसित किया जा सकता है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार जून 2026 तक इस पोर्टल पर 33,000 से अधिक रक्षा वस्तुएं इंडिजेनाइजेशन के लिए उद्योगों को ऑफर की जा चुकी हैं।

इनमें से 5,012 वस्तुएं पहली पांच पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट के तहत शामिल थीं।

पांच साल में कितना हुआ फायदा?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच सालों में 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुओं का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण किया जा चुका है।

इससे करीब 9,000 करोड़ रुपये के आयात का विकल्प विकसित हुआ है। यानी उतनी राशि के बराबर विदेशी खरीद की जरूरत कम हुई है।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि मार्च 2026 तक रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों ने घरेलू कंपनियों को करीब 10,000 करोड़ रुपये के खरीद आदेश दिए हैं। इसमें इन-हाउस उत्पादन भी शामिल है।

एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए बड़ा मौका

नई सूची का सबसे बड़ा लाभ देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय चाहता है कि बड़े सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ निजी उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई भी रक्षा उत्पादन श्रृंखला का हिस्सा बनें।

कई ऐसे कंपोनेंट्स और सब-असेंबली हैं जिन्हें छोटे उद्योग अपेक्षाकृत कम निवेश में विकसित कर सकते हैं। यही वजह है कि सृजन पोर्टल पर उद्योगों को सीधे अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। (Positive Indigenisation List 2026)

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