📍नई दिल्ली | 7 Sep, 2026, 11:29 AM
HTT-40 Trainer Aircraft: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जल्द ही भारतीय वायुसेना को एचटीटी-40 विमान की पहली खेप सौंप सकता है। लंबे समय से इंजन सप्लाई में आई देरी के चलते इस प्रोजेक्ट में पहले ही काफी देरी हुई है, लेकिन अब पहले तीन विमान डिलीवरी के लिए तैयार हैं।
इनमें दो एचटीटी-40 विमान बेंगलुरु में और एक विमान नासिक में तैयार किया गया है। इन विमानों की डिलीवरी से भारतीय वायुसेना की पायलट ट्रेनिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।
HTT-40 Trainer Aircraft: तीन साल पहले दिया था 70 विमानों का बड़ा ऑर्डर
भारतीय वायुसेना ने लगभग तीन साल पहले 6,838 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 70 एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया था। इन विमानों का उद्देश्य नए पायलटों को शुरुआती उड़ान ट्रेनिंग देना है।
कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार एचएएल को वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 12 विमान वायुसेना को सौंपने थे। हालांकि इंजन की उपलब्धता में समस्या आने के कारण एक भी विमान समय पर डिलीवर नहीं किया जा सका। इसके चलते पूरे कार्यक्रम की समयसीमा प्रभावित हुई।
अब इंजन सप्लाई की स्थिति सुधरने के बाद उत्पादन और डिलीवरी में तेजी आएगी।
लगा है अमेरिकी कंपनी का हनीवेल इंजन
एचटीटी-40 विमान में टीपीई331-12बी टर्बोप्रॉप इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। यह इंजन अमेरिकी कंपनी हनीवेल बनाती है।
करीब चार साल पहले लगभग 10 करोड़ डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 88 टीपीई331-12बी इंजन और किट्स की सप्लाई और मैन्युफैक्चरिंग का समझौता किया गया था। इस कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार पहला इंजन सितंबर 2025 तक मिलना था।
सप्लाई चेन में आई बाधाओं के चलते इंजन की डिलीवरी प्रभावित हुई थी। बाद में हनीवेल ने उत्पादन संबंधी चुनौतियों को दूर किया और कुछ महीने पहले इंजनों की पहली खेप एचएएल को उपलब्ध कराई। कंपनी ने आगे भी समय पर सप्लाई का भरोसा दिया है।
समझौते के तहत शुरुआती 16 इंजन सीधे हनीवेल से आएंगे, जबकि बाकी इंजनों का निर्माण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के माध्यम से भारत में किया जाएगा। (HTT-40 Trainer Aircraft)
बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट है एचटीटी-40
एचटीटी-40 यानी हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 पूरी तरह स्वदेशी बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट है। इसे भारतीय वायुसेना की शुरुआती फ्लाइट ट्रेनिंग के लिए डेवलप किया गया है।
यह एक सिंगल इंजन टर्बोप्रॉप विमान है, जिसमें लेटेस्ट एवियोनिक्स, डिजिटल कॉकपिट, ग्लास डिस्प्ले सिस्टम और बेहतर फ्लाइट कंट्रोल सुविधाएं दी गई हैं। विमान को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ट्रेनी पायलट शुरुआत में ही आधुनिक मिलिट्री एयरक्राफ्ट के उड़ाने की समझ मिल जाए। साथ ही, इस कार्यक्रम का एक बड़ा उद्देश्य विदेशी ट्रेनर विमानों पर निर्भरता कम करना भी है। (HTT-40 Trainer Aircraft)
फिलहाल पिलाटस विमान से होती है शुरुआती ट्रेनिंग
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के सभी नए पायलटों की स्टेज-1 फ्लाइंग ट्रेनिंग स्विट्जरलैंड में बने पिलाटस पीसी-7 एमके-II विमान पर कराई जाती है।
यह ट्रेनिंग सभी पायलटों के लिए समान होता है। शुरुआती ट्रेनिंग पूरा होने के बाद कैडेट्स को फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में भेजा जाता है।
फाइटर स्ट्रीम में चुने गए पायलट आगे स्टेज-2 ट्रेनिंग के दौरान पीसी-7 एमके-II और किरण एमके-1ए जेट ट्रेनर पर ट्रेनिंग लेते हैं। इसके बाद स्टेज-3 में ब्रिटेन मूल के हॉक एडवांस्ड जेट ट्रेनर का इस्तेमाल किया जाता है।
एचटीटी-40 के शामिल होने से शुरुआती ट्रेनिंग में स्वदेशी प्लेटफॉर्म की भूमिका बढ़ेगी। (HTT-40 Trainer Aircraft)
नासिक में शुरू हुई नई प्रोडक्शन लाइन
अक्टूबर 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नासिक में एचटीटी-40 और एलसीए एमके-1ए के लिए नई प्रोडक्शन लाइनों का उद्घाटन किया था। इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है।
नई प्रोडक्शन फैसिलिटी के शुरू होने के बाद एचएएल अब बेंगलुरु और नासिक स्थित प्लांट में मिलकर हर साल लगभग 20 एचटीटी-40 विमान बनाएगी। (HTT-40 Trainer Aircraft)
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