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Indian Army Social Media Policy: सेना का बड़ा फैसला! जवानों के लिए सोशल मीडिया यूज करने के नियमों में किया ये बड़ा बदलाव

सेना ने इंस्टाग्राम के अलावा अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स को लेकर भी पॉलिसी में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं...

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📍नई दिल्ली | 24 Dec, 2025, 8:07 PM

Indian Army Social Media Policy: सेना ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बड़ा फैसला किया है। सेना ने अपनी पुरानी सोशल मीडिया पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए सैन्य कर्मियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर बड़ी राहत दी है। सेना ने जवानों और अफसरों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही कुछ प्रतिबंध भी लगाए हैं। सेना ये फैसला सेना प्रमुख के उस बयान के बाद लिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्मार्टफोन आज के समय की जरूरत बन गया है, लेकिन जवानों को को सोशल मीडिया पर रिएक्ट और रेस्पॉन्ड के बीच अंतर समझना होगा।

Indian Army Social Media Policy: देखने और मॉनिटरिंग तक की परमिशन

रक्षा समाचार को मिली जानकारी के मुताबिक सेना की तरफ से हाल ही में नए दिशा-निर्देशों जारी किए हैं। जिनके मुताबिक अब सेना कर्मियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के इस्तेमाल की अनुमति केवल देखने और मॉनिटरिंग तक ही होगी। इस नई व्यवस्था के तहत इंस्टाग्राम पर किसी भी तरह का कमेंट, राय या प्रतिक्रिया साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह संशोधित पॉलिसी तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। (Indian Army Social Media Policy)

Indian Army Social Media Policy: नहीं कर सकते संवाद या रिएक्ट

सेना की तरफ से जारी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि इंस्टाग्राम पर सेना कर्मियों की भूमिका अब केवल “पैसिव पार्टिसिपेशन” यानी निष्क्रिय भागीदारी तक सीमित रहेगी। इसका मतलब यह है कि जवान और अधिकारी प्लेटफॉर्म पर मौजूद जानकारी को देख सकते हैं, लेकिन किसी भी तरह से संवाद या रिएक्ट नहीं कर सकते। सेना के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और ऑपरेशनल सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। (Indian Army Social Media Policy)

Indian Army Social Media Policy: व्हाट्सएप, टेलीग्राम को लेकर कही ये बात

साथ ही सेना ने इंस्टाग्राम के अलावा अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स को लेकर भी पॉलिसी में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल और स्काइप जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर केवल सामान्य और अनक्लासिफाइड जानकारी साझा करने की अनुमति दी गई है। यह जानकारी भी केवल जानकार लोगों के साथ ही साझा की जा सकती है। सही व्यक्ति की पहचान की पूरी जिम्मेदारी यूजर की होगी। किसी भी तरह की संवेदनशील, ऑफिशियल या ड्यूटी से जुड़ी जानकारी इन प्लेटफॉर्म्स पर साझा करने की अनुमति नहीं है। (Indian Army Social Media Policy)

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Indian Army Social Media Policy: प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल केवल जानकारी के लिए

इसके अलावा यूट्यूब, एक्स यानी पूर्व में ट्विटर और क्वोरा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी सेना कर्मियों को केवल पैसिव यूज की अनुमति है। इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल केवल जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सकता है। किसी भी तरह का वीडियो अपलोड करना, पोस्ट लिखना, मैसेज डालना या कमेंट करना सख्त मना है। सेना का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव भागीदारी से अनजाने में संवेदनशील जानकारियां लीक हो सकती हैं। (Indian Army Social Media Policy)

लिंक्डइन को लेकर सख्त

वहीं पॉलिसी डॉक्यूमेंट में लिंक्डइन को लेकर नीति और भी सख्त है। जवानों और अफसरों को लिंक्डइन का इस्तेमाल केवल रिज्यूमे अपलोड करने या संभावित एम्प्लॉयर और एम्प्लॉयी से जुड़ी सामान्य जानकारी प्राप्त करने के लिए ही करने की अनुमति है। इसके लिए भी अलग से अनुमति लेना जरूरी होगा।

पायरेटेड सॉफ्टवेयर वाली साइट्स से करें परेहज

इसके अलावा सेना ने अपने कर्मियों को कुछ खास तरह की वेबसाइट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह दूर रहने की सलाह भी दी है। इसमें जनरल वेबसाइट्स, क्रैक या पायरेटेड सॉफ्टवेयर वाली साइट्स, फ्री मूवी वेबसाइट्स, टोरेंट और वीपीएन सॉफ्टवेयर से जुड़ी साइट्स, वेब प्रॉक्सी, अनॉनिमाइज्ड वेबसाइट्स, चैट रूम और फाइल ट्रांसफर साइट्स शामिल हैं। क्लाउड डेटा स्टोरेज वेबसाइट्स के इस्तेमाल को लेकर भी अत्यधिक सावधानी बरतने को कहा गया है। (Indian Army Social Media Policy)

भारतीय सेना की सोशल मीडिया पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य हनीट्रैपिंग, डेटा चोरी और संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने की घटनाओं को रोकना बताया गया है। पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां दुश्मन देशों की एजेंसियों ने सोशल मीडिया के जरिए सैनिकों से संपर्क कर उनसे जानकारियां हासिल करने की कोशिश की। इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए नीति को समय-समय पर सख्त किया जाता रहा है। (Indian Army Social Media Policy)

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सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था- सोच-समझकर करें कम्युनिकेशन

पिछले महीने नवंबर में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यंग लीडर्स फोरम और चाणक्य डिफेंस डॉयलॉग में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि आज की जेन जी डिजिटली फ्लुएंट और सोशली कांशस है। सेना में आने वाले नए एनडीए कैडेट्स को फोन से दूर रहना मुश्किल होता है और इसमें महीनों लग सकते हैं। उन्होंने सलाह दी थी कि सोशल मीडिया पर रिएक्ट करने की बजाय रिस्पॉन्ड करें और सोच-समझकर कम्युनिकेशन करें। उन्होंने कहा था कि स्मार्टफोन पर पूरी तरह पाबंदी सही नहीं है, बल्कि इस्तेमाल के नियम और जवाब देने का तरीका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा था कि जवानों को ट्विटर आदि प्लेटफॉर्म पर निगरानी की अनुमति दी जा सकती है ताकि वे देख सकें कि दुनिया में क्या हो रहा है, लेकिन सार्वजनिक रूप से तुरंत जवाब देने से रुका जाए। सेना प्रमुख खुद सोशल मीडिया को मॉर्डन वॉरफेयर का हिस्सा मानते हैं और उनका मानना है कि इसका इस्तेमाल राष्ट्रहित में किया जाना चाहिए। (Indian Army Social Media Policy)

2020 में लगाया था 89 ऐप्स पर बैन

2018 और 2019 के दौरान तत्कालीन थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सोशल मीडिया को लेकर संतुलित रुख अपनाने की बात कही थी। हालंकि वे खुद मोबाइल फोन नहीं रखते थे, लेकिन मानते थे कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल रोका नहीं जा सकता। उन्होंने यह माना था कि सैनिकों को पूरी तरह सोशल मीडिया से दूर रखना संभव नहीं है, लेकिन इसके नियंत्रित इस्तेमाल की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया था कि आधुनिक युद्ध में इंफॉर्मेशन वॉरफेयर महत्वपूर्ण है, और सोशल मीडिया को दुश्मन (जैसे प्रॉक्सी वॉर या आतंकवाद में) के खिलाफ फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन सैनिकों को ट्रेनिंग देकर जोखिम कम करने चाहिए। हालांकि, हनीट्रैप के बढ़ते मामलों के बाद सेना ने 2020 में कई लोकप्रिय 89 ऐप्स पर सख्त बैन लगाया था और अकाउंट डिलीट करने तक के निर्देश जारी किए गए थे।

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गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद सोशल मीडिया और डिजिटल ऐप्स को लेकर सेना अलर्ट हो गई थी। उस दौरान फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, पबजी समेत कई दूसरी ऐप्स पर भी बैन लगाया गया था। सेना के मुताबिक, उस दौरान बड़ी संख्या में सैनिकों ने निर्देशों का पालन करते हुए किया और 13 लाख सैनिकों में सिर्फ 8 मामलों में ही निर्देशों का उल्लंघन पाया गया था। (Indian Army Social Media Policy)

यूनिफॉर्म में फोटो डालने पर रोक

2023 और 2024 में भी सेना की ओर से कई एडवाइजरी जारी की गईं, जिनमें जवानों को यूनिफॉर्म में फोटो डालने, रैंक या यूनिट की जानकारी साझा करने और जियो-टैगिंग का इस्तेमाल बंद रखने की हिदायत दी गई थी। अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने और निजी जानकारी साझा न करने की बात भी कही गई थी। (Indian Army Social Media Policy)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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