📍नई दिल्ली | 17 Apr, 2026, 8:37 PM
Army Commanders Conference 2026: भारतीय सेना की अहम आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस चार दिन की चर्चा के बाद शुक्रवार को खत्म हो गई। इस बैठक में सेना के शीर्ष अधिकारी, सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि और सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसलों पर विचार किया गया। इस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की।
इस बार कॉन्फ्रेंस का फोकस बदलते युद्ध के तरीके, नई टेक्नोलॉजी और सेना को ज्यादा आधुनिक बनाने पर रहा। सेना ने साल 2026 को “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी” का वर्ष भी घोषित किया है।
Army Commanders Conference 2026: बदलते युद्ध पर हुई चर्चा
कॉन्फ्रेंस में यह बात सामने आई कि अब युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां केवल हथियार और सैनिक अहम होते थे, अब डेटा, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी की भूमिका बहुत बढ़ गई है।
आज के समय में युद्ध केवल मैदान में नहीं, बल्कि साइबर, स्पेस और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिए भी लड़ा जा रहा है। ऐसे में सेना को हर मोर्चे पर तैयार रहने की जरूरत है।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक
इस बैठक में ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस ऑपरेशन के दौरान तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल को अहम माना गया। खास तौर पर ड्रोन यानी अनमैन्ड एरियल सिस्टम (यूएएस) और उन्हें रोकने वाले सिस्टम काउंटर-यूएएस (सी-यूएएस) की भूमिका पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि अब ड्रोन युद्ध का एक जरूरी हिस्सा बन चुके हैं, इसलिए इनके इस्तेमाल और उनसे बचाव दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। (Army Commanders Conference 2026)
टेक्नोलॉजी और मॉर्डनाइजेशन पर फोकस
कॉन्फ्रेंस में सेना को आधुनिक बनाने के लिए नई टेक्नोलॉजी को अपनाने पर जोर दिया गया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और नेटवर्क आधारित सिस्टम को शामिल करने की बात कही गई। सेना अब ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है, जहां अलग-अलग यूनिट्स के बीच रियल टाइम में जानकारी साझा हो सके। इससे ऑपरेशन के दौरान फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और समन्वय बेहतर होगा। (Army Commanders Conference 2026)
“नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी” क्यों अहम
सेना ने 2026 को “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी” का वर्ष घोषित किया है। इसका मतलब है कि अब ऑपरेशन में डेटा और कम्युनिकेशन सिस्टम को केंद्र में रखा जाएगा। इससे अलग-अलग मोर्चों पर तैनात यूनिट्स एक साथ जुड़ी रहेंगी और किसी भी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकेगी। इससे सेना की ऑपरेशनल तैयारी को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
कॉन्फ्रेंस में दुनिया के बदलते हालात पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि अलग-अलग देशों में चल रहे संघर्षों से यह साफ है कि सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। इस दौरान यह भी कहा गया कि अब केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी ताकत भी उतनी ही जरूरी हो गई है। इसलिए सभी क्षेत्रों में तैयारी रखना जरूरी है।
बैठक में यह भी सामने आया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना जरूरी है। हाल के समय में सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए देश के अंदर ही ज्यादा से ज्यादा उत्पादन करने पर जोर दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि अगर जरूरी सैन्य उपकरण देश में ही बनेंगे, तो किसी भी संकट के समय सेना को परेशानी नहीं होगी। इसके लिए रक्षा उत्पादन को तेज करने की जरूरत बताई गई।
कॉन्फ्रेंस में सिविल और मिलिट्री संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया गया। इसमें अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही गई। अधिकारियों ने बताया कि आज के समय में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे जटिल हो गए हैं, इसलिए पूरे देश के स्तर पर मिलकर काम करना जरूरी है। (Army Commanders Conference 2026)
किन-किन मुद्दों पर हुई चर्चा
चार दिन चली इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर विचार हुआ। इसमें सेना की तैयारी, ट्रेनिंग, नई रणनीति, मेंटेनेंस, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी विकास जैसे विषय शामिल रहे। इसके अलावा जॉइंटनेस यानी तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस कॉन्फ्रेंस में केवल सेना के अधिकारी ही नहीं, बल्कि सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इसमें कैबिनेट सेक्रेटरी, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, डिफेंस सेक्रेटरी और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन जैसे लोग मौजूद रहे। नौसेना प्रमुख ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। (Army Commanders Conference 2026)

