📍नई दिल्ली | 29 May, 2026, 2:53 PM
Operation Sindoor Book: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अब एक खास स्मारक पुस्तक जारी की गई है, जिसमें उन सैनिकों के अनुभव दर्ज किए गए हैं जिन्होंने इस सैन्य अभियान में सीधे हिस्सा लिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवाार को इस विशेष पुस्तक का विमोचन किया। इस किताब में सेना, नौसेना और वायुसेना के 100 अधिकारियों, जवानों, एयरमैन और नाविकों की कहानियां शामिल की गई हैं।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस किताब का उद्देश्य युद्ध की वास्तविक परिस्थितियों को समझाना है। इसमें केवल सैन्य उपलब्धियों की बात नहीं बल्कि उन भावनात्मक और मानसिक परिस्थितियों को भी दिखाया गया है जिनसे सैनिक गुजरते हैं।
Operation Sindoor Book: राजनाथ सिंह ने क्या कहा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पुस्तक को ऑपरेशन सिंदूर में शामिल सैनिकों को समर्पित श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह पुस्तक देश के नागरिकों को सैनिकों के समर्पण और साहस से जोड़ती है।
उन्होंने कहा कि देश के लोगों को इस किताब से प्रेरणा लेनी चाहिए और ऐसे नागरिक बनना चाहिए जो राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सैनिकों द्वारा चुकाई गई भारी कीमत को समझ सकें।
“Operation Sindoor was an unprecedented success where India compelled Pakistan to seek a ceasefire within four days. It was different from all other wars India has fought so far.” — Defence Minister Rajnath Singh 🇮🇳
Speaking on the commemorative publication on #OperationSindoor,… pic.twitter.com/tNg4xOyrb4— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) May 29, 2026
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की बड़ी सैन्य सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भारत ने पाकिस्तान को केवल चार दिनों के भीतर युद्धविराम की मांग करने के लिए मजबूर कर दिया था। रक्षा मंत्री के मुताबिक यह संघर्ष भारत द्वारा लड़े गए पिछले युद्धों से अलग था।
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल घटनाओं का इतिहास नहीं बताती, बल्कि आधुनिक युद्ध के उस मानवीय पक्ष को सामने लाती है जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में फैसले लेने की क्षमता और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता मिलकर रणनीति को सफलता में बदलते हैं। (Operation Sindoor Book)
सैनिकों की नजर से दिखाया गया युद्ध
इस पुस्तक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें युद्ध को केवल बड़े सैन्य मुख्यालय या कमांडरों के नजरिए से नहीं दिखाया गया। आमतौर पर युद्ध से जुड़ी आधिकारिक किताबों में रणनीति, फैसले और ऑपरेशन रूम की गतिविधियों पर ज्यादा फोकस किया जाता है।
लेकिन इस पुस्तक में उन सैनिकों के अनुभव शामिल किए गए हैं जो सीधे मोर्चे पर मौजूद थे। इसमें लाइन ऑफ कंट्रोल पर दुश्मन के बंकरों को निशाना बनाने वाले जवानों से लेकर दुश्मन के ड्रोन को ट्रैक और नष्ट करने वाले एयर डिफेंस ऑपरेटरों तक की बातें दर्ज की गई हैं।
किताब में उन लड़ाकू पायलटों के अनुभव भी शामिल हैं जो हथियार छोड़ने के समय कॉकपिट में मौजूद थे। इसके अलावा समुद्र में ऑपरेशन के दौरान अलर्ट मोड पर काम कर रहे नौसेना के जवानों के अनुभव भी इस पुस्तक का हिस्सा बनाए गए हैं। (Operation Sindoor Book)
तीनों सेनाओं के जवानों की कहानियां
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह पुस्तक तीनों सेनाओं के साझा अनुभवों पर आधारित है। इसमें थलसेना, नौसेना और वायुसेना के अलावा इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ और संयुक्त सैन्य संगठनों के अधिकारियों और जवानों की बातें भी शामिल हैं।
किताब में कॉम्बैट एविएटर्स, सरफेस-टू-एयर मिसाइल यूनिट्स, स्पेशल फोर्स ऑपरेटर्स, सिग्नलर्स, लॉजिस्टिक स्टाफ और मेडिकल अधिकारियों के अनुभव दर्ज किए गए हैं।
युद्ध के दौरान मेडिकल टीमों ने किस तरह दबाव में काम किया, सप्लाई नेटवर्क कैसे चलाया गया और अलग-अलग यूनिट्स के बीच तालमेल कैसे बना रहा, इन सभी पहलुओं को भी विस्तार से शामिल किया गया है। (Operation Sindoor Book)
आधुनिक युद्ध का अलग चेहरा
सूत्रों का कहना है कि आधुनिक युद्ध अब केवल टैंक और बंदूकों तक सीमित नहीं रह गया है। ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और जॉइंट मिलिटरी कोआर्डिनेशन की बड़ी भूमिका रही।
इसी वजह से पुस्तक में उन तकनीकी और मानवीय चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है जिनका सामना सैनिकों ने युद्ध के दौरान किया।
यह स्मारक पुस्तक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के मार्गदर्शन में तैयार की गई है। सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े व्यक्तिगत अनुभवों को अलग-अलग सैन्य मीडिया और स्ट्रैटेजिक कम्यूनिकेशन यूनिट्स ने संकलित किया।
इसके प्रकाशन में यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया ने भी सहयोग दिया है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार इस पुस्तक को तैयार करने में कई महीनों का समय लगा और अलग-अलग यूनिट्स से अनुभव जुटाए गए।
इस पुस्तक का विमोचन नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में किया गया। कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं के तालमेल और संयुक्त कार्रवाई की चर्चा की। अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान आधुनिक सैन्य समन्वय का बड़ा उदाहरण था।
आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पुस्तक
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि आम नागरिक अक्सर युद्ध को केवल खबरों और आधिकारिक बयानों के जरिए देखते हैं। लेकिन इस पुस्तक के जरिए लोगों को यह समझने का मौका मिलेगा कि मोर्चे पर मौजूद सैनिक किन हालात में काम करते हैं।
इसमें युद्ध के दौरान के वास्तविक अनुभवों को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है ताकि आम लोग भी सैनिकों की भूमिका और उनकी चुनौतियों को समझ सकें।
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की किताबें आने वाली पीढ़ियों को देश की सुरक्षा में लगे जवानों के योगदान के बारे में जागरूक करती हैं। (Operation Sindoor Book)


